Anand Bakshi Death Anniversary: बंदूक छोड़ थामी कलम, Army का जवान ऐसे बना Bollywood का Legend

अपने सदाबहार गीतों से लोगों को अपना दीवाना बनाने वाले बॉलीवुड के फेमस गीतकार आनंद बख्शी का 30 मार्च को निधन हो गया था। उन्होंने करीब चार दशकों तक सभी के दिलों पर राज किया था। फिल्म गीतकार आनंद बख्शी का साल 2002 में 72 साल की उम्र में निधन हो गया था। शायद ही कोई ऐसा होगा, जिसने गीतकार आनंद बख्शी के लिखे मैजिकल गानों को नहीं सुना होगा। तो आइए जानते हैं उनकी डेथ एनिवर्सरी के मौके पर आनंद बख्शी के जीवन से जुड़ी कुछ रोचक बातों के बारे में...जन्म और परिवारब्रिटिश भारत के पंजाब प्रांत के रावलपिंडी में 21 जुलाई 1930 में आनंद बख्शी का जन्म हुआ था। इनके पिता रावलपिंडी में बैंक मैनेजर थे। किशोरावस्था में वह टेलीफोन ऑपरेटर बनकर सेना में शामिल हो गए। लेकिन बम्बई और सिनेमा दुनिया में आने की ख्वाहिश हमेशा जिंदा रही। देश का बंटवारा हुआ तो इनका परिवार हिंदुस्तान आ गया। जब मायानगरी में कुछ नहीं हुआ, तो आनंद बख्श ने फिर से सेना ज्वॉइन कर ली।इसे भी पढ़ें: Shashi Kapoor Birth Anniversary: बॉलीवुड ही नहीं Hollywood में भी था जलवा, जानें लेजेंड का सफरफिल्मी सफरतीन साल तक सेना में नौकरी करने के बाद आनंद बख्शी ने तय किया कि उनकी जिंदगी का मकसद बंदूक चलाना नहीं बल्कि गीत लिखना है। अपने फिल्मी करियर में आनंद बख्शी ने करीब 4000 से ज्यादा गीत लिखे थे। उनका साल 1957 में पहली बार गीत लिखने का मौका मिला। लेकिन सफलता उनसे दामन चुराती रही। साल 1963 में निर्देशक और अभिनेता राज कपूर ने आनंद बख्शी को अपनी फिल्म में गीत लिखने का मौका दिया। इसके बाद सफलता ने कभी आनंद बख्शी का साथ नहीं छोड़ा।उनके करियर का शुरूआती माइलस्टोन बनी 'आराधना', 'कटी पतंग' और 'अमर प्रेम' जैसी फिल्में बनीं। इन्हीं फिल्मों की बदौलत अभिनेता राजेश खन्ना भारतीय सिनेमा के पहले सुपरस्टार बने थे। आनंद ने फिल्मकारों की कई पीढ़ियों के साथ काम किया था। आनंद बख्शी की सबसे बड़ी खासियत थी कि समय के साथ उनके गीतों का लहजा बदलता रहा था।गीतसाल 1965 में 'जब जब फूल खिले' फिल्म आई, तो इसके गाने 'समां... समां है ये प्यार का', 'एक था गुल और एक थी बुलबुल' और 'परदेसियों से न अंखियां मिलाना' सुपरहिट साबित हुए। वहीं आनंद बख्शी की गीतकार के रूप में पहचान भी बन गई।मृत्युवहीं 30 मार्च 2002 को 71 साल की उम्र में गीतकार आनंद बख्शी ने इस दुनिया को अलविदा कह दिया था।

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Apr 3, 2026 - 12:24
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Anand Bakshi Death Anniversary: बंदूक छोड़ थामी कलम, Army का जवान ऐसे बना Bollywood का Legend
अपने सदाबहार गीतों से लोगों को अपना दीवाना बनाने वाले बॉलीवुड के फेमस गीतकार आनंद बख्शी का 30 मार्च को निधन हो गया था। उन्होंने करीब चार दशकों तक सभी के दिलों पर राज किया था। फिल्म गीतकार आनंद बख्शी का साल 2002 में 72 साल की उम्र में निधन हो गया था। शायद ही कोई ऐसा होगा, जिसने गीतकार आनंद बख्शी के लिखे मैजिकल गानों को नहीं सुना होगा। तो आइए जानते हैं उनकी डेथ एनिवर्सरी के मौके पर आनंद बख्शी के जीवन से जुड़ी कुछ रोचक बातों के बारे में...

जन्म और परिवार

ब्रिटिश भारत के पंजाब प्रांत के रावलपिंडी में 21 जुलाई 1930 में आनंद बख्शी का जन्म हुआ था। इनके पिता रावलपिंडी में बैंक मैनेजर थे। किशोरावस्था में वह टेलीफोन ऑपरेटर बनकर सेना में शामिल हो गए। लेकिन बम्बई और सिनेमा दुनिया में आने की ख्वाहिश हमेशा जिंदा रही। देश का बंटवारा हुआ तो इनका परिवार हिंदुस्तान आ गया। जब मायानगरी में कुछ नहीं हुआ, तो आनंद बख्श ने फिर से सेना ज्वॉइन कर ली।

इसे भी पढ़ें: Shashi Kapoor Birth Anniversary: बॉलीवुड ही नहीं Hollywood में भी था जलवा, जानें लेजेंड का सफर

फिल्मी सफर

तीन साल तक सेना में नौकरी करने के बाद आनंद बख्शी ने तय किया कि उनकी जिंदगी का मकसद बंदूक चलाना नहीं बल्कि गीत लिखना है। अपने फिल्मी करियर में आनंद बख्शी ने करीब 4000 से ज्यादा गीत लिखे थे। उनका साल 1957 में पहली बार गीत लिखने का मौका मिला। लेकिन सफलता उनसे दामन चुराती रही। साल 1963 में निर्देशक और अभिनेता राज कपूर ने आनंद बख्शी को अपनी फिल्म में गीत लिखने का मौका दिया। इसके बाद सफलता ने कभी आनंद बख्शी का साथ नहीं छोड़ा।

उनके करियर का शुरूआती माइलस्टोन बनी 'आराधना', 'कटी पतंग' और 'अमर प्रेम' जैसी फिल्में बनीं। इन्हीं फिल्मों की बदौलत अभिनेता राजेश खन्ना भारतीय सिनेमा के पहले सुपरस्टार बने थे। आनंद ने फिल्मकारों की कई पीढ़ियों के साथ काम किया था। आनंद बख्शी की सबसे बड़ी खासियत थी कि समय के साथ उनके गीतों का लहजा बदलता रहा था।

गीत

साल 1965 में 'जब जब फूल खिले' फिल्म आई, तो इसके गाने 'समां... समां है ये प्यार का', 'एक था गुल और एक थी बुलबुल' और 'परदेसियों से न अंखियां मिलाना' सुपरहिट साबित हुए। वहीं आनंद बख्शी की गीतकार के रूप में पहचान भी बन गई।

मृत्यु

वहीं 30 मार्च 2002 को 71 साल की उम्र में गीतकार आनंद बख्शी ने इस दुनिया को अलविदा कह दिया था।

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