सीरियाई डेमोक्रेटिक फोर्स ने अब अमेरिकी बेस का नियंत्रण अपने हाथों में ले लिया है। कसरात बेस से आई तस्वीरों में में सीरियाई फोर्स के जवान दिखाई दे रहे हैं और तमाम गाड़ियों के साथ माल की आवाजाही दिखाई दे रही है। इस बेस की सुरक्षा में तैनात सीरियन डेमोक्रेटिक फोर्सेस की तस्वीरें सामने आई हैं। सीरिया के विदेश मंत्रालय के मुताबिक मध्य पूर्व के उथल पुथल भरे माहौल में एक नया अध्याय आया है। सीरिया ने अमेरिका द्वारा संचालित सभी सैन्य बेसों पर अपना नियंत्रण ले लिया है। यह ट्रांसफर पूरी कोऑर्डिनेशन के साथ हुआ है। यह घटना महज एक सैन्य बदलाव नहीं बल्कि क्षेत्रीय शक्ति संतुलन आतंकवाद विरोधी अभियान अंतरराष्ट्रीय संबंधों के भविष्य को प्रभावित करने वाली है।
अमेरिकी सेना सीरिया में साल 2014 से मुख्य रूप से आईएसआईएस के खिलाफ गठबंधन का हिस्सा थी। 2019 में खलीफा बगदादी के मारे जाने के बाद आईएसआईएस की सैन्य क्षमता लगभग खत्म हो गई। फिर भी अमेरिका कुछ बेस जैसे अल तरफ नॉर्थ ईस्टर्न बेस पर मौजूद था ताकि आईएसआईएस के वापस से खड़े होने की आशंका को भी खत्म किया जा सके और कुछ समर्थित बलों को अब पूरी तरीके से ट्रांसफर का मतलब है कि अमेरिका ने अपनी कंडीशन बेस्ड वापसी की नीति को पूरा कर लिया है। सीरिया के लिए यह घटना एक कूटनीतिक जीत है। दमिश्क अब इन बेसों को अपनी संप्रभुता के प्रतीक के रूप में इस्तेमाल कर सकता है। दोनों देशों के बीच समन्वय का उल्लेख तनाव कम होने का संकेत भी देता है।
यह साल 2025-26 में शुरू हुई अमेरिकी वापसी की प्रक्रिया का अंतिम चरण मालूम पड़ता है। माना जा रहा है कि इस क्षेत्र में स्थिरता अब और बढ़ सकती है क्योंकि सीरियाई सेना अब सीमा क्षेत्र जैसे इराक, जॉर्डन ट्राई बॉर्डर की सुरक्षा खुद संभाल रही है। हालांकि खतरा यह भी है कि आईएसआईएस के अभी भी कुछ लड़ाके आतंकी छिपे हुए हो सकते हैं। बेसों के बिना अमेरिकी निगरानी कम होने से यह वापस अपने पैरों पर खड़ा हो सकते हैं। सीरिया के लिए सबसे बड़ा समस्या यह है कि बेसों का प्रबंधन महंगा और जटिल होता है। यदि सीियाई सेना इसमें सफल नहीं हुई तो फिर अस्थिरता बढ़ सकती है।