महाराष्ट्र: जाली दस्तावेजों के जरिए जमीन की खरीद-फरोख्त की कोशिश के आरोप में तीन लोग गिरफ्तार

महाराष्ट्र के ठाणे जिले में एक मृत व्यक्ति के नाम पर नकली दस्तावेज तैयार कर जमीन की खरीद-फरोख्त की कोशिश करने के आरोप में गुजरात के तीन लोगों को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस ने सोमवार को यह जानकारी दी। एक अधिकारी ने बताया कि मीरा भायंदर-वसई विरार (एमबीवीवी) पुलिस की एक टीम ने जाल बिछाकर 12 सितंबर को मीरा रोड (पूर्व) के पेणकरपाडा इलाके से तीनों को गिरफ्तार कर लिया, जिनमें से एक प्रॉपर्टी एजेंट है। उन्होंने बताया कि मनीष धरनीधर शाह नामक व्यक्ति की शिकायत पर मामला दर्ज किया गया है, जो उस जमीन के वैध उत्तराधिकारी हैं। अधिकारी ने कहा, “शिकायतकर्ता के पिता, दिवंगत धरणीधर खीमचंद शाह (डी.के. शाह) ने 1978 में यह जमीन खरीदी थी। 1994 में उनके निधन के बाद, यह संपत्ति उनके बेटे और परिवार को हस्तांतरित कर दी गई। हालांकि, आरोपियों ने कथित तौर पर ‘डी.के. शाह’ के संक्षिप्त नाम का दुरुपयोग किया और फर्जी प्राधिकरण पत्र, विशेष पावर ऑफ अटॉर्नी और अन्य दस्तावेज तैयार कर धोखाधड़ी से जमीन बेचने की कोशिश की।” उन्होंने बताया कि भावनगर के एक प्रॉपर्टी एजेंट धर्मेशभाई केशवजी शाह ने कथित रूप से फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल करते हुए सूरत के खरीदारों विनुभाई पोपटभाई रवानी और अमृतभाई प्रेमजीभाई रमानी के साथ उस जमीन को बेचने का समझौता किया। अधिकारी ने बताया कि तीनों आरोपी कई महीनों से फरार थे और उन्हें तकनीकी निगरानी की मदद से पकड़ लिया गया।

PNSPNS
Sep 16, 2025 - 04:29
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महाराष्ट्र: जाली दस्तावेजों के जरिए जमीन की खरीद-फरोख्त की कोशिश के आरोप में तीन लोग गिरफ्तार

महाराष्ट्र के ठाणे जिले में एक मृत व्यक्ति के नाम पर नकली दस्तावेज तैयार कर जमीन की खरीद-फरोख्त की कोशिश करने के आरोप में गुजरात के तीन लोगों को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस ने सोमवार को यह जानकारी दी।

एक अधिकारी ने बताया कि मीरा भायंदर-वसई विरार (एमबीवीवी) पुलिस की एक टीम ने जाल बिछाकर 12 सितंबर को मीरा रोड (पूर्व) के पेणकरपाडा इलाके से तीनों को गिरफ्तार कर लिया, जिनमें से एक प्रॉपर्टी एजेंट है।

उन्होंने बताया कि मनीष धरनीधर शाह नामक व्यक्ति की शिकायत पर मामला दर्ज किया गया है, जो उस जमीन के वैध उत्तराधिकारी हैं। अधिकारी ने कहा, “शिकायतकर्ता के पिता, दिवंगत धरणीधर खीमचंद शाह (डी.के. शाह) ने 1978 में यह जमीन खरीदी थी। 1994 में उनके निधन के बाद, यह संपत्ति उनके बेटे और परिवार को हस्तांतरित कर दी गई। हालांकि, आरोपियों ने कथित तौर पर ‘डी.के. शाह’ के संक्षिप्त नाम का दुरुपयोग किया और फर्जी प्राधिकरण पत्र, विशेष पावर ऑफ अटॉर्नी और अन्य दस्तावेज तैयार कर धोखाधड़ी से जमीन बेचने की कोशिश की।”

उन्होंने बताया कि भावनगर के एक प्रॉपर्टी एजेंट धर्मेशभाई केशवजी शाह ने कथित रूप से फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल करते हुए सूरत के खरीदारों विनुभाई पोपटभाई रवानी और अमृतभाई प्रेमजीभाई रमानी के साथ उस जमीन को बेचने का समझौता किया। अधिकारी ने बताया कि तीनों आरोपी कई महीनों से फरार थे और उन्हें तकनीकी निगरानी की मदद से पकड़ लिया गया।

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