कनाडा की खुफिया सेवा की एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि खालिस्तानी तत्व देश की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा हैं और उनकी गतिविधियां चरमपंथी एजेंडा को बढ़ावा देती रहती हैं। यह रिपोर्ट कनाडाई सुरक्षा खुफिया सेवा (सीएसआईएस) द्वारा 2025 के खुफिया आकलन के आधार पर तैयार की गई थी और शुक्रवार को संसद में पेश की गई। रिपोर्ट में एयर इंडिया फ्लाइट 182 पर हुए बम हमले की 40वीं वर्षगांठ का भी जिक्र किया गया है, जिसमें 329 लोगों की जान गई थी और इसे कनाडा के इतिहास का सबसे घातक आतंकवादी हमला" बताया गया है। हालांकि, इसमें कहा गया है कि 2025 में देश में कनाडा स्थित खालिस्तानी चरमपंथियों (सीबीकेई) से संबंधित कोई हमला नहीं हुआ।
समाचार एजेंसी एएनआई के अनुसार, रिपोर्ट में कहा गया है, सीबीकेई द्वारा हिंसक चरमपंथी गतिविधियों में निरंतर संलिप्तता कनाडा और कनाडाई हितों के लिए राष्ट्रीय सुरक्षा खतरा बनी हुई है। कुछ सीबीकेई कनाडाई नागरिकों से अच्छी तरह से जुड़े हुए हैं जो अपने हिंसक चरमपंथी एजेंडा को बढ़ावा देने के लिए कनाडाई संस्थानों का लाभ उठाते हैं और भोले-भाले समुदाय के सदस्यों से धन इकट्ठा करते हैं जिसे बाद में हिंसक गतिविधियों में लगाया जाता है। एक साल में यह दूसरी बार है जब सीएसआईएस ने कनाडा में खालिस्तानी तत्वों के खिलाफ चेतावनी जारी की है। पिछले साल जून में अपनी रिपोर्ट में सीएसआईएस ने कहा था कि खालिस्तानी चरमपंथी अपने प्रचार के लिए कनाडा की धरती का इस्तेमाल करते आ रहे हैं और देश को "मुख्य रूप से भारत में हिंसा को बढ़ावा देने, उसके लिए धन जुटाने या उसकी योजना बनाने के अड्डे" के रूप में उपयोग कर रहे हैं।
भारत ने कनाडा की धरती पर खालिस्तानी तत्वों की मौजूदगी को बार-बार उजागर किया है और ओटावा से उनके खिलाफ कड़े और तत्काल कदम उठाने का आग्रह किया है। इसी वजह से भारत-कनाडा संबंध बेहद खराब हो गए थे, खासकर जस्टिन ट्रूडो के प्रधानमंत्री रहते हुए। हालांकि, मार्क कार्नी के कनाडा में सत्ता में आने के बाद से दोनों देश अपने संबंधों को सुधारने की कोशिश कर रहे हैं। इसी साल मार्च में कार्नी से मुलाकात के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी संकेत दिया था कि कनाडा को अपनी धरती पर मौजूद खालिस्तानी तत्वों के खिलाफ कार्रवाई करनी चाहिए। उन्होंने कहा था कि आतंकवाद, कट्टरवाद और अतिवाद पूरी मानवता के लिए गंभीर चिंता का विषय हैं। उस समय कार्नी की भारत यात्रा के दौरान एक संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा था, "हम इस बात से सहमत हैं कि आतंकवाद, अतिवाद और कट्टरवाद न केवल हमारे दोनों देशों के लिए बल्कि पूरी मानवता के लिए गंभीर चुनौतियां हैं। इन खतरों से निपटने में हमारा घनिष्ठ सहयोग वैश्विक शांति और स्थिरता के लिए आवश्यक है।