धड़ाधड़ ड्रोन-मिसाइल बना रहा ईरान, इजरायल-अमेरिका हैरान!

अमेरिका और इजराइल के बीच भीषण हवाई हमलों के बाद यह दावा किया जा रहा था कि ईरान का सैन्य ढांचा पूरी तरह से ध्वस्त हो चुका है और उसे दोबारा खड़े होने में सालों का वक्त लगेगा। लेकिन अमेरिकी खुफिया एजेंसियों की एक ताजा और बेहद गोपनीय रिपोर्ट ने इन दावों की हवा निकाल दी। अंतरराष्ट्रीय मीडिया द्वारा सार्वजनिक की गई रिपोर्ट के मुताबिक अप्रैल 2026 में हुए युद्ध विराम का फायदा उठाकर ईरान उम्मीद से कहीं ज्यादा तेजी से अपनी सैन्य क्षमताओं को दोबारा बहाल कर रहा है। इसने वाशिंगटन और यरूशलम में सुरक्षा रणनीतिकारों के बीच खलबली मचा दी है। खुफ़िया रिपोर्ट्स में दावा किया गया कि ईरान ने अपने सैन्य ठिकानों पर हुए हमलों के बावजूद बेहद कम समय में ड्रोन उत्पादन फिर से शुरू कर दिया है। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि बैलेस्टिक मिसाइलों की तुलना में ड्रोन निर्माण क्षमता को नष्ट करना बेहद मुश्किल होता है क्योंकि इसके लिए किसी विशालकाय इंफ्रास्ट्रक्चर की जरूरत नहीं होती। इसे छोटे और छिपे हुए ठिकानों से भी अंजाम दिया जा सकता है। इसे भी पढ़ें: मोदी के भारत लौटते ही अचानक कौन मिलने आया? बड़ा खेल शुरू!अनुमान है कि अगले कुछ ही महीनों के भीतर ईरान अपनी पूर्ण ड्रोन हमलावर क्षमता को वापस हासिल कर लेगा। इसके अलावा अमेरिकी और इजराइली बमबारी के बावजूद ईरान अपने लगभग 2 तिहाई मिसाइल लांचर्स को सुरक्षित बचाने में कामयाब रहा है। जमीन के सैकड़ों फीट नीचे बनी उसकी मिसाइल सिटीज और सुरंगे भी पूरी तरह सुरक्षित हैं। जहां मिसाइल साइट और हथियार बनाने वाली फैक्ट्रियों को युद्ध स्तर पर फिर से तैयार किया जा रहा है। ईरान की इस अप्रत्याशित रफ्तार के पीछे रूस और चीन की गुप्त रणनीतिक मदद को बड़ा कारण माना जा रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक प्रतिबंधों और अमेरिकी नाकेबंदी के बावजूद चीन लगातार ईरान को ऐसे संवेदनशील उपकरण और कंपोनेंट सप्लाई कर रहा है जो मिसाइल और ड्रोन बनाने के लिए जरूरी है। वहीं रूस के साथ ईरान का बढ़ता सैन्य सहयोग उसे इस संकट से उभरने में तकनीकी और ढांचागत मजबूती प्रदान कर रहा है। इसे भी पढ़ें: Iran War फिर शुरू होने की संभावना के बीच Modi से मिले Marco Rubio, PM को दिया Trump का खास संदेशअमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि इसी विदेशी मदद के बूते ईरान सालों के बजाय महज कुछ महीनों में अपनी सैन्य ताकत दोबारा हासिल करने की स्थिति में आ गया है। इस नई रिपोर्ट ने अमेरिका के ऑपरेशन एपिक फ्यूरी की सफलता पर बड़े सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं। अमेरिकी सैन्य अधिकारियों और खुद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पहले यह दावा किया था कि हमलों ने ईरान के करीब 90% डिफेंस इंडस्ट्रियल बेस को तबाह कर दिया है और वह लंबे समय के लिए कमजोर हो गया है। लेकिन जमीनी हकीकत इन दावों के विपरीत निकली है। जिससे साफ होता है कि ईरान का रक्षा तंत्र बेहद लचीला है। वर्तमान में चल रहा छह हफ्तों का युद्ध विराम अब खत्म होने की कगार पर है। राष्ट्रपति  ट्रंप ने साफ चेतावनी दी है कि अगर ईरान शांति समझौते की शर्तों को नहीं मानता है तो अमेरिका दोबारा हमले शुरू कर सकता है। लेकिन इस नई खुफिया रिपोर्ट का सीधा मतलब यह है कि अगर जंग दोबारा छिड़ती है तो ईरान पूरी तरह से लाचार नहीं होगा बल्कि उसके पास मिसाइल और अत्याधुनिक ड्रोंस का एक बड़ा जखीरा पहले से ही मौजूद होगा। सुरक्षित बचे लांचरों और नए ड्रोनों के दम पर ईरान अब भी इजराइल और खाड़ी देशों के लिए गंभीर खतरा बना हुआ है।

PNSPNS
May 24, 2026 - 15:09
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धड़ाधड़ ड्रोन-मिसाइल बना रहा ईरान, इजरायल-अमेरिका हैरान!
अमेरिका और इजराइल के बीच भीषण हवाई हमलों के बाद यह दावा किया जा रहा था कि ईरान का सैन्य ढांचा पूरी तरह से ध्वस्त हो चुका है और उसे दोबारा खड़े होने में सालों का वक्त लगेगा। लेकिन अमेरिकी खुफिया एजेंसियों की एक ताजा और बेहद गोपनीय रिपोर्ट ने इन दावों की हवा निकाल दी। अंतरराष्ट्रीय मीडिया द्वारा सार्वजनिक की गई रिपोर्ट के मुताबिक अप्रैल 2026 में हुए युद्ध विराम का फायदा उठाकर ईरान उम्मीद से कहीं ज्यादा तेजी से अपनी सैन्य क्षमताओं को दोबारा बहाल कर रहा है। इसने वाशिंगटन और यरूशलम में सुरक्षा रणनीतिकारों के बीच खलबली मचा दी है। खुफ़िया रिपोर्ट्स में दावा किया गया कि ईरान ने अपने सैन्य ठिकानों पर हुए हमलों के बावजूद बेहद कम समय में ड्रोन उत्पादन फिर से शुरू कर दिया है। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि बैलेस्टिक मिसाइलों की तुलना में ड्रोन निर्माण क्षमता को नष्ट करना बेहद मुश्किल होता है क्योंकि इसके लिए किसी विशालकाय इंफ्रास्ट्रक्चर की जरूरत नहीं होती। इसे छोटे और छिपे हुए ठिकानों से भी अंजाम दिया जा सकता है। 

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अनुमान है कि अगले कुछ ही महीनों के भीतर ईरान अपनी पूर्ण ड्रोन हमलावर क्षमता को वापस हासिल कर लेगा। इसके अलावा अमेरिकी और इजराइली बमबारी के बावजूद ईरान अपने लगभग 2 तिहाई मिसाइल लांचर्स को सुरक्षित बचाने में कामयाब रहा है। जमीन के सैकड़ों फीट नीचे बनी उसकी मिसाइल सिटीज और सुरंगे भी पूरी तरह सुरक्षित हैं। जहां मिसाइल साइट और हथियार बनाने वाली फैक्ट्रियों को युद्ध स्तर पर फिर से तैयार किया जा रहा है। ईरान की इस अप्रत्याशित रफ्तार के पीछे रूस और चीन की गुप्त रणनीतिक मदद को बड़ा कारण माना जा रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक प्रतिबंधों और अमेरिकी नाकेबंदी के बावजूद चीन लगातार ईरान को ऐसे संवेदनशील उपकरण और कंपोनेंट सप्लाई कर रहा है जो मिसाइल और ड्रोन बनाने के लिए जरूरी है। वहीं रूस के साथ ईरान का बढ़ता सैन्य सहयोग उसे इस संकट से उभरने में तकनीकी और ढांचागत मजबूती प्रदान कर रहा है। 

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अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि इसी विदेशी मदद के बूते ईरान सालों के बजाय महज कुछ महीनों में अपनी सैन्य ताकत दोबारा हासिल करने की स्थिति में आ गया है। इस नई रिपोर्ट ने अमेरिका के ऑपरेशन एपिक फ्यूरी की सफलता पर बड़े सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं। अमेरिकी सैन्य अधिकारियों और खुद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पहले यह दावा किया था कि हमलों ने ईरान के करीब 90% डिफेंस इंडस्ट्रियल बेस को तबाह कर दिया है और वह लंबे समय के लिए कमजोर हो गया है। लेकिन जमीनी हकीकत इन दावों के विपरीत निकली है। जिससे साफ होता है कि ईरान का रक्षा तंत्र बेहद लचीला है। वर्तमान में चल रहा छह हफ्तों का युद्ध विराम अब खत्म होने की कगार पर है। राष्ट्रपति  ट्रंप ने साफ चेतावनी दी है कि अगर ईरान शांति समझौते की शर्तों को नहीं मानता है तो अमेरिका दोबारा हमले शुरू कर सकता है। लेकिन इस नई खुफिया रिपोर्ट का सीधा मतलब यह है कि अगर जंग दोबारा छिड़ती है तो ईरान पूरी तरह से लाचार नहीं होगा बल्कि उसके पास मिसाइल और अत्याधुनिक ड्रोंस का एक बड़ा जखीरा पहले से ही मौजूद होगा। सुरक्षित बचे लांचरों और नए ड्रोनों के दम पर ईरान अब भी इजराइल और खाड़ी देशों के लिए गंभीर खतरा बना हुआ है।

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