दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) ने DDA की ज़मीन पर अनधिकृत कब्ज़े और अतिक्रमण के ख़िलाफ़ चेतावनी देते हुए एक सार्वजनिक सूचना जारी की है। इसमें कहा गया है कि ऐसी ज़मीन सरकारी संपत्ति है और उस पर कोई भी अवैध कब्ज़ा, निर्माण या इस्तेमाल कानून का उल्लंघन है। प्राधिकरण ने कहा कि अतिक्रमण को बिना किसी पूर्व सूचना के हटाया जा सकता है और तोड़ने का खर्च अतिक्रमण करने वालों से वसूला जाएगा। साथ ही, कानूनी कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई है, जिसमें तोड़-फोड़, नुकसान की भरपाई और ज़रूरत पड़ने पर FIR दर्ज करना शामिल है। DDA ने लोगों से अपील की है कि वे DDA की ज़मीन पर बनी प्रॉपर्टी का कानूनी स्टेटस जांचे बिना उनसे जुड़ा कोई भी लेन-देन न करें और कब्ज़े की जानकारी अपने ऑफिस या DDA-311 मोबाइल ऐप के ज़रिए दें।
इससे पहले 3 जुलाई को दिल्ली के उपराज्यपाल तरनजीत सिंह संधू ने राष्ट्रीय राजधानी में 'सस्टेनेबल अर्बन डेवलपमेंट के नज़रिए' (Perspective for Sustainable Urban Development) की समीक्षा के लिए दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) की सलाहकार परिषद की बैठक की अध्यक्षता की, जिसमें परिषद ने सार्वजनिक ज़मीन पर अनधिकृत कब्ज़े के खिलाफ़ कड़ा रुख अपनाया। उपराज्यपाल ने DDA को निर्देश दिया कि राजधानी में कहीं भी कब्ज़े के मामले में सख़्त 'ज़ीरो-टॉलरेंस' नीति अपनाई जाए। उन्होंने निर्देश दिया कि ज़मीन के टुकड़ों और इमारतों की रियल-टाइम निगरानी के लिए टेक्नोलॉजी का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया जाए, ताकि किसी भी अनधिकृत कब्ज़े या निर्माण का पता लगाकर उस पर तुरंत कार्रवाई की जा सके।
उपराज्यपाल को DDA द्वारा मंज़ूर बिल्डिंग प्लान से अलग निर्माण की पहचान करने के लिए शुरू किए गए एक विशेष प्रवर्तन अभियान (enforcement drive) के बारे में जानकारी दी गई, जिसमें खास निरीक्षण टीमें फ़ील्ड सर्वे कर रही हैं। उपराज्यपाल ने गंभीर उल्लंघनों के खिलाफ़ सख़्त कार्रवाई का निर्देश दिया, जिसमें नियमों का पालन न करने वाले आर्किटेक्ट्स को पैनल से हटाना और ब्लैकलिस्ट करना शामिल है, और यह भी निर्देश दिया कि असुरक्षित या जर्जर इमारतों की जानकारी तुरंत MCD को दी जाए ताकि उन पर कार्रवाई हो सके। रिलीज़ में कहा गया है कि लैंड पूलिंग वाले इलाकों में हो रहे अनधिकृत निर्माणों की पहचान की जाएगी और फ्लाइंग स्क्वाड टीमों तथा अधिकार-प्राप्त क्विक रिस्पॉन्स टीमों के ज़रिए उन्हें हटाया जाएगा।