चुनाव फायदे के लिए हिंदुओं और मुसलमानों को बांटा जा रहा है: Farooq Abdullah

नेशनल कांफ्रेंस (नेकां) के अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला ने सोमवार को देश में धार्मिक ध्रुवीकरण बढ़ने का दावा किया और आरोप लगाया कि चुनावी फायदे के लिए नफरत की राजनीति को बढ़ावा दिया जा रहा है। पूर्व मुख्यमंत्री ने यहां पार्टी के एक कार्यक्रम के दौरान संवाददाताओं से बात करते हुए कहा कि जम्मू-कश्मीर की जनता ने 1947 में पाकिस्तान के बजाय भारत को चुना था और वह लगातार पड़ोसी देश के खिलाफ खड़ी रही है, जो अब भी क्षेत्र में अशांति फैलाने की कोशिश करता रहता है। बॉलीवुड से काम कम मिलने और इसे “सांप्रदायिक मुद्दे” से जोड़ने संबंधी संगीतकार ए. आर. रहमान की हालिया टिप्पणी पर उठे विवाद के बारे में पूछे जाने पर अब्दुल्ला ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में देश में नफरत की आग भड़काई गई है और चुनावी उद्देश्यों से हिंदुओं और मुसलमानों को जानबूझकर बांटा जा रहा है। उन्होंने कहा, “ऐसी स्थिति में हम क्या करें? यह देश सबका है। भारत हमेशा ‘विविधता में एकता’ का उदाहरण रहा है, जहां सभी धर्मों के लोग मिल-जुलकर रहते हैं।” हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि अगर कुछ लोग धर्म के नाम पर समाज को बांटने का प्रयास करते हैं, तो उन्हें रोकना मुश्किल हो जाता है, और ऐसी प्रवृत्तियां कोई नयी बात नहीं हैं।

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Jan 19, 2026 - 22:21
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चुनाव फायदे के लिए हिंदुओं और मुसलमानों को बांटा जा रहा है: Farooq Abdullah

नेशनल कांफ्रेंस (नेकां) के अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला ने सोमवार को देश में धार्मिक ध्रुवीकरण बढ़ने का दावा किया और आरोप लगाया कि चुनावी फायदे के लिए नफरत की राजनीति को बढ़ावा दिया जा रहा है।

पूर्व मुख्यमंत्री ने यहां पार्टी के एक कार्यक्रम के दौरान संवाददाताओं से बात करते हुए कहा कि जम्मू-कश्मीर की जनता ने 1947 में पाकिस्तान के बजाय भारत को चुना था और वह लगातार पड़ोसी देश के खिलाफ खड़ी रही है, जो अब भी क्षेत्र में अशांति फैलाने की कोशिश करता रहता है।

बॉलीवुड से काम कम मिलने और इसे “सांप्रदायिक मुद्दे” से जोड़ने संबंधी संगीतकार ए. आर. रहमान की हालिया टिप्पणी पर उठे विवाद के बारे में पूछे जाने पर अब्दुल्ला ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में देश में नफरत की आग भड़काई गई है और चुनावी उद्देश्यों से हिंदुओं और मुसलमानों को जानबूझकर बांटा जा रहा है।

उन्होंने कहा, “ऐसी स्थिति में हम क्या करें? यह देश सबका है। भारत हमेशा ‘विविधता में एकता’ का उदाहरण रहा है, जहां सभी धर्मों के लोग मिल-जुलकर रहते हैं।”

हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि अगर कुछ लोग धर्म के नाम पर समाज को बांटने का प्रयास करते हैं, तो उन्हें रोकना मुश्किल हो जाता है, और ऐसी प्रवृत्तियां कोई नयी बात नहीं हैं।

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