चुनावी नतीजों से पहले Market में सन्नाटा, 24,350 के पार ही बनेगी तेजी की New Position

संभलकर चल रहा शेयर बाजार इस समय एक सीमित दायरे में फंसा हुआ नजर आ रहा है और निवेशकों की नजर अब बड़े संकेतों पर टिकी हुई है। मौजूद जानकारी के अनुसार, बाजार को इस हफ्ते पिछले सप्ताह के दायरे 23,800 से 24,350 के ऊपर या नीचे निकलना बेहद जरूरी माना जा रहा है, तभी अगली दिशा साफ हो पाएगी।बताया जा रहा है कि अगर सूचकांक 24,350 के ऊपर मजबूती से टिकता है तो यह 24,600 के स्तर तक जा सकता है और इसके बाद 24,750 से 24,800 तक का रास्ता खुल सकता है। वहीं अगर यह 23,800 के नीचे फिसलकर रुक जाता है तो गिरावट बढ़कर 23,500 तक जा सकती है। गौरतलब है कि पिछले सप्ताह 30 अप्रैल को सूचकांक में करीब 180 अंकों की गिरावट दर्ज हुई और यह 23,998 पर बंद हुआ, जबकि बैंकिंग सूचकांक में भी कमजोरी दिखी और यह करीब 540 अंक टूटकर 54,863 पर आ गया हैं।जानकारों के अनुसार, बाजार में इस समय अनिश्चितता का माहौल बना हुआ है। चार दिनों तक छोटे दायरे में कारोबार होने से साप्ताहिक चार्ट पर अनिर्णय की स्थिति दिखाई दे रही है। माना जा रहा है कि पांच राज्यों के चुनाव नतीजे और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अमेरिका और ईरान के बीच संभावित समझौते की स्थिति बाजार की दिशा तय कर सकती है।तकनीकी विश्लेषण के मुताबिक, सूचकांक को 23,750 से 23,770 के आसपास समर्थन मिल रहा है, जिससे यह अंदाजा लगाया जा सकता है कि निचले स्तर पर खरीदारी हो रही है। हालांकि 24,200 से 24,250 के बीच बार-बार दबाव देखने को मिल रहा है, जिससे साफ है कि ऊपरी स्तरों पर बिकवाली हावी है। विशेषज्ञों का कहना है कि जब तक यह दायरा नहीं टूटता, तब तक ‘ऊपर बढ़ने पर बेचो’ की रणनीति अपनाना सुरक्षित माना जा रहा है।बैंकिंग सूचकांक की बात करें तो इसमें भी कमजोरी का रुझान बना हुआ है। यदि यह 54,400 के नीचे जाता है तो 53,700 तक गिरावट आ सकती है। वहीं ऊपर की ओर 55,500 से 55,800 का स्तर महत्वपूर्ण माना जा रहा है। गौरतलब है कि अप्रैल महीने में बाजार ने अच्छा प्रदर्शन किया था, लेकिन अब यह तेजी के बाद ठहराव के दौर में है।जानकारों का यह भी कहना है कि कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव, रुपये की कमजोरी और वैश्विक हालात का असर आने वाले दिनों में बाजार पर पड़ सकता है। ऐसे में निवेशकों को सावधानी के साथ कदम उठाने की सलाह दी जा रही है और किसी भी बड़े फैसले से पहले बाजार के स्पष्ट संकेत का इंतजार करना बेहतर माना जा रहा है।

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May 4, 2026 - 19:53
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चुनावी नतीजों से पहले Market में सन्नाटा, 24,350 के पार ही बनेगी तेजी की New Position
संभलकर चल रहा शेयर बाजार इस समय एक सीमित दायरे में फंसा हुआ नजर आ रहा है और निवेशकों की नजर अब बड़े संकेतों पर टिकी हुई है। मौजूद जानकारी के अनुसार, बाजार को इस हफ्ते पिछले सप्ताह के दायरे 23,800 से 24,350 के ऊपर या नीचे निकलना बेहद जरूरी माना जा रहा है, तभी अगली दिशा साफ हो पाएगी।

बताया जा रहा है कि अगर सूचकांक 24,350 के ऊपर मजबूती से टिकता है तो यह 24,600 के स्तर तक जा सकता है और इसके बाद 24,750 से 24,800 तक का रास्ता खुल सकता है। वहीं अगर यह 23,800 के नीचे फिसलकर रुक जाता है तो गिरावट बढ़कर 23,500 तक जा सकती है। गौरतलब है कि पिछले सप्ताह 30 अप्रैल को सूचकांक में करीब 180 अंकों की गिरावट दर्ज हुई और यह 23,998 पर बंद हुआ, जबकि बैंकिंग सूचकांक में भी कमजोरी दिखी और यह करीब 540 अंक टूटकर 54,863 पर आ गया हैं।

जानकारों के अनुसार, बाजार में इस समय अनिश्चितता का माहौल बना हुआ है। चार दिनों तक छोटे दायरे में कारोबार होने से साप्ताहिक चार्ट पर अनिर्णय की स्थिति दिखाई दे रही है। माना जा रहा है कि पांच राज्यों के चुनाव नतीजे और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अमेरिका और ईरान के बीच संभावित समझौते की स्थिति बाजार की दिशा तय कर सकती है।

तकनीकी विश्लेषण के मुताबिक, सूचकांक को 23,750 से 23,770 के आसपास समर्थन मिल रहा है, जिससे यह अंदाजा लगाया जा सकता है कि निचले स्तर पर खरीदारी हो रही है। हालांकि 24,200 से 24,250 के बीच बार-बार दबाव देखने को मिल रहा है, जिससे साफ है कि ऊपरी स्तरों पर बिकवाली हावी है। विशेषज्ञों का कहना है कि जब तक यह दायरा नहीं टूटता, तब तक ‘ऊपर बढ़ने पर बेचो’ की रणनीति अपनाना सुरक्षित माना जा रहा है।

बैंकिंग सूचकांक की बात करें तो इसमें भी कमजोरी का रुझान बना हुआ है। यदि यह 54,400 के नीचे जाता है तो 53,700 तक गिरावट आ सकती है। वहीं ऊपर की ओर 55,500 से 55,800 का स्तर महत्वपूर्ण माना जा रहा है। गौरतलब है कि अप्रैल महीने में बाजार ने अच्छा प्रदर्शन किया था, लेकिन अब यह तेजी के बाद ठहराव के दौर में है।

जानकारों का यह भी कहना है कि कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव, रुपये की कमजोरी और वैश्विक हालात का असर आने वाले दिनों में बाजार पर पड़ सकता है। ऐसे में निवेशकों को सावधानी के साथ कदम उठाने की सलाह दी जा रही है और किसी भी बड़े फैसले से पहले बाजार के स्पष्ट संकेत का इंतजार करना बेहतर माना जा रहा है।

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