ईरान की धमकियों से बौखलाए तुर्की ने बनाया दुनिया का सबसे खतरनाक ड्रोन, बिना GPS नेविगेट करेगा, वीआईपी लोगों के लिए बड़ा थ्रेट

दुनिया की जंग अब सिर्फ मिसाइलों और टैंकों तक सीमित नहीं रही। अब लड़ाई का मैदान आसमान है। जहां एआई और स्मार्ट टेक्नोलॉजी गेम बदल रही हैं। तुर्की की मशहूर ड्रोन कंपनी बायकर ने एक ऐसा ड्रोन पेश किया है जो बिना जीपीएस की दुश्मन को ढूंढकर मार सकता है। घंटों आसमान में मंडरा सकता है और सही वक्त आने पर घातक हमला कर सकता है। इसका नाम है मिजराक जिसका मतलब है तीर या भाला। दरअसल बायकर का मिजराक एक एआई पावर्ड कैमिकाजे ड्रोन है जिसे लाइटनिंग मुनिशन कहा जाता है। यानी यह पहले हवा में घूमकर अपने लक्ष्य की तलाश करता है और फिर हमला करता है। इसकी रेंज 1000 किमी से ज्यादा है और यह करीब 7 घंटे तक हवा में रह सकता है। करीब 200 किलो वजनी यह ड्रोन 185 किमी घंटे की रफ्तार से उड़ सकता है और 10,000 फीट की ऊंचाई तक जा सकता है। इसमें 40 किलो तक का वॉर हेड लगाया जा सकता है जो बड़े पैमाने पर नुकसान पहुंचाने में सक्षम है।इसे भी पढ़ें: Labour Day पर नोएडा में 'हाई अलर्ट'! भारी सुरक्षा बल तैनात और धारा 163 लागू, हिंसा के बाद पुलिस सख्त इसे रनवे या रॉकेट असिस्ट दोनों तरीके से लॉन्च किया जा सकता है। मिजरक के दो वेरिएंट है। एक हैवी डैमेज के लिए 40 किलो डबल वॉर हेड के साथ और दूसरा 20 किलो वॉर हेड के साथ रेडियो फ्रीक्वेंसी सीकर जो रडार वाले टारगेट को आसानी से पहचान सकता है। इसमें ईओ और आईआर कैमरे लगे हैं जो निगरानी और टारगेट पहचानने में मदद करते हैं। लेकिन इसकी सबसे खतरनाक ताकत जीपीएस के बिना काम करने की क्षमता है। आमतौर पर ड्रोन जीपीएस पर निर्भर होते हैं। जिन्हें दुश्मन जैम कर सकता है। लेकिन मिज़क में एi पावर्ड ऑटो पायलट इनशियल नेविगेशन सिस्टम है और कंप्यूटर विज़न टेक्नोलॉजी लगी है। यह ड्रोन कैमरे से मिलने वाली तस्वीरों को रियल टाइम में प्रोसेस करता है। आसपास के लैंडमार्क्स में अपनी पोजीशन मिलाता है और स्लैम जैसी तकनीक के जरिए खुद अपना नक्शा बनाकर आगे बढ़ता है। यानी जीपीएस जैमिंग भी इसे रोक नहीं सकती। यही वजह है कि वीआईपीस और हाई वैल्यूस टारगेट के लिए यह एक बड़ा खतरा बन सकता है। यह 1000 किमी.दूर से आकर घंटों तक किसी इलाके में घूम सकता है। खुद टारगेट पहचान सकता है और सही समय पर हमला कर सकता है। वह भी बिना किसी इंसानी कंट्रोल के। जहां कई ड्रोन मिलकर एक साथ हमला करते हैं जिससे बचाव और भी मुश्किल हो जाता है। मिजरक सिर्फ एक ड्रोन नहीं बल्कि आने वाले युद्ध की नई सोच का संकेत है। बकर ने एआई और ऑटोनॉमस टेक्नोलॉजी के जरिए यह दिखा दिया है कि भविष्य की जंग कितनी स्मार्ट और खतरनाक हो सकती है। लंबी दूरी, भारी पैलोड, जीपीएस फ्री ऑपरेशन और खुद टारगेट पहचानने की क्षमता यह सभी खूबियां इसे एक गेम चेंजर बना सकती हैं। ऐसे में अब सवाल यही है क्या दुनिया इसके खिलाफ नई सुरक्षा तकनीक विकसित कर पाएगी या फिर यह एआई ड्रोन आने वाले समय में युद्ध के नियम ही बदल देंगे। फिलहाल तो तय है आसमान अब सिर्फ निगरानी ही नहीं बल्कि खामोश और सटीक हमलों का दौर शुरू हो चुका है। 

PNSPNS
May 3, 2026 - 18:27
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ईरान की धमकियों से बौखलाए तुर्की ने बनाया दुनिया का सबसे खतरनाक ड्रोन, बिना GPS नेविगेट करेगा, वीआईपी लोगों के लिए बड़ा थ्रेट
दुनिया की जंग अब सिर्फ मिसाइलों और टैंकों तक सीमित नहीं रही। अब लड़ाई का मैदान आसमान है। जहां एआई और स्मार्ट टेक्नोलॉजी गेम बदल रही हैं। तुर्की की मशहूर ड्रोन कंपनी बायकर ने एक ऐसा ड्रोन पेश किया है जो बिना जीपीएस की दुश्मन को ढूंढकर मार सकता है। घंटों आसमान में मंडरा सकता है और सही वक्त आने पर घातक हमला कर सकता है। इसका नाम है मिजराक जिसका मतलब है तीर या भाला। दरअसल बायकर का मिजराक एक एआई पावर्ड कैमिकाजे ड्रोन है जिसे लाइटनिंग मुनिशन कहा जाता है। यानी यह पहले हवा में घूमकर अपने लक्ष्य की तलाश करता है और फिर हमला करता है। इसकी रेंज 1000 किमी से ज्यादा है और यह करीब 7 घंटे तक हवा में रह सकता है। करीब 200 किलो वजनी यह ड्रोन 185 किमी घंटे की रफ्तार से उड़ सकता है और 10,000 फीट की ऊंचाई तक जा सकता है। इसमें 40 किलो तक का वॉर हेड लगाया जा सकता है जो बड़े पैमाने पर नुकसान पहुंचाने में सक्षम है।

इसे भी पढ़ें: Labour Day पर नोएडा में 'हाई अलर्ट'! भारी सुरक्षा बल तैनात और धारा 163 लागू, हिंसा के बाद पुलिस सख्त

इसे रनवे या रॉकेट असिस्ट दोनों तरीके से लॉन्च किया जा सकता है। मिजरक के दो वेरिएंट है। एक हैवी डैमेज के लिए 40 किलो डबल वॉर हेड के साथ और दूसरा 20 किलो वॉर हेड के साथ रेडियो फ्रीक्वेंसी सीकर जो रडार वाले टारगेट को आसानी से पहचान सकता है। इसमें ईओ और आईआर कैमरे लगे हैं जो निगरानी और टारगेट पहचानने में मदद करते हैं। लेकिन इसकी सबसे खतरनाक ताकत जीपीएस के बिना काम करने की क्षमता है। आमतौर पर ड्रोन जीपीएस पर निर्भर होते हैं। जिन्हें दुश्मन जैम कर सकता है। लेकिन मिज़क में एi पावर्ड ऑटो पायलट इनशियल नेविगेशन सिस्टम है और कंप्यूटर विज़न टेक्नोलॉजी लगी है। यह ड्रोन कैमरे से मिलने वाली तस्वीरों को रियल टाइम में प्रोसेस करता है। आसपास के लैंडमार्क्स में अपनी पोजीशन मिलाता है और स्लैम जैसी तकनीक के जरिए खुद अपना नक्शा बनाकर आगे बढ़ता है। यानी जीपीएस जैमिंग भी इसे रोक नहीं सकती। यही वजह है कि वीआईपीस और हाई वैल्यूस टारगेट के लिए यह एक बड़ा खतरा बन सकता है। यह 1000 किमी.दूर से आकर घंटों तक किसी इलाके में घूम सकता है। खुद टारगेट पहचान सकता है और सही समय पर हमला कर सकता है। वह भी बिना किसी इंसानी कंट्रोल के। जहां कई ड्रोन मिलकर एक साथ हमला करते हैं जिससे बचाव और भी मुश्किल हो जाता है। मिजरक सिर्फ एक ड्रोन नहीं बल्कि आने वाले युद्ध की नई सोच का संकेत है।
बकर ने एआई और ऑटोनॉमस टेक्नोलॉजी के जरिए यह दिखा दिया है कि भविष्य की जंग कितनी स्मार्ट और खतरनाक हो सकती है। लंबी दूरी, भारी पैलोड, जीपीएस फ्री ऑपरेशन और खुद टारगेट पहचानने की क्षमता यह सभी खूबियां इसे एक गेम चेंजर बना सकती हैं। ऐसे में अब सवाल यही है क्या दुनिया इसके खिलाफ नई सुरक्षा तकनीक विकसित कर पाएगी या फिर यह एआई ड्रोन आने वाले समय में युद्ध के नियम ही बदल देंगे। फिलहाल तो तय है आसमान अब सिर्फ निगरानी ही नहीं बल्कि खामोश और सटीक हमलों का दौर शुरू हो चुका है। 

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