हिज्जबुल्ला अड़ गया, बड़ा हमला कभी भी, दे दिया अल्टीमेटम

हिजबुल्ला ने लेबनान और इजराइल के बीच होने वाले डायरेक्ट नेगोशिएशंस को पूरी तरह ठुकरा दिया है। इसे लेकर 27 अप्रैल को हिजबुल्ला चीफ नईम कासिम ने एक रिटन मैसेज जारी किया। कहा इजराइल का सामना करना जारी रहेगा। इंटरनेशनल न्यूज़ एजेंसी एफपी की रिपोर्ट के मुताबिक हिजबुल्ला के लीडर नईम कासिम ने लेबन और इजराइल के बीच के प्रपोज्ड सीधी बातचीत यानी डायरेक्ट नेगोशिएशंस को खारिज कर दिया है। उन्होंने इसे एक गंभीर पाप बताया। साथ ही कहा कि इससे लेबन डीस्टेबलाइज़ हो जाएगा, अस्थिर हो जाएगा। दरअसल, पिछले कुछ हफ्तों में लेबन और इजराइल के अमेरिका में तैनात राजदूतों के बीच वाशिंगटन में दो मीटिंग्स हुई। यानी लेबनान के राजदूत और इजराइल के राजदूत के बीच अमेरिका के वाशिंगटन में मीटिंग हुई। ये कई दशकों में इस तरह की पहली बातचीत थी। पहली मीटिंग के बाद इज़राइल हिजबुल्ला वॉर में एक अस्थाई युद्ध विराम यानी टेंपरेरी ट्रूस हुआ। इसे भी पढ़ें: America दबाव बनाने से बाज नहीं आ रहा, Iran को Donald Trump के बयानों पर पलटवार करने में मजा आ रहाबेरूत जो लेबनान की राजधानी है, वह इसके बाद इजराइल के साथ पीस डील के लिए डायरेक्ट नेगोशिएशंस की तैयारी कर रहा था। यह बड़ा कदम इसलिए हो जाता है क्योंकि इजराइल और लेबनान दोनों ही देशों के बीच 1948 से लगातार संघर्ष चल रहा है। ऑफिशियली देखें तो तभी से दोनों में दुश्मनी बरकरार है। अभी भी इजराइल और यूएस ने मिलकर जब ईरान के सुप्रीम लीडर और शिया धर्म गुरु आयतुल्लाह अली खमनेई की हत्या की तो इसी के बदले में हिजबुल्लाह ने इजराइल पर स्ट्र्राइक्स कर दी। क्योंकि हिज़बुल्ला भी एक शिया मेजॉरिटी वाला संगठन है। जिसके बाद 2 मार्च से इज़राइल और हिज़बुल्ला के बीच लगातार जंग जारी है। 27 अप्रैल को भी इज़राइल ने लेबनॉन में मौजूद हिजबुल्ला इंफ्रास्ट्रक्चर पर हमले किए हैं। हिज़बुल्लाह अपना मिशन यही बताता है कि वो लेबनॉन में इजराइली इन्वज़न के खिलाफ रेजिस्टेंस कर रहा है।  हिज़बुल्लाह का जन्म भी 1982 में लेबनान पर हुए बड़े लेवल के इजराइली इन्वज़ के खिलाफ ही हुआ था। लेकिन इजराइल के साथ हिजबुल्ला की इस जंग को रोकने के लिए लेबन सरकार ने हिजबुल्लाह को डिसआर्म करने का फैसला लिया।  हिजबुल्ला के हथियार और उसकी मिलिट्री ताकत को खत्म करने का फैसला लिया। इसी कॉन्टेक्स्ट में हिजबुल्ला के लीडर नईम कासिम ने एक मैसेज जारी किया और इस तरह के डायरेक्ट नेगोशिएशंस का विरोध किया। इसे भी पढ़ें: UAE में बैठे थे अजीत डोभाल, इजराइल पर होश उड़ाने वाला ऐलान!नईम कासिम ने कहा कि कुर्बानी, इज्जत और दुश्मन की हार के इस माहौल में लेबनान की हुकूमत ने एक ऐसा फैसला लिया है जो अपमानजनक है। मुफ्त में दिया गया है और जिसकी कोई जरूरत ही नहीं थी। इसकी इकलौती वजह है बिना किसी बदले के सरेंडर। ऐसा सरेंडर जो बकरी की छींक के बराबर भी कीमत नहीं रखता। हम लेबनान हुकूमत और इजराइल के बीच हो रही आमने-सामने की सीधी बातचीत को पूरी तरह और साफ तौर पर खारिज करते हैं। लेबनान की सत्ता में बैठे लोग यह अच्छी तरह समझ लें। उनका यह रवैया ना लेबनान के काम आएगा ना उनके खुद के काम आएगा। ये उनकी जिम्मेदारी है कि वो अपनी इन गंभीर गलतियों से पीछे हटे जो लेबनान को लगातार अस्थिरता के चक्र में धकेल रही हैं। उनकी जिम्मेदारी है कि वो इजराइली दुश्मन के साथ डायरेक्ट बातचीत को रोके और इनडायरेक्ट बातचीत का तरीका अपनाएं। उनकी जिम्मेदारी है कि वह 2 मार्च के उस सरकारी फैसले को रद्द करें जिसने रेजिस्टेंस को और रेजिस्टेंस करने वालों को अपराधी घोषित कर दिया था। इस फैसले ने लेबनान के आधे से ज्यादा आबादी को ही मुजरिम बना दिया। हम लेबनान और उसके लोगों के डिफेंस के लिए अपना रेजिस्टेंस जारी रखेंगे। हम 2 मार्च से पहले की स्थिति में वापस नहीं आएंगे। हम इजराइली आक्रामकता और हमलों का जवाब देंगे और उसका डटकर सामना करेंगे। दुश्मन चाहे कितनी भी धमकियां दें, हम पीछे नहीं हटेंगे। हम झुकेंगे नहीं और हम हारेंगे नहीं। 

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Apr 29, 2026 - 09:10
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हिज्जबुल्ला अड़ गया, बड़ा हमला कभी भी, दे दिया अल्टीमेटम
हिजबुल्ला ने लेबनान और इजराइल के बीच होने वाले डायरेक्ट नेगोशिएशंस को पूरी तरह ठुकरा दिया है। इसे लेकर 27 अप्रैल को हिजबुल्ला चीफ नईम कासिम ने एक रिटन मैसेज जारी किया। कहा इजराइल का सामना करना जारी रहेगा। इंटरनेशनल न्यूज़ एजेंसी एफपी की रिपोर्ट के मुताबिक हिजबुल्ला के लीडर नईम कासिम ने लेबन और इजराइल के बीच के प्रपोज्ड सीधी बातचीत यानी डायरेक्ट नेगोशिएशंस को खारिज कर दिया है। उन्होंने इसे एक गंभीर पाप बताया। साथ ही कहा कि इससे लेबन डीस्टेबलाइज़ हो जाएगा, अस्थिर हो जाएगा। दरअसल, पिछले कुछ हफ्तों में लेबन और इजराइल के अमेरिका में तैनात राजदूतों के बीच वाशिंगटन में दो मीटिंग्स हुई। यानी लेबनान के राजदूत और इजराइल के राजदूत के बीच अमेरिका के वाशिंगटन में मीटिंग हुई। ये कई दशकों में इस तरह की पहली बातचीत थी। पहली मीटिंग के बाद इज़राइल हिजबुल्ला वॉर में एक अस्थाई युद्ध विराम यानी टेंपरेरी ट्रूस हुआ। 

इसे भी पढ़ें: America दबाव बनाने से बाज नहीं आ रहा, Iran को Donald Trump के बयानों पर पलटवार करने में मजा आ रहा

बेरूत जो लेबनान की राजधानी है, वह इसके बाद इजराइल के साथ पीस डील के लिए डायरेक्ट नेगोशिएशंस की तैयारी कर रहा था। यह बड़ा कदम इसलिए हो जाता है क्योंकि इजराइल और लेबनान दोनों ही देशों के बीच 1948 से लगातार संघर्ष चल रहा है। ऑफिशियली देखें तो तभी से दोनों में दुश्मनी बरकरार है। अभी भी इजराइल और यूएस ने मिलकर जब ईरान के सुप्रीम लीडर और शिया धर्म गुरु आयतुल्लाह अली खमनेई की हत्या की तो इसी के बदले में हिजबुल्लाह ने इजराइल पर स्ट्र्राइक्स कर दी। क्योंकि हिज़बुल्ला भी एक शिया मेजॉरिटी वाला संगठन है। जिसके बाद 2 मार्च से इज़राइल और हिज़बुल्ला के बीच लगातार जंग जारी है। 27 अप्रैल को भी इज़राइल ने लेबनॉन में मौजूद हिजबुल्ला इंफ्रास्ट्रक्चर पर हमले किए हैं। हिज़बुल्लाह अपना मिशन यही बताता है कि वो लेबनॉन में इजराइली इन्वज़न के खिलाफ रेजिस्टेंस कर रहा है।  हिज़बुल्लाह का जन्म भी 1982 में लेबनान पर हुए बड़े लेवल के इजराइली इन्वज़ के खिलाफ ही हुआ था। लेकिन इजराइल के साथ हिजबुल्ला की इस जंग को रोकने के लिए लेबन सरकार ने हिजबुल्लाह को डिसआर्म करने का फैसला लिया।  हिजबुल्ला के हथियार और उसकी मिलिट्री ताकत को खत्म करने का फैसला लिया। इसी कॉन्टेक्स्ट में हिजबुल्ला के लीडर नईम कासिम ने एक मैसेज जारी किया और इस तरह के डायरेक्ट नेगोशिएशंस का विरोध किया। 

इसे भी पढ़ें: UAE में बैठे थे अजीत डोभाल, इजराइल पर होश उड़ाने वाला ऐलान!

नईम कासिम ने कहा कि कुर्बानी, इज्जत और दुश्मन की हार के इस माहौल में लेबनान की हुकूमत ने एक ऐसा फैसला लिया है जो अपमानजनक है। मुफ्त में दिया गया है और जिसकी कोई जरूरत ही नहीं थी। इसकी इकलौती वजह है बिना किसी बदले के सरेंडर। ऐसा सरेंडर जो बकरी की छींक के बराबर भी कीमत नहीं रखता। हम लेबनान हुकूमत और इजराइल के बीच हो रही आमने-सामने की सीधी बातचीत को पूरी तरह और साफ तौर पर खारिज करते हैं। लेबनान की सत्ता में बैठे लोग यह अच्छी तरह समझ लें। उनका यह रवैया ना लेबनान के काम आएगा ना उनके खुद के काम आएगा। ये उनकी जिम्मेदारी है कि वो अपनी इन गंभीर गलतियों से पीछे हटे जो लेबनान को लगातार अस्थिरता के चक्र में धकेल रही हैं। उनकी जिम्मेदारी है कि वो इजराइली दुश्मन के साथ डायरेक्ट बातचीत को रोके और इनडायरेक्ट बातचीत का तरीका अपनाएं। उनकी जिम्मेदारी है कि वह 2 मार्च के उस सरकारी फैसले को रद्द करें जिसने रेजिस्टेंस को और रेजिस्टेंस करने वालों को अपराधी घोषित कर दिया था। इस फैसले ने लेबनान के आधे से ज्यादा आबादी को ही मुजरिम बना दिया। हम लेबनान और उसके लोगों के डिफेंस के लिए अपना रेजिस्टेंस जारी रखेंगे। हम 2 मार्च से पहले की स्थिति में वापस नहीं आएंगे। हम इजराइली आक्रामकता और हमलों का जवाब देंगे और उसका डटकर सामना करेंगे। दुश्मन चाहे कितनी भी धमकियां दें, हम पीछे नहीं हटेंगे। हम झुकेंगे नहीं और हम हारेंगे नहीं। 

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