हवाई सफर करने वालों के लिए अलर्ट! DGCA ने बदले पावर बैंक के नियम, विमान में अब नहीं कर पाएंगे चार्ज।

हवाई यात्रा करने वालों के लिए एक अहम बदलाव सामने आया हैं। नागरिक उड्डयन महानिदेशालय ने उड़ान के दौरान पावर बैंक से जुड़े नियमों को सख्त कर दिया हैं। अब विमान में न तो पावर बैंक को चार्ज किया जा सकेगा और न ही सीट में लगे पावर सॉकेट से किसी पावर बैंक का इस्तेमाल करने की अनुमति होगी। यह फैसला हाल के महीनों में उड़ान के दौरान लिथियम बैटरी से जुड़ी आग की घटनाओं को देखते हुए लिया गया हैं।बता दें कि डीजीसीए ने हाल ही में एक ‘डेंजरस गुड्स एडवाइजरी सर्कुलर’ जारी किया हैं, जिसमें साफ कहा गया है कि पावर बैंक और अतिरिक्त बैटरियां केवल हैंड बैगेज में ही रखी जा सकती हैं। इन्हें ओवरहेड बिन में रखने की भी मनाही होगी। इसके साथ ही यात्री पावर बैंक के जरिए मोबाइल या अन्य इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस चार्ज नहीं कर सकेंगे और न ही पावर बैंक को सीट में लगे पावर सप्लाई सिस्टम से जोड़ पाएंगे।गौरतलब है कि अक्टूबर में दिल्ली एयरपोर्ट पर इंडिगो की डिमापुर जा रही फ्लाइट के टैक्सी करते समय एक यात्री का पावर बैंक अचानक आग पकड़ बैठा था। हालांकि केबिन क्रू की तत्परता से आग पर काबू पा लिया गया और कोई हताहत नहीं हुआ, लेकिन इस घटना ने सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए थे।मौजूद जानकारी के अनुसार, नए नियमों के तहत एयरलाइंस को लिथियम बैटरी से जुड़ी हर घटना की रिपोर्ट डीजीसीए को देनी होगी। इसके अलावा यात्रियों को उड़ान के दौरान अनाउंसमेंट के जरिए भी जागरूक करना अनिवार्य किया गया हैं। नियमों में यह भी कहा गया है कि यदि किसी डिवाइस से गर्मी, धुआं या असामान्य गंध आए तो यात्री तुरंत केबिन क्रू को सूचित करें।डीजीसीए ने अपने सर्कुलर में स्पष्ट किया है कि लिथियम बैटरियां अत्यधिक ऊर्जा वाली होती हैं और ओवरचार्जिंग, दबाव, खराब निर्माण गुणवत्ता या बैटरी के पुराने होने से इनमें आग लग सकती हैं। ऐसी आग अपने आप बुझने वाली नहीं होती और इसे नियंत्रित करने के लिए विशेष उपायों की जरूरत पड़ती हैं।अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी इसी तरह की सख्ती देखने को मिल चुकी हैं। एमिरेट्स एयरलाइंस ने पिछले साल सभी उड़ानों में पावर बैंक के इस्तेमाल पर पूरी तरह रोक लगा दी थी। सिंगापुर एयरलाइंस, कतर एयरवेज और कैथे पैसिफिक जैसी कंपनियां भी पावर बैंक के उपयोग और स्टोरेज को लेकर कड़े नियम लागू कर चुकी हैं।विमानन विशेषज्ञों का कहना है कि एक हैंड बैग के नियम को सख्ती से लागू करना भी बेहद जरूरी हैं। उनका तर्क है कि कई बार ओवरहेड बिन भर जाने पर हैंड बैग को कार्गो होल्ड में भेज दिया जाता है, जबकि उनमें पावर बैंक या बैटरियां मौजूद होती हैं। अगर वहां आग लगती है और समय पर पता नहीं चलता, तो इसके गंभीर परिणाम हो सकते हैं।कुल मिलाकर, डीजीसीए का यह कदम यात्रियों की सुरक्षा को प्राथमिकता देने की दिशा में अहम माना जा रहा हैं और आने वाले दिनों में एयरलाइंस को इन नियमों का सख्ती से पालन कराना होगा।

PNSPNS
Jan 6, 2026 - 15:01
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हवाई सफर करने वालों के लिए अलर्ट! DGCA ने बदले पावर बैंक के नियम, विमान में अब नहीं कर पाएंगे चार्ज।
हवाई यात्रा करने वालों के लिए एक अहम बदलाव सामने आया हैं। नागरिक उड्डयन महानिदेशालय ने उड़ान के दौरान पावर बैंक से जुड़े नियमों को सख्त कर दिया हैं। अब विमान में न तो पावर बैंक को चार्ज किया जा सकेगा और न ही सीट में लगे पावर सॉकेट से किसी पावर बैंक का इस्तेमाल करने की अनुमति होगी। यह फैसला हाल के महीनों में उड़ान के दौरान लिथियम बैटरी से जुड़ी आग की घटनाओं को देखते हुए लिया गया हैं।

बता दें कि डीजीसीए ने हाल ही में एक ‘डेंजरस गुड्स एडवाइजरी सर्कुलर’ जारी किया हैं, जिसमें साफ कहा गया है कि पावर बैंक और अतिरिक्त बैटरियां केवल हैंड बैगेज में ही रखी जा सकती हैं। इन्हें ओवरहेड बिन में रखने की भी मनाही होगी। इसके साथ ही यात्री पावर बैंक के जरिए मोबाइल या अन्य इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस चार्ज नहीं कर सकेंगे और न ही पावर बैंक को सीट में लगे पावर सप्लाई सिस्टम से जोड़ पाएंगे।

गौरतलब है कि अक्टूबर में दिल्ली एयरपोर्ट पर इंडिगो की डिमापुर जा रही फ्लाइट के टैक्सी करते समय एक यात्री का पावर बैंक अचानक आग पकड़ बैठा था। हालांकि केबिन क्रू की तत्परता से आग पर काबू पा लिया गया और कोई हताहत नहीं हुआ, लेकिन इस घटना ने सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए थे।

मौजूद जानकारी के अनुसार, नए नियमों के तहत एयरलाइंस को लिथियम बैटरी से जुड़ी हर घटना की रिपोर्ट डीजीसीए को देनी होगी। इसके अलावा यात्रियों को उड़ान के दौरान अनाउंसमेंट के जरिए भी जागरूक करना अनिवार्य किया गया हैं। नियमों में यह भी कहा गया है कि यदि किसी डिवाइस से गर्मी, धुआं या असामान्य गंध आए तो यात्री तुरंत केबिन क्रू को सूचित करें।

डीजीसीए ने अपने सर्कुलर में स्पष्ट किया है कि लिथियम बैटरियां अत्यधिक ऊर्जा वाली होती हैं और ओवरचार्जिंग, दबाव, खराब निर्माण गुणवत्ता या बैटरी के पुराने होने से इनमें आग लग सकती हैं। ऐसी आग अपने आप बुझने वाली नहीं होती और इसे नियंत्रित करने के लिए विशेष उपायों की जरूरत पड़ती हैं।

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी इसी तरह की सख्ती देखने को मिल चुकी हैं। एमिरेट्स एयरलाइंस ने पिछले साल सभी उड़ानों में पावर बैंक के इस्तेमाल पर पूरी तरह रोक लगा दी थी। सिंगापुर एयरलाइंस, कतर एयरवेज और कैथे पैसिफिक जैसी कंपनियां भी पावर बैंक के उपयोग और स्टोरेज को लेकर कड़े नियम लागू कर चुकी हैं।

विमानन विशेषज्ञों का कहना है कि एक हैंड बैग के नियम को सख्ती से लागू करना भी बेहद जरूरी हैं। उनका तर्क है कि कई बार ओवरहेड बिन भर जाने पर हैंड बैग को कार्गो होल्ड में भेज दिया जाता है, जबकि उनमें पावर बैंक या बैटरियां मौजूद होती हैं। अगर वहां आग लगती है और समय पर पता नहीं चलता, तो इसके गंभीर परिणाम हो सकते हैं।

कुल मिलाकर, डीजीसीए का यह कदम यात्रियों की सुरक्षा को प्राथमिकता देने की दिशा में अहम माना जा रहा हैं और आने वाले दिनों में एयरलाइंस को इन नियमों का सख्ती से पालन कराना होगा।

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