सामान भी नहीं बांध पाए, UAE ने पाकिस्तानियों को रातों-रात धक्के मार कर बाहर निकाला

अपनी बदहाली और अरबों के कर्ज में दबे पाकिस्तान के लोग जब भुखमरी से तंग आ जाते हैं तो अपनी किस्मत बदलने खाड़ी देशों का रुख करते हैं। दुबई और सऊदी अरब जैसे देशों में दिन रात पसीना बहाकर वो अपने परिवार का पेट पालते हैं। लेकिन जब अपनी ही हुकूमत की गलत  नीति का शिकार इन मासूमों को होना पड़े तो दर्द और बढ़ जाता है। मिडिल ईस्ट में जारी जंग के बीच पाकिस्तानियों पर एक नया और भयानक संकट टूट पड़ा है। यूएई से हजारों पाकिस्तानी शिया मुसलमानों को रातोंरात धक्के मारकर बाहर निकाल दिया गया। ना सामान बांधने का वक्त मिला ना बरसों की कमाई समेटने की मोहलत। सिर्फ एक जोड़ी कपड़ों में इन्हें फ्लाइट में बैठकर वापस कंगाली के दलदल में धकेल दिया गया। रिपोर्ट के मुताबिक यूएई ने हजारों पाकिस्तानी शियाओं को धक्का देकर भगा दिया। 28 फरवरी से अब तक 7500 से ज्यादा लोगों को बाहर निकाला। इसे भी पढ़ें: TPCI रिपोर्ट: UAE को Food Export बढ़ाकर भारत कमा सकता है अरबों डॉलर, Economy को मिलेगी रफ्तार28 फरवरी वही तारीख है जब अमेरिका और इजराइल ने ईरान पर हमले शुरू किए थे। बिना नौकरी, बिना सामान और बिना अपनी जमा पूंजी के वापस भेजे गए। आखिर यूएई ने यह कदम क्यों उठाया और पाकिस्तान इस पर चुप क्यों है? जवाब है पाकिस्तान का डबल गेम। पाकिस्तान एक तरफ अपने फायदे के लिए ईरान की गोद में बैठ जाता है तो दूसरी तरफ कर्ज और भीख के लिए पाला बदलकर अमेरिका यूएई का गुणगान करने लगता है। मिडिल ईस्ट में चल रहे युद्ध के बीच पाकिस्तान के इसी डबल स्टैंडर्ड का खामियाजा अब वहां की आम जनता भुगत रही है। तेल और गैस के लिए ईरान से दोस्ती का नाटक और पैसों के लिए सऊदी यूएई के सामने झोली फैलाना। पाकिस्तान के इस चालबाजी को खाड़ी देशों ने भांप लिया है। सुरक्षा कारणों और ईरान युद्ध के बीच बढ़े तनाव के चलते यूएई ने यह कड़ा रुख अपनाया। लेकिन शर्म की बात देखिए यूएई के इस फैसले का पाकिस्तान का गृह मंत्रालय यह कहकर बचाव कर रहा है कि यह नियमों का उल्लंघन है। मजहब का मामला नहीं। कूटनीतिक संबंधों के टूटने और मिलने वाली भीख के बंद होने के डर से पाकिस्तान सरकार की जुबान पूरी तरह कांप रही है और वह अपने ही नागरिकों के हक में एक शब्द नहीं बोल पा रही।  इसे भी पढ़ें: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पांच देशों की सफल यात्रापूरे मामले में अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों ने भी नजरें टेढ़ी कर ली है। ह्यूमन राइट्स वॉच के उपनिदेशक माइकल पेज ने इन रिपोर्ट्स को बेहद चिंताजनक बताया और जांच शुरू कर दी। वहीं जेनेवा स्थित मैन राइट्स ग्रुप के अधिकारी फला सैयद का कहना है कि यूएई में ऐसी कारवाइयां पहले भी हुई है। लेकिन हाल ही के दिनों में इसमें भारी तेजी आई है। लाचारी, कंगाली और ऊपर से हुकूमत की गंदी कूटनीति। पाकिस्तान की जनता आज अपने ही नेताओं के बोए कांटों को चुग रही है। भीख मांग कर देश चलाने वाले हुक्मरान जब कूटनीति के मैदान में डबल गेम खेलते हैं तो खामियाजा उन निर्दोष नागरिकों को भुगतना पड़ता है जो दो वक्त की रोटी के लिए अपना मुल्क छोड़ चुके थे। 

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May 28, 2026 - 16:05
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सामान भी नहीं बांध पाए, UAE ने पाकिस्तानियों को रातों-रात धक्के मार कर बाहर निकाला
अपनी बदहाली और अरबों के कर्ज में दबे पाकिस्तान के लोग जब भुखमरी से तंग आ जाते हैं तो अपनी किस्मत बदलने खाड़ी देशों का रुख करते हैं। दुबई और सऊदी अरब जैसे देशों में दिन रात पसीना बहाकर वो अपने परिवार का पेट पालते हैं। लेकिन जब अपनी ही हुकूमत की गलत  नीति का शिकार इन मासूमों को होना पड़े तो दर्द और बढ़ जाता है। मिडिल ईस्ट में जारी जंग के बीच पाकिस्तानियों पर एक नया और भयानक संकट टूट पड़ा है। यूएई से हजारों पाकिस्तानी शिया मुसलमानों को रातोंरात धक्के मारकर बाहर निकाल दिया गया। ना सामान बांधने का वक्त मिला ना बरसों की कमाई समेटने की मोहलत। सिर्फ एक जोड़ी कपड़ों में इन्हें फ्लाइट में बैठकर वापस कंगाली के दलदल में धकेल दिया गया। रिपोर्ट के मुताबिक यूएई ने हजारों पाकिस्तानी शियाओं को धक्का देकर भगा दिया। 28 फरवरी से अब तक 7500 से ज्यादा लोगों को बाहर निकाला। 

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28 फरवरी वही तारीख है जब अमेरिका और इजराइल ने ईरान पर हमले शुरू किए थे। बिना नौकरी, बिना सामान और बिना अपनी जमा पूंजी के वापस भेजे गए। आखिर यूएई ने यह कदम क्यों उठाया और पाकिस्तान इस पर चुप क्यों है? जवाब है पाकिस्तान का डबल गेम। पाकिस्तान एक तरफ अपने फायदे के लिए ईरान की गोद में बैठ जाता है तो दूसरी तरफ कर्ज और भीख के लिए पाला बदलकर अमेरिका यूएई का गुणगान करने लगता है। मिडिल ईस्ट में चल रहे युद्ध के बीच पाकिस्तान के इसी डबल स्टैंडर्ड का खामियाजा अब वहां की आम जनता भुगत रही है। तेल और गैस के लिए ईरान से दोस्ती का नाटक और पैसों के लिए सऊदी यूएई के सामने झोली फैलाना। पाकिस्तान के इस चालबाजी को खाड़ी देशों ने भांप लिया है। सुरक्षा कारणों और ईरान युद्ध के बीच बढ़े तनाव के चलते यूएई ने यह कड़ा रुख अपनाया। लेकिन शर्म की बात देखिए यूएई के इस फैसले का पाकिस्तान का गृह मंत्रालय यह कहकर बचाव कर रहा है कि यह नियमों का उल्लंघन है। मजहब का मामला नहीं। कूटनीतिक संबंधों के टूटने और मिलने वाली भीख के बंद होने के डर से पाकिस्तान सरकार की जुबान पूरी तरह कांप रही है और वह अपने ही नागरिकों के हक में एक शब्द नहीं बोल पा रही।  

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पूरे मामले में अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों ने भी नजरें टेढ़ी कर ली है। ह्यूमन राइट्स वॉच के उपनिदेशक माइकल पेज ने इन रिपोर्ट्स को बेहद चिंताजनक बताया और जांच शुरू कर दी। वहीं जेनेवा स्थित मैन राइट्स ग्रुप के अधिकारी फला सैयद का कहना है कि यूएई में ऐसी कारवाइयां पहले भी हुई है। लेकिन हाल ही के दिनों में इसमें भारी तेजी आई है। लाचारी, कंगाली और ऊपर से हुकूमत की गंदी कूटनीति। पाकिस्तान की जनता आज अपने ही नेताओं के बोए कांटों को चुग रही है। भीख मांग कर देश चलाने वाले हुक्मरान जब कूटनीति के मैदान में डबल गेम खेलते हैं तो खामियाजा उन निर्दोष नागरिकों को भुगतना पड़ता है जो दो वक्त की रोटी के लिए अपना मुल्क छोड़ चुके थे। 

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