राजा का कर्तव्य प्रजा की रक्षा करना और वो अपना कर्तव्य निभाएगा, पहलगाम हमले के बीच मोहन भागवत का बड़ा बयान

पहलगाम में हुए दुखद आतंकी हमले के बाद राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के प्रमुख मोहन भागवत ने मुंबई में एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि मौजूदा संघर्ष धार्मिक और सांप्रदायिक विभाजन से परे है। उन्होंने इस संघर्ष को 'धर्म' और 'अधर्म' के बीच संघर्ष बताया, उनके अनुसार यह संघर्ष केवल धार्मिक मतभेदों पर आधारित नहीं है, बल्कि अच्छाई और बुराई के बीच एक बड़ी नैतिक लड़ाई है। इसके साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि अहिंसा हमारा स्वभाव है, हमारा मूल्य है। लेकिन कुछ लोग नहीं बदलेंगे, चाहे आप कुछ भी कर लें, वे दुनिया को परेशान करते रहेंगे, तो इसके बारे में क्या करें? इसे भी पढ़ें: पहलगाम आतंकियों की तलाश के बीच जम्मू कश्मीर के कुपवाड़ा में आतंकवादी ठिकाने का भंडाफोड़, भारी मात्रा में हथियार जब्त: पुलिसमोहन भागवत ने कहा कि अहिंसा हमारा धर्म है। गुंडों को सबक सिखाना भी हमारा धर्म है। हम अपने पड़ोसियों का कभी अपमान या नुकसान नहीं करते। लेकिन फिर भी अगर कोई बुराई पर उतर आए तो दूसरा विकल्प क्या है? राजा का कर्तव्य प्रजा की रक्षा करना है, राजा को अपना कर्तव्य निभाना चाहिए। इससे पहले मोहन भागवत ने कहा था कि जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में आतंकवादियों ने निर्दोष नागरिकों से उनके धर्म के बारे में पूछताछ करने के बाद उनकी हत्या कर दी। उन्होंने कहा कि एक हिंदू कभी ऐसा कृत्य नहीं करेगा। उन्होंने सरकार से पहलगाम आतंकी हमले पर कड़ी प्रतिक्रिया देने का आग्रह किया, जिसमें 26 लोग, जिनमें ज्यादातर पर्यटक थे, बंदूकधारियों द्वारा मारे गए थे। आरएसएस प्रमुख ने मुंबई में एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि लोगों से उनका धर्म पूछा गया और उन्हें मार दिया गया। हिंदू ऐसा कभी नहीं करेंगे। इसे भी पढ़ें: Pakistan ने राजस्थान के पास बॉर्डर पर सेना बढ़ाई, सिंध में छिपाकर जवानों को किया तैनातभागवत ने कहा कि अभी जो लड़ाई चल रही है, वह संप्रदाय और धर्म के बीच नहीं है। इसका आधार संप्रदाय और धर्म है, बल्कि यह लड़ाई 'धर्म' और 'अधर्म' के बीच है। हमारे सैनिकों या हमारे लोगों ने कभी किसी को उसका धर्म पूछकर नहीं मारा। जो कट्टरपंथी लोगों ने लोगों को उनका धर्म पूछकर मारा, हिंदू ऐसा कभी नहीं करेंगे। इसलिए देश को मजबूत होना चाहिए। सभी दुखी हैं, हमारे दिलों में गुस्सा है जैसा कि होना चाहिए, क्योंकि राक्षसों का नाश करने के लिए अपार शक्ति की आवश्यकता होती है। लेकिन कुछ लोग इस बात को समझने को तैयार नहीं हैं, और उनमें अब किसी भी तरह का बदलाव नहीं हो सकता। 

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Apr 27, 2025 - 03:30
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राजा का कर्तव्य प्रजा की रक्षा करना और वो अपना कर्तव्य निभाएगा, पहलगाम हमले के बीच मोहन भागवत का बड़ा बयान
पहलगाम में हुए दुखद आतंकी हमले के बाद राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के प्रमुख मोहन भागवत ने मुंबई में एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि मौजूदा संघर्ष धार्मिक और सांप्रदायिक विभाजन से परे है। उन्होंने इस संघर्ष को 'धर्म' और 'अधर्म' के बीच संघर्ष बताया, उनके अनुसार यह संघर्ष केवल धार्मिक मतभेदों पर आधारित नहीं है, बल्कि अच्छाई और बुराई के बीच एक बड़ी नैतिक लड़ाई है। इसके साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि अहिंसा हमारा स्वभाव है, हमारा मूल्य है। लेकिन कुछ लोग नहीं बदलेंगे, चाहे आप कुछ भी कर लें, वे दुनिया को परेशान करते रहेंगे, तो इसके बारे में क्या करें?

 

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मोहन भागवत ने कहा कि अहिंसा हमारा धर्म है। गुंडों को सबक सिखाना भी हमारा धर्म है। हम अपने पड़ोसियों का कभी अपमान या नुकसान नहीं करते। लेकिन फिर भी अगर कोई बुराई पर उतर आए तो दूसरा विकल्प क्या है? राजा का कर्तव्य प्रजा की रक्षा करना है, राजा को अपना कर्तव्य निभाना चाहिए। इससे पहले मोहन भागवत ने कहा था कि जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में आतंकवादियों ने निर्दोष नागरिकों से उनके धर्म के बारे में पूछताछ करने के बाद उनकी हत्या कर दी। उन्होंने कहा कि एक हिंदू कभी ऐसा कृत्य नहीं करेगा। उन्होंने सरकार से पहलगाम आतंकी हमले पर कड़ी प्रतिक्रिया देने का आग्रह किया, जिसमें 26 लोग, जिनमें ज्यादातर पर्यटक थे, बंदूकधारियों द्वारा मारे गए थे। आरएसएस प्रमुख ने मुंबई में एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि लोगों से उनका धर्म पूछा गया और उन्हें मार दिया गया। हिंदू ऐसा कभी नहीं करेंगे।
 

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भागवत ने कहा कि अभी जो लड़ाई चल रही है, वह संप्रदाय और धर्म के बीच नहीं है। इसका आधार संप्रदाय और धर्म है, बल्कि यह लड़ाई 'धर्म' और 'अधर्म' के बीच है। हमारे सैनिकों या हमारे लोगों ने कभी किसी को उसका धर्म पूछकर नहीं मारा। जो कट्टरपंथी लोगों ने लोगों को उनका धर्म पूछकर मारा, हिंदू ऐसा कभी नहीं करेंगे। इसलिए देश को मजबूत होना चाहिए। सभी दुखी हैं, हमारे दिलों में गुस्सा है जैसा कि होना चाहिए, क्योंकि राक्षसों का नाश करने के लिए अपार शक्ति की आवश्यकता होती है। लेकिन कुछ लोग इस बात को समझने को तैयार नहीं हैं, और उनमें अब किसी भी तरह का बदलाव नहीं हो सकता। 

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