'मैं वहां मर सकता था', जेल में मौत के मुंह से लौटे विक्रम भट्ट, सुनाई रूह कंपा देने वाली आपबीती
तड़पते शरीर को चार कंबलों ने भी राहत नहीं दी। वीआईपी सुरक्षा में व्यस्त सिस्टम ने अस्पताल ले जाने से इनकार कर दिया। बैरक में मौत सा सन्नाटा था, पर क्या प्रार्थनाओं ने कोई चमत्कार किया। ये आपबीती है विक्रम भट्ट की, जिन्होंने अपनी हालत बयां की है।
तड़पते शरीर को चार कंबलों ने भी राहत नहीं दी। वीआईपी सुरक्षा में व्यस्त सिस्टम ने अस्पताल ले जाने से इनकार कर दिया। बैरक में मौत सा सन्नाटा था, पर क्या प्रार्थनाओं ने कोई चमत्कार किया। ये आपबीती है विक्रम भट्ट की, जिन्होंने अपनी हालत बयां की है।