पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी द्वारा स्थापित तृणमूल कांग्रेस (TMC) में अंदरूनी उथल-पुथल का एक अभूतपूर्व दौर चल रहा है। पिछले कुछ दिनों में वरिष्ठ नेताओं के इस्तीफे, विधायकों और सांसदों के बीच बागी गुटों का उभरना, कांग्रेस में विलय की अटकलें और संगठन के सामने नई चुनौतियां इन सभी ने मिलकर पार्टी की अंदरूनी एकजुटता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
मुश्किल समय में ममता बनर्जी का साथ नहीं छोड़ूंगा
एक्टर से नेता बने शत्रुघ्न सिन्हा ने गुरुवार को कहा कि वह मुश्किल समय में टीएमसी प्रमुख ममता बनर्जी का साथ नहीं छोड़ेंगे। उन्होंने कहा कि जब वह मुश्किल दौर से गुज़र रहे थे, तब ममता बनर्जी उनके साथ खड़ी थीं। आसनसोल से TMC सांसद ने कहा कि हो सकता है कि कुछ लोगों ने मजबूरी, डर या लालच की वजह से बनर्जी का साथ छोड़ दिया हो, लेकिन उनका उसूल है कि वह न तो पार्टी का साथ छोड़ेंगे और न ही पार्टी की नेता का। सिन्हा ने कहा कि मैं मुश्किल समय में ममता बनर्जी का साथ नहीं छोड़ूंगा। जब पटना में चुनाव हारने के बाद मैं मुश्किल दौर से गुज़र रहा था, तब वह मेरे साथ खड़ी थीं। लोकसभा सांसद ने इस बात पर ज़ोर दिया कि बनर्जी एक 'स्ट्रीट फाइटर' (ज़मीनी नेता) हैं और पश्चिम बंगाल में आज भी उनका वोट शेयर 41 प्रतिशत है। उन्होंने राज्य में हाल ही में हुए विधानसभा चुनाव का ज़िक्र किया, जिसमें टीएमसी को हार का सामना करना पड़ा था।
उन्होंने कहा कि मैं उन लोगों का आभारी हूं जिन्होंने मुझे टीएमसी के बागी गुट में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया, लेकिन मेरा सैद्धांतिक रुख यह है कि मुझे अभी ममता बनर्जी के साथ खड़ा होना चाहिए। फिलहाल, मैं अपना रास्ता नहीं बदलूंगा। विधानसभा चुनाव में मिली हार के बाद, TMC की लेजिस्लेचर पार्टी और उसके सांसदों के बीच भी फूट पड़ गई है।