दिल्ली उच्च न्यायालय ने महिला की हत्या के आरोपी को जमानत देने से किया इनकार

दिल्ली उच्च न्यायालय ने 2004 में एक महिला की गला घोंटकर हत्या करने के मामले के आरोपी को जमानत देने से इनकार कर दिया। उच्च न्यायालय ने कहा कि वह इस ‘‘बेहद गंभीर’’ घटना के बाद 16 साल से फरार था। न्यायमूर्ति स्वर्ण कांता शर्मा ने तीन सितंबर को नरेंद्र कुमार बब्बर की जमानत याचिका खारिज कर दी और कहा था कि उसे 2007 में ‘‘भगोड़ा अपराधी’’ घोषित किया गया था। न्यायाधीश ने कहा कि यदि जमानत दी गई तो आरोपी के सुनवाई में शामिल नहीं होने की संभावना है। आदेश में कहा गया है, ‘‘ आवेदक-आरोपी के खिलाफ लगाए गए आरोप बेहद गंभीर और संगीन प्रकृति के हैं... अभियोजन पक्ष के गवाह 1 जो प्रत्यक्षदर्शी है, की गवाही के अवलोकन से पता चलता है... कि कैसे आरोपी ने महिला के विरोध के बावजूद उसे बिस्तर पर पटककर उसका गला घोंट दिया। गवाह ने यह भी आरोप लगाया है कि आरोपी ने उसके साथ मारपीट भी की।’’ यह व्यक्ति 2007 में अपराधी घोषित किये जाने के बाद 2023 तक लापता रहा। न्यायाधीश ने कहा, ‘‘वह 16 साल से अधिक समय से फरार था। इसलिए, उसके मुकदमे से बचने की संभावना पर निचली अदालत और राज्य के अतिरिक्त लोक अभियोजक (एपीपी) ने उचित सवाल उठाया है।’’ अभियोजन पक्ष के अनुसार, आरोपी पीड़िता के घर गया था जहां उसके घरेलू नौकर राकेश ने दरवाजा खोला और उसे अंदर आने दिया। इसके बाद, राकेश को पड़ोस में एक फ्लैट के बारे में पूछताछ करने के लिए भेजा गया था। जब आरोपी महिला के साथ अकेला था, तो उसने महिला के साथ दुर्व्यवहार करना शुरू कर दिया और जब उसने विरोध किया तो उसने उसे धमकाया, बिस्तर पर पटका और उसका गला घोंट दिया।

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Sep 6, 2025 - 04:32
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दिल्ली उच्च न्यायालय ने महिला की हत्या के आरोपी को जमानत देने से किया इनकार

दिल्ली उच्च न्यायालय ने 2004 में एक महिला की गला घोंटकर हत्या करने के मामले के आरोपी को जमानत देने से इनकार कर दिया। उच्च न्यायालय ने कहा कि वह इस ‘‘बेहद गंभीर’’ घटना के बाद 16 साल से फरार था।

न्यायमूर्ति स्वर्ण कांता शर्मा ने तीन सितंबर को नरेंद्र कुमार बब्बर की जमानत याचिका खारिज कर दी और कहा था कि उसे 2007 में ‘‘भगोड़ा अपराधी’’ घोषित किया गया था। न्यायाधीश ने कहा कि यदि जमानत दी गई तो आरोपी के सुनवाई में शामिल नहीं होने की संभावना है।

आदेश में कहा गया है, ‘‘ आवेदक-आरोपी के खिलाफ लगाए गए आरोप बेहद गंभीर और संगीन प्रकृति के हैं... अभियोजन पक्ष के गवाह 1 जो प्रत्यक्षदर्शी है, की गवाही के अवलोकन से पता चलता है... कि कैसे आरोपी ने महिला के विरोध के बावजूद उसे बिस्तर पर पटककर उसका गला घोंट दिया। गवाह ने यह भी आरोप लगाया है कि आरोपी ने उसके साथ मारपीट भी की।’’

यह व्यक्ति 2007 में अपराधी घोषित किये जाने के बाद 2023 तक लापता रहा। न्यायाधीश ने कहा, ‘‘वह 16 साल से अधिक समय से फरार था। इसलिए, उसके मुकदमे से बचने की संभावना पर निचली अदालत और राज्य के अतिरिक्त लोक अभियोजक (एपीपी) ने उचित सवाल उठाया है।’’

अभियोजन पक्ष के अनुसार, आरोपी पीड़िता के घर गया था जहां उसके घरेलू नौकर राकेश ने दरवाजा खोला और उसे अंदर आने दिया। इसके बाद, राकेश को पड़ोस में एक फ्लैट के बारे में पूछताछ करने के लिए भेजा गया था।

जब आरोपी महिला के साथ अकेला था, तो उसने महिला के साथ दुर्व्यवहार करना शुरू कर दिया और जब उसने विरोध किया तो उसने उसे धमकाया, बिस्तर पर पटका और उसका गला घोंट दिया।

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