किन्नौर कैलाश यात्रा का हुआ आगाज: Registration से लेकर Trekking तक, Delhi से जाने वाले श्रद्धालुओं के लिए पूरी Travel Guide

सावन का महीना शुरु हो चुका है। ऐसे में शिव भक्त अलग-अलग तीर्थस्थल पर जाने का प्लान करते हैं। इन्हीं में से एक है किन्नौर कैलाश यात्रा। यहां पर जाने का हर किसी का सपना होता है। हिमाचल प्रदेश की प्रसिद्ध किन्नौर कैलाश यात्रा है, जहां हजारों श्रद्धालु पहुंचते हैं। वैसे यहां पर पहुंचने के लिए कठिन ट्रेक से गुजरना पड़ता है। यदि आप इस बार किन्नौर कैलाश जाने का प्लान बना रहे हैं, तो पहले इस बारे में सभी जानकारी जान लें।बता दें कि, इस साल 30 जुलाई से किन्नौर कैलाश यात्रा शुरु हो चुकी है, जो कि 10 अगस्त तक चलने वाली है। बिना रजिस्ट्रेशन के किसी भी श्रद्धालु को यात्रा की अनमुति नहीं दी जाएगी। यद आप दिल्ली से यहा पर जाने का प्लान बना रहे हैं, तो एक बार यह ट्रैवल गाइड को जरुर देंख लें।किन्नौर कैलाश यात्रा क्यों है खास?आपको बताते चलें कि, हिमाचल प्रदेस के किन्नौर जिले में स्थित किन्नौर कैलाश भगवान शिव का पवित्र धाम है। यहां पर मौजूद प्राकृतिक शिवलिंग जैसी विशाल चट्टान श्रद्धालुओं के लिए आस्था केंद्र हैं। हर साल सावन में हजारों यहां पर हजारों भक्तजन आते हैं। आपको बता दें कि, यह ट्रेक आसान नहीं है, इसलिए बेहद जरुरी है फिजिकली फिट होना। दिल्ली से कैसे जाएं?पहला स्टेज- दिल्ली से शिमलाबता दें कि, दिल्ली से शिमला की दूरी करीब 340-360 किलोमीटर है। इधर से आप बस से भी जा सकते हैं।दूसरा स्टेज- शिमला से रिकांग पियोजब आप शिमला पहुंच जाएंगे, तो रिकांग पियो जाना होगा। जिसकी दूरी करबी 220 किलोमीटर है। यहां से आपको हिमाचल रोडवेज और प्राइवेट बसें दोनों ही मिल जाएंगी। चाहे आप टैक्सी से भी जा सकते हैं।तीसरा स्टेज- रिकांग पियो से टांगलिंग गांवटांगलिंग गांव ही यात्रा का बेस कैंप माना जाता है। बता दें कि, यहीं से किन्नौर कैलाश ट्रेक शुरु होता है। कितना कठिन ट्रैक है?दरअसल, किन्नौर कैलाश ट्रेक की गिनती सबसे कठिन ट्रेक में से एक है। ट्रेकिंग की शुरुआत टांगलिंग गांव से होती है। रास्ते में मिलिंग खाटा और पार्वती कुंड जैसे कहई पड़ाव आते हैं। फिर यहां पर भक्तजन पहुंचते हैं। बता दें कि, यहां की ऊंचाई बहुत ज्यादा है, जिस कारण से सांस फूलना और थकान महसूस होना आम बात है। इसलिए जल्दबाजी करने की बजाय धीरे-धीरे चढ़ाई करें।सबसे जरुरी रजिस्ट्रेशन कराना- आप बिना रजिस्ट्रेशन के यात्रा नहीं कर सकते हैं।- मेडिकल फिटनेस सर्टिफिकेट मैंडेटरी है।- प्रत्येक दिन 375 श्रद्धालुओं को ही जाने की अनुमति मिलेगी।- आप ऑनलाइन या ऑफलाइन दोनों तरह से आप रजिस्ट्रेशन करा सकते हैं। यात्रा में क्या-क्या साथ रखें?- अपने साथ रेनकोट या पोंचो रखें - मौसम बदलता रहता है इसलिए वुलेन जैकेट रखें। - अच्छी ग्रिप वाले ट्रेकिंग शूज पहनें।- टॉर्च अपने साथ रखें। - पानी की बॉटल, जरुरी दवाइयां। - ट्रेकिंग स्टिक  - इसके साथ ही खाने के लिए स्नैक्स अपने साथ रखें।यात्रा के समय किन बातों का ध्यान रखें- भूलकर भी शॉर्टकट रास्ते पर न जाए। - अकेले ट्रेक करने से बचें। - प्लास्टिक और कचरा को रास्ते में न फेंके।- यदि मौसम खराब है, तो आगे बढ़ने की कोशिश न करें।- प्रशासन और लोकल गाइड के निर्देशों का पालन करें।- अगर आपको ट्रेकिंग के दौरान कोई परेशानी महसूस हो तो तुरंत आराम करें।कितने दिन का प्लान बनाएं?-पहला दिन: दिल्ली से शिमला- दूसरा दिन: शिमला से रिकांग पियो- तीसरा दिन- टांगलिंग पहुंचकर ट्रेक की शुरुआत होगी- चौथा दिन- किन्नौर कैलाश दर्शन और वापसी - पांचवां दिन: रिकांग पियो से दिल्ली की वापसी

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Aug 5, 2026 - 15:42
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किन्नौर कैलाश यात्रा का हुआ आगाज: Registration से लेकर Trekking तक, Delhi से जाने वाले श्रद्धालुओं के लिए पूरी Travel Guide
सावन का महीना शुरु हो चुका है। ऐसे में शिव भक्त अलग-अलग तीर्थस्थल पर जाने का प्लान करते हैं। इन्हीं में से एक है किन्नौर कैलाश यात्रा। यहां पर जाने का हर किसी का सपना होता है। हिमाचल प्रदेश की प्रसिद्ध किन्नौर कैलाश यात्रा है, जहां हजारों श्रद्धालु पहुंचते हैं। 
वैसे यहां पर पहुंचने के लिए कठिन ट्रेक से गुजरना पड़ता है। यदि आप इस बार किन्नौर कैलाश जाने का प्लान बना रहे हैं, तो पहले इस बारे में सभी जानकारी जान लें।
बता दें कि, इस साल 30 जुलाई से किन्नौर कैलाश यात्रा शुरु हो चुकी है, जो कि 10 अगस्त तक चलने वाली है। बिना रजिस्ट्रेशन के किसी भी श्रद्धालु को यात्रा की अनमुति नहीं दी जाएगी। यद आप दिल्ली से यहा पर जाने का प्लान बना रहे हैं, तो एक बार यह ट्रैवल गाइड को जरुर देंख लें।

किन्नौर कैलाश यात्रा क्यों है खास?
आपको बताते चलें कि, हिमाचल प्रदेस के किन्नौर जिले में स्थित किन्नौर कैलाश भगवान शिव का पवित्र धाम है। यहां पर मौजूद प्राकृतिक शिवलिंग जैसी विशाल चट्टान श्रद्धालुओं के लिए आस्था केंद्र हैं। हर साल सावन में हजारों यहां पर हजारों भक्तजन आते हैं। आपको बता दें कि, यह ट्रेक आसान नहीं है, इसलिए बेहद जरुरी है फिजिकली फिट होना। 

दिल्ली से कैसे जाएं?

पहला स्टेज- दिल्ली से शिमला
बता दें कि, दिल्ली से शिमला की दूरी करीब 340-360 किलोमीटर है। इधर से आप बस से भी जा सकते हैं।

दूसरा स्टेज- शिमला से रिकांग पियो
जब आप शिमला पहुंच जाएंगे, तो रिकांग पियो जाना होगा। जिसकी दूरी करबी 220 किलोमीटर है। यहां से आपको हिमाचल रोडवेज और प्राइवेट बसें दोनों ही मिल जाएंगी। चाहे आप टैक्सी से भी जा सकते हैं।

तीसरा स्टेज- रिकांग पियो से टांगलिंग गांव
टांगलिंग गांव ही यात्रा का बेस कैंप माना जाता है। बता दें कि, यहीं से किन्नौर कैलाश ट्रेक शुरु होता है। 

कितना कठिन ट्रैक है?
दरअसल, किन्नौर कैलाश ट्रेक की गिनती सबसे कठिन ट्रेक में से एक है। ट्रेकिंग की शुरुआत टांगलिंग गांव से होती है। रास्ते में मिलिंग खाटा और पार्वती कुंड जैसे कहई पड़ाव आते हैं। फिर यहां पर भक्तजन पहुंचते हैं। बता दें कि, यहां की ऊंचाई बहुत ज्यादा है, जिस कारण से सांस फूलना और थकान महसूस होना आम बात है। इसलिए जल्दबाजी करने की बजाय धीरे-धीरे चढ़ाई करें।

सबसे जरुरी रजिस्ट्रेशन कराना
- आप बिना रजिस्ट्रेशन के यात्रा नहीं कर सकते हैं।

- मेडिकल फिटनेस सर्टिफिकेट मैंडेटरी है।

- प्रत्येक दिन 375 श्रद्धालुओं को ही जाने की अनुमति मिलेगी।

- आप ऑनलाइन या ऑफलाइन दोनों तरह से आप रजिस्ट्रेशन करा सकते हैं। 

यात्रा में क्या-क्या साथ रखें?
- अपने साथ रेनकोट या पोंचो रखें

 - मौसम बदलता रहता है इसलिए वुलेन जैकेट रखें।

 - अच्छी ग्रिप वाले ट्रेकिंग शूज पहनें।

- टॉर्च अपने साथ रखें।

 - पानी की बॉटल, जरुरी दवाइयां।

 - ट्रेकिंग स्टिक 

 - इसके साथ ही खाने के लिए स्नैक्स अपने साथ रखें।

यात्रा के समय किन बातों का ध्यान रखें
- भूलकर भी शॉर्टकट रास्ते पर न जाए।

 - अकेले ट्रेक करने से बचें।

 - प्लास्टिक और कचरा को रास्ते में न फेंके।

- यदि मौसम खराब है, तो आगे बढ़ने की कोशिश न करें।

- प्रशासन और लोकल गाइड के निर्देशों का पालन करें।

- अगर आपको ट्रेकिंग के दौरान कोई परेशानी महसूस हो तो तुरंत आराम करें।

कितने दिन का प्लान बनाएं?
-पहला दिन: दिल्ली से शिमला
- दूसरा दिन: शिमला से रिकांग पियो
- तीसरा दिन- टांगलिंग पहुंचकर ट्रेक की शुरुआत होगी
- चौथा दिन- किन्नौर कैलाश दर्शन और वापसी 
- पांचवां दिन: रिकांग पियो से दिल्ली की वापसी

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