उइगर नरसंहार मान्यता दिवस के चार साल पूरे, चीनी अत्याचारों के खिलाफ कार्रवाई का वैश्विक आह्वान

विश्व उइगर कांग्रेस (डब्ल्यूयूसी) ने 9 और 10 दिसंबर को उइगर नरसंहार मान्यता दिवस की स्थापना और उइगर न्यायाधिकरण के अंतिम फैसले के चार साल पूरे होने के उपलक्ष्य में, जारी उइगर नरसंहार के पीड़ितों को याद किया। डब्ल्यूयूसी ने कहा कि उइगर न्यायाधिकरण की स्थापना जून 2020 में उसके पूर्व अध्यक्ष डोलकुन ईसा के अनुरोध पर की गई थी, ताकि पूर्वी तुर्किस्तान के उइगरों, कज़ाकों और अन्य तुर्क मुस्लिम लोगों के खिलाफ चीन द्वारा किए गए कथित अत्याचारों का दस्तावेजीकरण किया जा सके। सर जेफ्री नाइस की अध्यक्षता वाले इस स्वतंत्र न्यायाधिकरण में कानूनी विशेषज्ञ, शिक्षाविद और नागरिक समाज के प्रतिनिधि शामिल थे, और इसने नरसंहार और मानवता के खिलाफ अपराधों के आरोपों की जाँच की।इसे भी पढ़ें: इस महिला ने ट्रंप से ऐसा क्या कहा? ठनका US प्रेसिडेंट का माथा, भारत पर दी तगड़ा टैरिफ ठोकने की धमकीडब्ल्यूयूसी के अध्यक्ष तुर्गुंजन अलाउदुन के हवाले से, विज्ञप्ति में कहा गया है कि 9 दिसंबर हमें याद दिलाता है कि नरसंहार कोई अमूर्त ऐतिहासिक अवधारणा नहीं है, बल्कि उइगर लोगों द्वारा झेली जा रही एक दैनिक वास्तविकता है।" उन्होंने आगे कहा कि न्यायाधिकरण ने ऐसे भारी सबूत पेश किए हैं जिन्हें दुनिया अब और नज़रअंदाज़ नहीं कर सकती, और चेतावनी दी कि एक समुदाय के खिलाफ नरसंहार को जारी रखने की अनुमति देना वैश्विक सुरक्षा और अंतर्राष्ट्रीय व्यवस्था के लिए खतरा है। डब्ल्यूयूसी के अनुसार, न्यायाधिकरण ने जून, सितंबर और नवंबर 2021 में हुई सुनवाई के बाद 9 दिसंबर, 2021 को अपना अंतिम फैसला सुनाया। यह फैसला 500 से ज़्यादा गवाहों के बयानों, एक पूर्व चीनी पुलिस अधिकारी सहित 30 से ज़्यादा प्रत्यक्ष गवाहों की गवाही और 40 विशेषज्ञ गवाहों के इनपुट पर आधारित था। विज्ञप्ति में कहा गया है कि न्यायाधिकरण इस निष्कर्ष पर पहुँचा है कि पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ़ चाइना (पीआरसी) उइगर लोगों के ख़िलाफ़ नरसंहार और मानवता के ख़िलाफ़ अपराध कर रहा है।इसे भी पढ़ें: China ने पहली बार पुतिन को लेकर भारत पर जो कहा, सुनकर दंग रह गई दुनिया!डब्ल्यूयूसी ने आगे उल्लेख किया कि कम से कम दस राष्ट्रीय संसदों ने औपचारिक रूप से इन अत्याचारों को मान्यता दी है। हालाँकि, संगठन ने ज़ोर देकर कहा कि केवल प्रतीकात्मक मान्यता अपर्याप्त है, खासकर जब चीन अंतर्राष्ट्रीय मानवाधिकार संस्थाओं में अपना प्रभाव बढ़ा रहा है और संयुक्त राष्ट्र का सबसे बड़ा बजट योगदानकर्ता बन गया है, जैसा कि विज्ञप्ति में उल्लेख किया गया है।इसे भी पढ़ें: भारतीयों के साथ तमीज से रहो...चीन को विदेश मंत्रालय ने अलग अंदाज में समझा दिया, जारी की ट्रैवल एडवाइजरीन्यायाधिकरण के फैसले के चार साल बाद, डब्ल्यूयूसी ने आरोप लगाया कि चीन नरसंहार को छुपाने की कोशिश कर रहा है। तथाकथित "पुनर्शिक्षा" शिविरों को बंद करने के दावों के बावजूद, संगठन ने ज़ोर देकर कहा कि लंबी अवधि के कारावास, हिरासत केंद्रों और जबरन श्रम योजनाओं के साथ-साथ पूरे चीन में श्रमिकों के स्थानांतरण सहित अन्य तरीकों से सामूहिक हिरासत जारी है। डब्ल्यूयूसी के अनुसार, कई बंदी रिहाई के बाद भी कड़ी, आजीवन निगरानी में रहते हैं।

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Dec 10, 2025 - 10:48
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उइगर नरसंहार मान्यता दिवस के चार साल पूरे, चीनी अत्याचारों के खिलाफ कार्रवाई का वैश्विक आह्वान

विश्व उइगर कांग्रेस (डब्ल्यूयूसी) ने 9 और 10 दिसंबर को उइगर नरसंहार मान्यता दिवस की स्थापना और उइगर न्यायाधिकरण के अंतिम फैसले के चार साल पूरे होने के उपलक्ष्य में, जारी उइगर नरसंहार के पीड़ितों को याद किया। डब्ल्यूयूसी ने कहा कि उइगर न्यायाधिकरण की स्थापना जून 2020 में उसके पूर्व अध्यक्ष डोलकुन ईसा के अनुरोध पर की गई थी, ताकि पूर्वी तुर्किस्तान के उइगरों, कज़ाकों और अन्य तुर्क मुस्लिम लोगों के खिलाफ चीन द्वारा किए गए कथित अत्याचारों का दस्तावेजीकरण किया जा सके। सर जेफ्री नाइस की अध्यक्षता वाले इस स्वतंत्र न्यायाधिकरण में कानूनी विशेषज्ञ, शिक्षाविद और नागरिक समाज के प्रतिनिधि शामिल थे, और इसने नरसंहार और मानवता के खिलाफ अपराधों के आरोपों की जाँच की।

इसे भी पढ़ें: इस महिला ने ट्रंप से ऐसा क्या कहा? ठनका US प्रेसिडेंट का माथा, भारत पर दी तगड़ा टैरिफ ठोकने की धमकी

डब्ल्यूयूसी के अध्यक्ष तुर्गुंजन अलाउदुन के हवाले से, विज्ञप्ति में कहा गया है कि 9 दिसंबर हमें याद दिलाता है कि नरसंहार कोई अमूर्त ऐतिहासिक अवधारणा नहीं है, बल्कि उइगर लोगों द्वारा झेली जा रही एक दैनिक वास्तविकता है।" उन्होंने आगे कहा कि न्यायाधिकरण ने ऐसे भारी सबूत पेश किए हैं जिन्हें दुनिया अब और नज़रअंदाज़ नहीं कर सकती, और चेतावनी दी कि एक समुदाय के खिलाफ नरसंहार को जारी रखने की अनुमति देना वैश्विक सुरक्षा और अंतर्राष्ट्रीय व्यवस्था के लिए खतरा है। डब्ल्यूयूसी के अनुसार, न्यायाधिकरण ने जून, सितंबर और नवंबर 2021 में हुई सुनवाई के बाद 9 दिसंबर, 2021 को अपना अंतिम फैसला सुनाया। यह फैसला 500 से ज़्यादा गवाहों के बयानों, एक पूर्व चीनी पुलिस अधिकारी सहित 30 से ज़्यादा प्रत्यक्ष गवाहों की गवाही और 40 विशेषज्ञ गवाहों के इनपुट पर आधारित था। विज्ञप्ति में कहा गया है कि न्यायाधिकरण इस निष्कर्ष पर पहुँचा है कि पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ़ चाइना (पीआरसी) उइगर लोगों के ख़िलाफ़ नरसंहार और मानवता के ख़िलाफ़ अपराध कर रहा है।

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डब्ल्यूयूसी ने आगे उल्लेख किया कि कम से कम दस राष्ट्रीय संसदों ने औपचारिक रूप से इन अत्याचारों को मान्यता दी है। हालाँकि, संगठन ने ज़ोर देकर कहा कि केवल प्रतीकात्मक मान्यता अपर्याप्त है, खासकर जब चीन अंतर्राष्ट्रीय मानवाधिकार संस्थाओं में अपना प्रभाव बढ़ा रहा है और संयुक्त राष्ट्र का सबसे बड़ा बजट योगदानकर्ता बन गया है, जैसा कि विज्ञप्ति में उल्लेख किया गया है।

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न्यायाधिकरण के फैसले के चार साल बाद, डब्ल्यूयूसी ने आरोप लगाया कि चीन नरसंहार को छुपाने की कोशिश कर रहा है। तथाकथित "पुनर्शिक्षा" शिविरों को बंद करने के दावों के बावजूद, संगठन ने ज़ोर देकर कहा कि लंबी अवधि के कारावास, हिरासत केंद्रों और जबरन श्रम योजनाओं के साथ-साथ पूरे चीन में श्रमिकों के स्थानांतरण सहित अन्य तरीकों से सामूहिक हिरासत जारी है। डब्ल्यूयूसी के अनुसार, कई बंदी रिहाई के बाद भी कड़ी, आजीवन निगरानी में रहते हैं।

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