WSK Super Masters: 11 साल की Atika ने मुश्किल हालात में रचा इतिहास, लहराया भारत का परचम

भारतीय मोटरस्पोर्ट जगत से एक प्रेरक खबर सामने आई है, जहां महज 11 वर्ष की उम्र में आतिका ने अंतरराष्ट्रीय कार्टिंग सर्किट पर अपनी प्रतिभा का दमदार परिचय दिया है। मिनी वर्ग से सीधे जूनियर कैटेगरी में स्वैच्छिक रूप से कदम रखना अपने आप में बड़ा जोखिम माना जाता है, लेकिन आतिका ने शुरुआती दौर में ही उम्मीदों से कहीं बेहतर प्रदर्शन कर सबका ध्यान खींचा है।बता दें कि 2026 सत्र में वह यूरोप की कड़ाके की ठंड और अपरिचित ट्रैकों पर प्रतिस्पर्धा कर रही हैं। डब्ल्यूएसके सुपर मास्टर्स श्रृंखला के शुरुआती चरण में क्वालीफाइंग में दूसरा स्थान हासिल कर उन्होंने पैडॉक में मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई। गौरतलब है कि इस ग्रिड पर वह इकलौती महिला ड्राइवर हैं।इसके बाद इटली के प्रतिष्ठित सर्किट डि नेपोली में गीली और चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में छठा सबसे तेज समय निकालना उनकी परिपक्वता को दर्शाता है। रेस के दौरान 45 से अधिक कार्ट्स के बीच 16 स्थानों की बढ़त बनाना उनके आत्मविश्वास और रेस क्राफ्ट का प्रमाण है।मौजूद जानकारी के अनुसार, मिनी वर्ग (8-12 वर्ष) से ओकेएनजे जूनियर (12-14 वर्ष) में जाना तकनीकी रूप से बड़ा बदलाव है। जूनियर कार्ट्स का वजन लगभग 30 किलोग्राम अधिक होता है और इनकी शक्ति लगभग तीन गुना तक बढ़ जाती है। ऐसे में कम उम्र में इस स्तर की मशीनरी को संभालना आसान नहीं माना जाता।आतिका के कोच फेलिसे टिएने, जिन्हें कार्टिंग जगत के अनुभवी मार्गदर्शकों में गिना जाता है, ने उनकी कार्यशैली और सीखने की क्षमता की सराहना की है। उन्होंने कहा कि नए माहौल और नई श्रेणी में पहली ही क्वालीफाइंग में दूसरा स्थान हासिल करना असाधारण उपलब्धि है। टिएने के अनुसार, आतिका तेजी से सीखती हैं और अनजान ट्रैकों पर भी तुरंत प्रतिस्पर्धी बन जाती हैं।उनके पिता आसिफ मीर, जो शुरुआती 2000 के दशक में एशियाई फॉर्मूला श्रृंखला में उपविजेता रह चुके हैं, ने स्वीकार किया कि जूनियर वर्ग में इतनी जल्दी प्रवेश कराना बड़ा जोखिम था। उन्होंने कहा कि संयुक्त अरब अमीरात और अन्य चैंपियनशिप छोड़कर सीधे उच्च स्तर की प्रतिस्पर्धा में उतरना चुनौतीपूर्ण फैसला था, लेकिन आतिका ने अपेक्षाओं से बढ़कर प्रदर्शन किया है।गौरतलब है कि मोटरस्पोर्ट में महिला भागीदारी बढ़ाने की दिशा में ऐसे प्रदर्शन महत्वपूर्ण माने जाते हैं। आतिका का लक्ष्य भविष्य में प्रमुख फॉर्मूला श्रृंखलाओं में जगह बनाना है। इस सप्ताह वह इटली में WSK सुपर मास्टर्स के तीसरे चरण में फिर ट्रैक पर उतरेंगी, जहां उनसे एक और मजबूत प्रदर्शन की उम्मीद की जा रही है।

PNSPNS
Feb 18, 2026 - 10:58
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WSK Super Masters: 11 साल की Atika ने मुश्किल हालात में रचा इतिहास, लहराया भारत का परचम
भारतीय मोटरस्पोर्ट जगत से एक प्रेरक खबर सामने आई है, जहां महज 11 वर्ष की उम्र में आतिका ने अंतरराष्ट्रीय कार्टिंग सर्किट पर अपनी प्रतिभा का दमदार परिचय दिया है। मिनी वर्ग से सीधे जूनियर कैटेगरी में स्वैच्छिक रूप से कदम रखना अपने आप में बड़ा जोखिम माना जाता है, लेकिन आतिका ने शुरुआती दौर में ही उम्मीदों से कहीं बेहतर प्रदर्शन कर सबका ध्यान खींचा है।

बता दें कि 2026 सत्र में वह यूरोप की कड़ाके की ठंड और अपरिचित ट्रैकों पर प्रतिस्पर्धा कर रही हैं। डब्ल्यूएसके सुपर मास्टर्स श्रृंखला के शुरुआती चरण में क्वालीफाइंग में दूसरा स्थान हासिल कर उन्होंने पैडॉक में मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई। गौरतलब है कि इस ग्रिड पर वह इकलौती महिला ड्राइवर हैं।

इसके बाद इटली के प्रतिष्ठित सर्किट डि नेपोली में गीली और चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में छठा सबसे तेज समय निकालना उनकी परिपक्वता को दर्शाता है। रेस के दौरान 45 से अधिक कार्ट्स के बीच 16 स्थानों की बढ़त बनाना उनके आत्मविश्वास और रेस क्राफ्ट का प्रमाण है।

मौजूद जानकारी के अनुसार, मिनी वर्ग (8-12 वर्ष) से ओकेएनजे जूनियर (12-14 वर्ष) में जाना तकनीकी रूप से बड़ा बदलाव है। जूनियर कार्ट्स का वजन लगभग 30 किलोग्राम अधिक होता है और इनकी शक्ति लगभग तीन गुना तक बढ़ जाती है। ऐसे में कम उम्र में इस स्तर की मशीनरी को संभालना आसान नहीं माना जाता।

आतिका के कोच फेलिसे टिएने, जिन्हें कार्टिंग जगत के अनुभवी मार्गदर्शकों में गिना जाता है, ने उनकी कार्यशैली और सीखने की क्षमता की सराहना की है। उन्होंने कहा कि नए माहौल और नई श्रेणी में पहली ही क्वालीफाइंग में दूसरा स्थान हासिल करना असाधारण उपलब्धि है। टिएने के अनुसार, आतिका तेजी से सीखती हैं और अनजान ट्रैकों पर भी तुरंत प्रतिस्पर्धी बन जाती हैं।

उनके पिता आसिफ मीर, जो शुरुआती 2000 के दशक में एशियाई फॉर्मूला श्रृंखला में उपविजेता रह चुके हैं, ने स्वीकार किया कि जूनियर वर्ग में इतनी जल्दी प्रवेश कराना बड़ा जोखिम था। उन्होंने कहा कि संयुक्त अरब अमीरात और अन्य चैंपियनशिप छोड़कर सीधे उच्च स्तर की प्रतिस्पर्धा में उतरना चुनौतीपूर्ण फैसला था, लेकिन आतिका ने अपेक्षाओं से बढ़कर प्रदर्शन किया है।

गौरतलब है कि मोटरस्पोर्ट में महिला भागीदारी बढ़ाने की दिशा में ऐसे प्रदर्शन महत्वपूर्ण माने जाते हैं। आतिका का लक्ष्य भविष्य में प्रमुख फॉर्मूला श्रृंखलाओं में जगह बनाना है। इस सप्ताह वह इटली में WSK सुपर मास्टर्स के तीसरे चरण में फिर ट्रैक पर उतरेंगी, जहां उनसे एक और मजबूत प्रदर्शन की उम्मीद की जा रही है।

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