पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों के दूसरे चरण के लिए वोटिंग सात ज़िलों की 142 सीटों पर शुरू हो गई है, जहाँ सुरक्षा और प्रशासनिक इंतज़ाम पुख्ता हैं। भारत के चुनाव आयोग ने वोटिंग को शांतिपूर्ण और बिना किसी रुकावट के पूरा कराने के लिए बड़े पैमाने पर अभियान चलाया है, जिसके तहत पूरे राज्य में 3,50,000 से ज़्यादा सुरक्षाकर्मी तैनात किए गए हैं।
राज्य की राजधानी कोलकाता में, लगभग 35,000 सुरक्षा बल तैनात किए गए हैं, जबकि केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों की लगभग 2,550 कंपनियों को पूरे राज्य में ड्यूटी पर लगाया गया है। पारदर्शिता बनाए रखने और पूरी प्रक्रिया पर बारीकी से नज़र रखने के लिए, 142 सामान्य पर्यवेक्षक और 95 पुलिस पर्यवेक्षक नियुक्त किए गए हैं।
एक अहम घटनाक्रम में, इन चुनावों के दौरान पहली बार राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) को तैनात किया गया है, ताकि हिंसा की किसी भी गंभीर घटना या सुरक्षा खतरों से निपटा जा सके।
यह चरण कई हाई-प्रोफाइल चुनावी मुकाबलों की वजह से खास तौर पर अहम है। तृणमूल कांग्रेस (TMC) की ममता बनर्जी और भारतीय जनता पार्टी (BJP) के शुभेंदु अधिकारी के बीच एक अहम मुकाबला होने की उम्मीद है। ऐसे मुकाबलों के नतीजों का राज्य के बड़े राजनीतिक माहौल पर असर पड़ने की संभावना है। इसके अलावा, मौजूदा सरकार के आठ मंत्री भी इस चरण में चुनाव लड़ रहे हैं, जिससे राजनीतिक दांव और भी बढ़ गए हैं।
कुल 1,448 उम्मीदवार मैदान में हैं, और 3 करोड़ 20 लाख से ज़्यादा योग्य मतदाताओं के अपने वोट डालने की उम्मीद है। इससे पहले, 23 अप्रैल को पहले चरण में 152 सीटों पर वोटिंग हुई थी, जिससे यह बहु-चरणीय चुनाव प्रक्रिया का अगला अहम कदम बन गया है।
शुभेंदु अधिकारी ने अपनी पार्टी की संभावनाओं पर भरोसा जताते हुए कहा है कि BJP राज्य में पूर्ण बहुमत हासिल करेगी। उन्होंने भवानीपुर में ममता बनर्जी को हराने का भी संकल्प लिया।
स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव के लिए पहल
चुनाव आयोग ने मतदाताओं की सुविधा और चुनावी नियमों के उल्लंघन को रोकने के लिए एक विशेष हेल्पलाइन शुरू की है। नागरिक किसी भी संदिग्ध गतिविधि या नियम उल्लंघन की शिकायत सीधे आयोग से कर सकते हैं।
इससे पहले 23 अप्रैल को पहले चरण में 152 सीटों पर वोटिंग हुई थी। दूसरे चरण की यह प्रक्रिया राज्य की भविष्य की राजनीति की दिशा तय करने में निर्णायक भूमिका निभाएगी।
नतीजों का इंतज़ार: राज्य की जनता का फैसला ईवीएम में कैद हो रहा है, जिसका खुलासा 4 मई को होने वाली मतगणना के साथ होगा। क्या ममता बनर्जी अपनी सत्ता बरकरार रखेंगी या भाजपा बंगाल के दुर्ग को फतह करेगी? इसका जवाब अब चंद दिनों की दूरी पर है।