सरकार ने आज कहा कि खाड़ी क्षेत्र में सभी भारतीय नाविक सुरक्षित हैं और पिछले 24 घंटों में भारतीय ध्वज वाले जहाजों से जुड़ी कोई घटना सामने नहीं आई है। पश्चिम एशिया में हाल के घटनाक्रमों पर अंतर-मंत्रालयी ब्रीफिंग में बोलते हुए, बंदरगाह, जहाजरानी और जलमार्ग मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव मुकेश मंगल ने कहा कि पूरे भारत में बंदरगाह संचालन सामान्य रूप से चल रहा है और किसी भी प्रकार की भीड़भाड़ की सूचना नहीं है।
उन्होंने कहा कि जब संघर्ष शुरू हुआ था तब स्थिति चुनौतीपूर्ण थी, जिसके कारण शिपिंग लाइन के संचालन में व्यवधान उत्पन्न हुआ और बंदरगाहों पर कंटेनरों का ढेर लग गया। उन्होंने कहा कि जब यह युद्ध शुरू हुआ, तो जहाजरानी लाइनों का संचालन बाधित हो गया और बंदरगाहों पर बड़ी संख्या में कंटेनर जमा हो गए। जब निर्यातक इन कंटेनरों को वापस ले जाना चाहते हैं, तो इन्हें 'बैक टू टाउन' कंटेनर कहा जाता है।
मंगल ने कहा कि हमारे पश्चिमी तट पर, दो मुख्य बंदरगाहों पर, 8 मार्च को लगभग 3,383 ऐसे कंटेनर 'बैक टू टाउन' कंटेनर घोषित किए गए थे। 19 मार्च तक इनकी संख्या घटकर 99 रह गई, जो लगभग 97% की कमी दर्शाती है। उन्होंने इस सुधार का श्रेय बंदरगाह अधिकारियों के समन्वित प्रयासों और निर्यातकों पर वित्तीय दबाव कम करने वाले नीतिगत उपायों को दिया। उन्होंने कहा कि बंदरगाहों के व्यापक सहयोग से यह कमी संभव हो पाई, जिन्होंने विलंब शुल्क और अतिरिक्त किराया आदि माफ कर दिया। इससे निर्यातकों को काफी राहत मिली।
मंगल ने बताया कि 28 फरवरी से अब तक कुल नौ एलपीजी पोत और एक कच्चे तेल का पोत होर्मुज जलडमरूमध्य से सुरक्षित रूप से गुजर चुके हैं, जो इस क्षेत्र में समुद्री आवागमन में धीरे-धीरे हो रही स्थिरता को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि संघर्ष के चरम पर लगभग 80% से घटकर अब यार्ड में औसत उपस्थिति लगभग 60% हो गई है, जो बंदरगाह के बुनियादी ढांचे पर दबाव कम होने का संकेत है।