Trump vs Democrats: मेल वोटिंग विवाद में Supreme Court का बड़ा फैसला, प्रतिबंधों से जुड़े आदेश को लागू करने की मिली हरी झंडी

अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस आदेश को फिलहाल आगे बढ़ने की इजाज़त दे दी है, जिसमें मेल वोटिंग पर रोक लगाने की बात कही गई थी। इस फैसले ने देश के लगभग एक-तिहाई लोगों द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले वोटिंग के तरीके पर नई अनिश्चितता पैदा कर दी है, भले ही इससे नवंबर के मध्यावधि चुनावों (मिडटर्म्स) की वोटिंग प्रक्रिया में तुरंत कोई बदलाव न आए। कोर्ट ने यह नहीं कहा कि आदेश कानूनी है। सोमवार को बिना हस्ताक्षर वाले एक फैसले में कोर्ट ने कहा कि डेमोक्रेटिक-शासित राज्यों के लिए जून में ही इस कदम को चुनौती देना जल्दबाजी थी, जब उन्होंने बोस्टन में एक फेडरल जज को नवंबर के चुनाव के लिए इसे रोकने के लिए मना लिया था। इस फैसले ने कानूनी लड़ाई को एक तरह से फिर से शुरू कर दिया है, जबकि शुरुआती वोटिंग की तैयारियां पहले से ही चल रही हैं और नॉर्थ कैरोलिना में विदेशी और सैन्य वोटरों को 4 सितंबर को पहला बैलेट भेजा जाना है।इसे भी पढ़ें: क्या भारत ने की थी नो क्वेश्चन PC की मांग, Sergio Gor के दावे का ये है असली सच!एक अलग आदेश अभी भी लागू है जो US पोस्टल सर्विस को ट्रंप के निर्देश के अनुसार बदलाव करने से रोकता है। लेकिन प्रशासन ने सोमवार देर रात उस आदेश को हटवाने के लिए कदम उठाए, और पोस्टल सर्विस ने पहले ही नए नियम जारी कर दिए हैं जो कानूनी रास्ता साफ होने पर मंगलवार से लागू हो जाएंगे। नए नियम के तहत मेल बैलेट वाले लिफाफों के लिए खास फॉर्मेटिंग की ज़रूरत है, जिससे कुछ इलाकों को उन्हें पूरी तरह से दोबारा डिज़ाइन करना पड़ सकता है। इसमें राज्यों के लिए एक इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम का इस्तेमाल करना भी ज़रूरी है ताकि पोस्टल सर्विस को पता चल सके कि कौन मेल से वोट कर रहा है। अगर राज्य ऐसा नहीं करते हैं, तो उनके मेल बैलेट नहीं भेजे जाएंगे। आलोचकों का कहना था कि कुछ ही दिनों में इतने बड़े बदलाव करना मुमकिन नहीं है। जस्टिस केतनजी ब्राउन जैक्सन ने अपनी असहमति जताते हुए कहा कि इस फ़ैसले से "आने वाले मध्यावधि चुनावों में बेवजह अफ़रा-तफ़री और अनिश्चितता पैदा होगी। सेंटर फ़ॉर इलेक्शन इनोवेशन एंड रिसर्च' के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर डेविड बेकर ने कहा कि बहुमत का फ़ैसला "मध्यावधि चुनावों से ठीक पहले पूरी तरह अफ़रा-तफ़री पैदा करने वाला लगता है" और राज्यों के लिए इतनी देर से इन नियमों को लागू करना नामुमकिन होगा।इसे भी पढ़ें: Gaza में सुरक्षाबल तैनाती पर Uganda और Burundi के सैन्य अफसरों ने Israel दौरा कियामौके पर मौजूद चुनाव अधिकारियों का कहना है कि समय-सीमा को देखते हुए इसमें किसी भी तरह के बदलाव की गुंजाइश बहुत कम है। कैलिफ़ोर्निया की योलो काउंटी के रजिस्ट्रार और राज्य के चुनाव अधिकारियों के संगठन के अध्यक्ष जेसी सलिनास ने कहा कि कैलिफ़ोर्निया में 11 दिनों में बैलेट भेजे जाने शुरू हो जाएंगे और उनकी काउंटी ने पहले ही अपने लिफ़ाफ़े छपवा लिए हैं। सलिनास ने कहा, "अगर आप समय-सीमा को देखें, तो स्थिति थोड़ी अव्यवस्थित है।" उन्होंने आगे कहा कि उन्हें ठीक-ठीक नहीं पता कि कौन से लिफ़ाफ़े नए नियमों के मुताबिक हैं। उन्होंने आखिरी समय में बड़े बदलाव करने के विचार को खारिज करते हुए कहा मुझे ऐसा करने की क्षमता नहीं दिखती।

PNSPNS
Aug 26, 2026 - 04:29
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Trump vs Democrats: मेल वोटिंग विवाद में Supreme Court का बड़ा फैसला,  प्रतिबंधों से जुड़े आदेश को लागू करने की मिली हरी झंडी
अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस आदेश को फिलहाल आगे बढ़ने की इजाज़त दे दी है, जिसमें मेल वोटिंग पर रोक लगाने की बात कही गई थी। इस फैसले ने देश के लगभग एक-तिहाई लोगों द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले वोटिंग के तरीके पर नई अनिश्चितता पैदा कर दी है, भले ही इससे नवंबर के मध्यावधि चुनावों (मिडटर्म्स) की वोटिंग प्रक्रिया में तुरंत कोई बदलाव न आए। कोर्ट ने यह नहीं कहा कि आदेश कानूनी है। सोमवार को बिना हस्ताक्षर वाले एक फैसले में कोर्ट ने कहा कि डेमोक्रेटिक-शासित राज्यों के लिए जून में ही इस कदम को चुनौती देना जल्दबाजी थी, जब उन्होंने बोस्टन में एक फेडरल जज को नवंबर के चुनाव के लिए इसे रोकने के लिए मना लिया था। इस फैसले ने कानूनी लड़ाई को एक तरह से फिर से शुरू कर दिया है, जबकि शुरुआती वोटिंग की तैयारियां पहले से ही चल रही हैं और नॉर्थ कैरोलिना में विदेशी और सैन्य वोटरों को 4 सितंबर को पहला बैलेट भेजा जाना है।

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एक अलग आदेश अभी भी लागू है जो US पोस्टल सर्विस को ट्रंप के निर्देश के अनुसार बदलाव करने से रोकता है। लेकिन प्रशासन ने सोमवार देर रात उस आदेश को हटवाने के लिए कदम उठाए, और पोस्टल सर्विस ने पहले ही नए नियम जारी कर दिए हैं जो कानूनी रास्ता साफ होने पर मंगलवार से लागू हो जाएंगे। नए नियम के तहत मेल बैलेट वाले लिफाफों के लिए खास फॉर्मेटिंग की ज़रूरत है, जिससे कुछ इलाकों को उन्हें पूरी तरह से दोबारा डिज़ाइन करना पड़ सकता है। इसमें राज्यों के लिए एक इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम का इस्तेमाल करना भी ज़रूरी है ताकि पोस्टल सर्विस को पता चल सके कि कौन मेल से वोट कर रहा है। अगर राज्य ऐसा नहीं करते हैं, तो उनके मेल बैलेट नहीं भेजे जाएंगे। आलोचकों का कहना था कि कुछ ही दिनों में इतने बड़े बदलाव करना मुमकिन नहीं है। जस्टिस केतनजी ब्राउन जैक्सन ने अपनी असहमति जताते हुए कहा कि इस फ़ैसले से "आने वाले मध्यावधि चुनावों में बेवजह अफ़रा-तफ़री और अनिश्चितता पैदा होगी। सेंटर फ़ॉर इलेक्शन इनोवेशन एंड रिसर्च' के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर डेविड बेकर ने कहा कि बहुमत का फ़ैसला "मध्यावधि चुनावों से ठीक पहले पूरी तरह अफ़रा-तफ़री पैदा करने वाला लगता है" और राज्यों के लिए इतनी देर से इन नियमों को लागू करना नामुमकिन होगा।

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मौके पर मौजूद चुनाव अधिकारियों का कहना है कि समय-सीमा को देखते हुए इसमें किसी भी तरह के बदलाव की गुंजाइश बहुत कम है। कैलिफ़ोर्निया की योलो काउंटी के रजिस्ट्रार और राज्य के चुनाव अधिकारियों के संगठन के अध्यक्ष जेसी सलिनास ने कहा कि कैलिफ़ोर्निया में 11 दिनों में बैलेट भेजे जाने शुरू हो जाएंगे और उनकी काउंटी ने पहले ही अपने लिफ़ाफ़े छपवा लिए हैं। सलिनास ने कहा, "अगर आप समय-सीमा को देखें, तो स्थिति थोड़ी अव्यवस्थित है।" उन्होंने आगे कहा कि उन्हें ठीक-ठीक नहीं पता कि कौन से लिफ़ाफ़े नए नियमों के मुताबिक हैं। उन्होंने आखिरी समय में बड़े बदलाव करने के विचार को खारिज करते हुए कहा मुझे ऐसा करने की क्षमता नहीं दिखती।

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