Tibet में China का खतरनाक खेल, भारत सीमा के पास बच्चों को दे रहा Military Training

'इंटरनेशनल कैंपेन फॉर तिब्बत' (ICT) ने चीनी अधिकारियों की कड़ी आलोचना की है। हाल ही में जारी तस्वीरों में तिब्बत के किंडरगार्टन के बच्चों को मिलिट्री-स्टाइल की गतिविधियों में हिस्सा लेते हुए देखा गया। चीनी कम्युनिस्ट पार्टी के 'यूनाइटेड फ्रंट वर्क डिपार्टमेंट' द्वारा जारी इन तस्वीरों में तिब्बत के छोटे बच्चों को कैमोफ्लाज यूनिफॉर्म पहने, चीनी झंडे के नीचे मार्च करते और नकली राइफलें लेकर नकली लड़ाई की ड्रिल (mock combat drills) में हिस्सा लेते हुए दिखाया गया है। ये तस्वीरें दक्षिणी तिब्बत के सोना (Tsona) शहर में ली गई थीं, जो भारत के करीब है। इन्हें 26 मई, 2026 को जारी एक रिपोर्ट में दिखाया गया था। चीनी सरकारी मीडिया के अनुसार, ये गतिविधियां "राष्ट्रीय रक्षा और जातीय एकता" से जुड़े शैक्षिक कार्यक्रमों के तौर पर आयोजित की गई थीं। इनका मकसद छोटे बच्चों में देशभक्ति और सीमा सुरक्षा के प्रति जागरूकता पैदा करना था।इसे भी पढ़ें: आखिर भारत की बढ़ती परमाणु ताकत से चौकन्ना क्यों होने लगा अंतरराष्ट्रीय जगत?ICT ने इस पहल की निंदा करते हुए कहा कि ये दृश्य बहुत परेशान करने वाले हैं और किंडरगार्टन की उम्र के बच्चों के लिए बिल्कुल भी ठीक नहीं हैं। संगठन का कहना है कि किसी भी बच्चे को पढ़ाई-लिखाई के माहौल में मिलिट्री जैसी ट्रेनिंग नहीं दी जानी चाहिए और न ही उन्हें लड़ाई-झगड़े या युद्ध जैसी गतिविधियों में शामिल होने के लिए बढ़ावा दिया जाना चाहिए। रिपोर्ट के मुताबिक, इस प्रोग्राम का मकसद कम्युनिस्ट पार्टी, चीनी सरकार और स्थानीय समुदायों के प्रति वफादारी बढ़ाना है, साथ ही सीमावर्ती इलाकों की सुरक्षा के लिए ज़िम्मेदारी की भावना पैदा करना है। चीनी अधिकारियों ने इन गतिविधियों को जातीय एकता को मज़बूत करने और कम उम्र से ही राष्ट्रीय रक्षा शिक्षा को बढ़ावा देने की बड़ी कोशिशों का हिस्सा बताया है।इसे भी पढ़ें: अगर भारत ने ये कर दिया! तो PoK में कूद पड़ेगा इजरायलहालांकि, ICT का कहना है कि यह मामला सिर्फ़ मिलिट्रीकरण तक ही सीमित नहीं है। संगठन ने कहा कि तिब्बती बच्चों को लगातार ऐसे वैचारिक अभियानों का हिस्सा बनाया जा रहा है जो सरकारी नैरेटिव को बढ़ावा देते हैं और साथ ही तिब्बती सांस्कृतिक पहचान और विरासत को कमज़ोर करते हैं। संगठन ने यह भी कहा कि ऐसी गतिविधियाँ खास तौर पर सोना (Tsona) जैसे संवेदनशील सीमावर्ती इलाकों में चिंता का विषय हैं, जहाँ पूरे क्षेत्र में भू-राजनीतिक तनाव बना हुआ है।इसे भी पढ़ें: बहुत बड़ा परीक्षण कर रहा भारत? अचानक कहां जा रहे 11000 लोगइन घटनाओं को तिब्बत में बीजिंग की नीतियों का एक स्पष्ट उदाहरण बताते हुए, ICT ने दुनिया भर की सरकारों, व्यवसायों और नागरिक समाज समूहों से अपील की कि वे चीनी अधिकारियों के सामने यह मुद्दा उठाएँ और तिब्बती बच्चों व संस्कृति की बेहतर सुरक्षा के लिए दबाव बनाएँ।

PNSPNS
Jun 13, 2026 - 13:18
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Tibet में China का खतरनाक खेल, भारत सीमा के पास बच्चों को दे रहा Military Training
'इंटरनेशनल कैंपेन फॉर तिब्बत' (ICT) ने चीनी अधिकारियों की कड़ी आलोचना की है। हाल ही में जारी तस्वीरों में तिब्बत के किंडरगार्टन के बच्चों को मिलिट्री-स्टाइल की गतिविधियों में हिस्सा लेते हुए देखा गया। चीनी कम्युनिस्ट पार्टी के 'यूनाइटेड फ्रंट वर्क डिपार्टमेंट' द्वारा जारी इन तस्वीरों में तिब्बत के छोटे बच्चों को कैमोफ्लाज यूनिफॉर्म पहने, चीनी झंडे के नीचे मार्च करते और नकली राइफलें लेकर नकली लड़ाई की ड्रिल (mock combat drills) में हिस्सा लेते हुए दिखाया गया है। ये तस्वीरें दक्षिणी तिब्बत के सोना (Tsona) शहर में ली गई थीं, जो भारत के करीब है। इन्हें 26 मई, 2026 को जारी एक रिपोर्ट में दिखाया गया था। चीनी सरकारी मीडिया के अनुसार, ये गतिविधियां "राष्ट्रीय रक्षा और जातीय एकता" से जुड़े शैक्षिक कार्यक्रमों के तौर पर आयोजित की गई थीं। इनका मकसद छोटे बच्चों में देशभक्ति और सीमा सुरक्षा के प्रति जागरूकता पैदा करना था।

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ICT ने इस पहल की निंदा करते हुए कहा कि ये दृश्य बहुत परेशान करने वाले हैं और किंडरगार्टन की उम्र के बच्चों के लिए बिल्कुल भी ठीक नहीं हैं। संगठन का कहना है कि किसी भी बच्चे को पढ़ाई-लिखाई के माहौल में मिलिट्री जैसी ट्रेनिंग नहीं दी जानी चाहिए और न ही उन्हें लड़ाई-झगड़े या युद्ध जैसी गतिविधियों में शामिल होने के लिए बढ़ावा दिया जाना चाहिए। रिपोर्ट के मुताबिक, इस प्रोग्राम का मकसद कम्युनिस्ट पार्टी, चीनी सरकार और स्थानीय समुदायों के प्रति वफादारी बढ़ाना है, साथ ही सीमावर्ती इलाकों की सुरक्षा के लिए ज़िम्मेदारी की भावना पैदा करना है। चीनी अधिकारियों ने इन गतिविधियों को जातीय एकता को मज़बूत करने और कम उम्र से ही राष्ट्रीय रक्षा शिक्षा को बढ़ावा देने की बड़ी कोशिशों का हिस्सा बताया है।

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हालांकि, ICT का कहना है कि यह मामला सिर्फ़ मिलिट्रीकरण तक ही सीमित नहीं है। संगठन ने कहा कि तिब्बती बच्चों को लगातार ऐसे वैचारिक अभियानों का हिस्सा बनाया जा रहा है जो सरकारी नैरेटिव को बढ़ावा देते हैं और साथ ही तिब्बती सांस्कृतिक पहचान और विरासत को कमज़ोर करते हैं। संगठन ने यह भी कहा कि ऐसी गतिविधियाँ खास तौर पर सोना (Tsona) जैसे संवेदनशील सीमावर्ती इलाकों में चिंता का विषय हैं, जहाँ पूरे क्षेत्र में भू-राजनीतिक तनाव बना हुआ है।

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इन घटनाओं को तिब्बत में बीजिंग की नीतियों का एक स्पष्ट उदाहरण बताते हुए, ICT ने दुनिया भर की सरकारों, व्यवसायों और नागरिक समाज समूहों से अपील की कि वे चीनी अधिकारियों के सामने यह मुद्दा उठाएँ और तिब्बती बच्चों व संस्कृति की बेहतर सुरक्षा के लिए दबाव बनाएँ।

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