Shimla Municipal Corporation में भारी हंगामा! महापौर ने 9 भाजपा पार्षदों को किया सस्पेंड, 'महिला मेयर' की मांग पर अड़ा विपक्ष

पहाड़ों की रानी शिमला का नगर निगम शुक्रवार को राजनीतिक अखाड़े में तब्दील हो गया। नगर निगम की मासिक आम बैठक (MC House Meet) के दौरान सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच तीखी झड़प हुई, जिसके बाद महापौर (Mayor) सुरेंद्र चौहान ने सदन की कार्यवाही में बाधा डालने के आरोप में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के 9 पार्षदों को निलंबित कर दिया। निलंबन की इस कार्रवाई के बाद सदन में घंटों तक नारेबाजी और गहमागहमी का माहौल बना रहा।इसे भी पढ़ें: DRDO की बड़ी कामयाबी: स्वदेशी एयर डिफेंस मिसाइल VSHORADS के तीन सफल परीक्षण, अब सेना में शामिल होने को तैयारभाजपा पार्षदों ने महापौर के कार्यकाल के विस्तार के मुद्दे पर बैठक में व्यवधान डाला। सदन से बाहर जाने का निर्देश दिए जाने के बाद उन्होंने नारेबाजी शुरू कर दी और दावा किया कि चूंकि महापौर का कार्यकाल समाप्त हो चुका है, इसलिए उन्हें निर्वाचित पार्षदों को निलंबित करने का अधिकार नहीं है। नारेबाजी कई मिनट तक जारी रही। भाजपा सदस्यों ने कहा कि जब तक नयी महापौर के रूप में किसी महिला का चुनाव नहीं हो जाता, वे निगम की कार्यवाही चलने नहीं देंगे। टकराव उस समय शुरू हुआ जब विपक्षी पार्षदों ने चौहान को सदन की अध्यक्षता करने से रोकते हुए कहा कि उन्हें बैठक संचालित करने का अधिकार नहीं है।इसे भी पढ़ें: केजरीवाल को बरी करने वाले जज Jitendra Pratap Singh कौन हैं? कांग्रेस और भाजपा नेताओं पर भी चला है चुके हैं 'न्यायिक हंटर'! इस पर कांग्रेस पार्षदों ने भी जवाबी नारेबाजी की और भाजपा पर जानबूझकर बैठक बाधित करने तथा जनविरोधी रवैया अपनाने का आरोप लगाया। बाद में भाजपा पार्षदों ने मीडिया से कहा कि महापौर का कार्यकाल बढ़ाने वाला अध्यादेश छह जनवरी 2026 को समाप्त हो गया है और राज्य सरकार की ओर से इस संबंध में कोई नयी अधिसूचना जारी नहीं की गई है। उन्होंने कहा, “हमारा महापौर से कोई व्यक्तिगत विरोध नहीं है लेकिन आरक्षण रोस्टर के अनुसार अब एक महिला को महापौर चुना जाना चाहिए।” पार्षदों ने आरोप लगाया कि इस मुद्दे पर कांग्रेस का “महिला-विरोधी रुख” उजागर हो गया है।

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Feb 28, 2026 - 10:28
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Shimla Municipal Corporation में भारी हंगामा! महापौर ने 9 भाजपा पार्षदों को किया सस्पेंड, 'महिला मेयर' की मांग पर अड़ा विपक्ष

पहाड़ों की रानी शिमला का नगर निगम शुक्रवार को राजनीतिक अखाड़े में तब्दील हो गया। नगर निगम की मासिक आम बैठक (MC House Meet) के दौरान सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच तीखी झड़प हुई, जिसके बाद महापौर (Mayor) सुरेंद्र चौहान ने सदन की कार्यवाही में बाधा डालने के आरोप में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के 9 पार्षदों को निलंबित कर दिया। निलंबन की इस कार्रवाई के बाद सदन में घंटों तक नारेबाजी और गहमागहमी का माहौल बना रहा।

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भाजपा पार्षदों ने महापौर के कार्यकाल के विस्तार के मुद्दे पर बैठक में व्यवधान डाला। सदन से बाहर जाने का निर्देश दिए जाने के बाद उन्होंने नारेबाजी शुरू कर दी और दावा किया कि चूंकि महापौर का कार्यकाल समाप्त हो चुका है, इसलिए उन्हें निर्वाचित पार्षदों को निलंबित करने का अधिकार नहीं है। नारेबाजी कई मिनट तक जारी रही। भाजपा सदस्यों ने कहा कि जब तक नयी महापौर के रूप में किसी महिला का चुनाव नहीं हो जाता, वे निगम की कार्यवाही चलने नहीं देंगे। टकराव उस समय शुरू हुआ जब विपक्षी पार्षदों ने चौहान को सदन की अध्यक्षता करने से रोकते हुए कहा कि उन्हें बैठक संचालित करने का अधिकार नहीं है।

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इस पर कांग्रेस पार्षदों ने भी जवाबी नारेबाजी की और भाजपा पर जानबूझकर बैठक बाधित करने तथा जनविरोधी रवैया अपनाने का आरोप लगाया। बाद में भाजपा पार्षदों ने मीडिया से कहा कि महापौर का कार्यकाल बढ़ाने वाला अध्यादेश छह जनवरी 2026 को समाप्त हो गया है और राज्य सरकार की ओर से इस संबंध में कोई नयी अधिसूचना जारी नहीं की गई है। उन्होंने कहा, “हमारा महापौर से कोई व्यक्तिगत विरोध नहीं है लेकिन आरक्षण रोस्टर के अनुसार अब एक महिला को महापौर चुना जाना चाहिए।” पार्षदों ने आरोप लगाया कि इस मुद्दे पर कांग्रेस का “महिला-विरोधी रुख” उजागर हो गया है।

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