RBI Monetary Policy: रेपो रेट 5.25% पर बरकरार, GDP Growth का अनुमान बढ़ाकर किया 6.7 प्रतिशत

 पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने बुधवार को उम्मीद के मुताबिक प्रमुख नीतिगत दर रेपो को इस साल लगातार चौथी बार 5.25 प्रतिशत पर कायम रखा। केंद्रीय बैंक ईरान युद्ध के कारण ऊर्जा की बढ़ी लागत के साथ भविष्य में महंगाई के रुख को लेकर अधिक स्पष्टता का इंतजार कर रहा है। चुनातीपूर्ण स्थिति के बावजूद आरबीआई ने चालू वित्त वर्ष के लिए जीडीपी (सकल घरेलू उत्पाद) वृद्धि के अनुमान को 6.6 प्रतिशत से बढ़ाकर 6.7 प्रतिशत कर दिया है। वहीं मुद्रास्फीति के अनुमान को 5.1 प्रतिशत से घटाकर 5.0 प्रतिशत किया है। आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा की अध्यक्षता वाली छह सदस्यीय मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) ने आम सहमति से नीतिगत रेपो दर को 5.25 प्रतिशत पर यथावत रखने का फैसला किया। इसके साथ आरबीआई ने ‘तटस्थ’ रुख को भी बरकरार रखा है। इसका मतलब है कि केंद्रीय बैंक आर्थिक स्थिति के हिसाब से नीतिगत दर में समायोजन को लेकर लचीला बना रहेगा। इस फैसले के साथ भारत ने इंडोनेशिया और फिलिपीन समेत एशिया के कई अन्य केंद्रीय बैंकों से अलग राह अपनाई है। इन देशों के केंद्रीय बैंकों ने ऊर्जा कीमतों में बढ़ोतरी और युद्ध के कारण मुद्रा बाजार में बढ़ी अस्थिरता को देखते हुए मौद्रिक नीति को सख्त किया है। इसके विपरीत, आरबीआई ने रुपये को समर्थन देने और विदेशी पूंजी आकर्षित करने के लिए पिछली मौद्रिक नीति समीक्षा में घोषित उपायों पर ही भरोसा बनाए रखा है। मल्होत्रा ने मौद्रिक नीति के फैसले की घोषणा करते हुए कहा कि निकट अवधि में खुदरा महंगाई बढ़ने की आशंका है। वित्त वर्ष 2026-27 की तीसरी तिमाही में महंगाई अपने उच्चतम स्तर पर पहुंच सकती है, जिसका मुख्य कारण खाद्य और ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी होगी। इसके बाद महंगाई में नरमी आने की उम्मीद है। उन्होंने कहा कि महंगाई का दबाव अभी व्यापक स्तर पर नहीं फैला है। कीमती धातुओं को छोड़कर कोर यानी मुख्य महंगाई (खाद्य और ईंधन की महंगाई को छोड़कर) अब भी नियंत्रित स्तर पर बनी हुई है। मल्होत्रा ने कहा, ‘‘मौद्रिक नीति को सख्त करने की तत्काल जरूरत नहीं है। आरबीआई महंगाई को अपने निर्धारित लक्ष्य के अनुरूप लाने के लिए प्रतिबद्ध है और महंगाई के भविष्य के रुख को लेकर अधिक स्पष्टता आने का इंतजार कर रहा है।’’ आरबीआई ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) आधारित मुद्रास्फीति का अनुमान 5.0 प्रतिशत रखा है, जबकि जून में यह अनुमान 5.1 प्रतिशत था। वहीं, खाद्य और ईंधन को छोड़कर मुख्य मुद्रास्फीति का अनुमान 4.7 प्रतिशत से घटाकर 4.3 प्रतिशत कर दिया गया है। केंद्रीय बैंक ने चालू वित्त वर्ष के लिए आर्थिक वृद्धि दर के अनुमान को बढ़ाकर 6.7 प्रतिशत कर दिया है। जून में इसके 6.6 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया गया था। आरबीआई ने कहा कि वैश्विक अनिश्चितताओं, पश्चिम एशिया संघर्ष और व्यापार तनाव के बावजूद घरेलू अर्थव्यवस्था मजबूत बनी हुई है। इसे घरेलू मांग, विनिर्माण और सेवा क्षेत्र की गतिविधियों तथा मजबूत निर्यात से समर्थन मिल रहा है। हालांकि, आरबीआई आर्थिक परिदृश्य को लेकर सतर्क भी है। दक्षिण-पश्चिम मानसून, अल नीनो की स्थिति, भू-राजनीतिक घटनाक्रम और वैश्विक व्यापार नीतियों से जुड़े जोखिमों के कारण भविष्य का आर्थिक परिदृश्य अनिश्चित बना हुआ है। आरबीआई ने कहा है कि महत्वपूर्ण आंकड़ें (पीएमआई, बिजली खपत, ई-वे बिल आदि) मिश्रित तस्वीर पेश कर रहे हैं। जहां विनिर्माण गतिविधियों में सुस्ती देखी जा रही है, वहीं बैंक ऋण वृद्धि करीब 18 प्रतिशत के स्तर पर बनी हुई है। इसके बावजूद घरेलू मांग मजबूत बनी हुई है। मल्होत्रा ने आगाह किया कि कमजोर मानसून, व्यापार को लेकर अनिश्चितता और वैश्विक स्तर पर जारी तनाव आर्थिक वृद्धि के परिदृश्य के लिए प्रमुख जोखिम बने हुए हैं। उन्होंने कहा, ‘‘पश्चिम एशिया संघर्ष के तेजी से बदलते घटनाक्रमों के कारण वैश्विक आर्थिक हालात और बाजार धारणा प्रभावित हो रही है। इन घटनाओं का असर भारत की आर्थिक वृद्धि और महंगाई के अनुमान पर पड़ा है, लेकिन भारतीय अर्थव्यवस्था की वृहद आर्थिक बुनियाद ऐसे वैश्विक झटकों से निपटने में मदद कर रही है।’’ मल्होत्रा ने कहा, ‘‘मौजूदा स्थिति भारत की अर्थव्यवस्था को भविष्य के झटकों से निपटने के लिए और अधिक सक्षम बनाने वाले कदमों को तेज करने का अवसर प्रदान करती है। आरबीआई आर्थिक मजबूती बढ़ाने वाली नीतियों को आगे भी लागू करता रहेगा। उन्होंने कहा, ‘‘चाहे सतत आर्थिक वृद्धि को बढ़ावा देना हो, उपभोक्ता संरक्षण को मजबूत करना हो, कीमतों की स्थिरता बनाए रखना हो या वित्तीय प्रणाली और मुद्रा की स्थिरता सुनिश्चित करनी हो, केंद्रीय बैंक अपने उद्देश्यों को पूरा करने के लिए हरसंभव कदम उठाएगा।’’ आरबीआई ने कहा है कि बैंकों में अधिशेष नकदी बनी हुई है और वह पर्याप्त तरलता सुनिश्चित करने के लिए कदम उठाना जारी रखेगा। विदेशी क्षेत्र की स्थिति पर मल्होत्रा ने कहा कि वैश्विक अस्थिरता के बावजूद भारत का चालू खाता मजबूत बना हुआ है। इसे मजबूत सेवा निर्यात और विदेशों में काम करने वाले भारतीयों द्वारा भेजे जाने वाले पैसे से समर्थन मिल रहा है। उन्होंने कहा कि प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) का प्रवाह मजबूत बना हुआ है, जबकि भारतीय बाजारों में पूंजी आकर्षित करने के लिए उठाए गए कदमों के बाद जून और जुलाई में विदेशी पोर्टफोलियो निवेश (एफपीआई) प्रवाह सकारात्मक हो गया है। देश का विदेशी मुद्रा भंडार 31 जुलाई तक 692.9 अरब डॉलर रहा। आरबीआई ने सहकारी बैंकिंग क्षेत्र के लिए भी अतिरिक्त उपायों की घोषणा की है। इनमें शहरी सहकारी बैंकों (यूसीबी) के लाइसेंस दोबारा शुरू करने के लिए मसौदा दिशानिर्देश और ग्रामीण सहकारी बैंकों के लिए ऋण निगरानी व्यवस्था (सीएमए) से जुड़े संशोधित मसौदा निर्देश शामिल हैं। इसके अलावा, ऋण पर ब्याज दरों में पारदर्शिता बढ़ाने और उपभोक्ता संरक्षण को मजबूत करने के लिए आरबीआ

PNSPNS
Aug 5, 2026 - 15:42
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RBI Monetary Policy: रेपो रेट 5.25% पर बरकरार, GDP Growth का अनुमान बढ़ाकर किया 6.7 प्रतिशत

 पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने बुधवार को उम्मीद के मुताबिक प्रमुख नीतिगत दर रेपो को इस साल लगातार चौथी बार 5.25 प्रतिशत पर कायम रखा। केंद्रीय बैंक ईरान युद्ध के कारण ऊर्जा की बढ़ी लागत के साथ भविष्य में महंगाई के रुख को लेकर अधिक स्पष्टता का इंतजार कर रहा है। चुनातीपूर्ण स्थिति के बावजूद आरबीआई ने चालू वित्त वर्ष के लिए जीडीपी (सकल घरेलू उत्पाद) वृद्धि के अनुमान को 6.6 प्रतिशत से बढ़ाकर 6.7 प्रतिशत कर दिया है। वहीं मुद्रास्फीति के अनुमान को 5.1 प्रतिशत से घटाकर 5.0 प्रतिशत किया है। आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा की अध्यक्षता वाली छह सदस्यीय मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) ने आम सहमति से नीतिगत रेपो दर को 5.25 प्रतिशत पर यथावत रखने का फैसला किया।

इसके साथ आरबीआई ने ‘तटस्थ’ रुख को भी बरकरार रखा है। इसका मतलब है कि केंद्रीय बैंक आर्थिक स्थिति के हिसाब से नीतिगत दर में समायोजन को लेकर लचीला बना रहेगा। इस फैसले के साथ भारत ने इंडोनेशिया और फिलिपीन समेत एशिया के कई अन्य केंद्रीय बैंकों से अलग राह अपनाई है। इन देशों के केंद्रीय बैंकों ने ऊर्जा कीमतों में बढ़ोतरी और युद्ध के कारण मुद्रा बाजार में बढ़ी अस्थिरता को देखते हुए मौद्रिक नीति को सख्त किया है। इसके विपरीत, आरबीआई ने रुपये को समर्थन देने और विदेशी पूंजी आकर्षित करने के लिए पिछली मौद्रिक नीति समीक्षा में घोषित उपायों पर ही भरोसा बनाए रखा है।

मल्होत्रा ने मौद्रिक नीति के फैसले की घोषणा करते हुए कहा कि निकट अवधि में खुदरा महंगाई बढ़ने की आशंका है। वित्त वर्ष 2026-27 की तीसरी तिमाही में महंगाई अपने उच्चतम स्तर पर पहुंच सकती है, जिसका मुख्य कारण खाद्य और ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी होगी। इसके बाद महंगाई में नरमी आने की उम्मीद है। उन्होंने कहा कि महंगाई का दबाव अभी व्यापक स्तर पर नहीं फैला है। कीमती धातुओं को छोड़कर कोर यानी मुख्य महंगाई (खाद्य और ईंधन की महंगाई को छोड़कर) अब भी नियंत्रित स्तर पर बनी हुई है। मल्होत्रा ने कहा, ‘‘मौद्रिक नीति को सख्त करने की तत्काल जरूरत नहीं है। आरबीआई महंगाई को अपने निर्धारित लक्ष्य के अनुरूप लाने के लिए प्रतिबद्ध है और महंगाई के भविष्य के रुख को लेकर अधिक स्पष्टता आने का इंतजार कर रहा है।’’ आरबीआई ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) आधारित मुद्रास्फीति का अनुमान 5.0 प्रतिशत रखा है, जबकि जून में यह अनुमान 5.1 प्रतिशत था। वहीं, खाद्य और ईंधन को छोड़कर मुख्य मुद्रास्फीति का अनुमान 4.7 प्रतिशत से घटाकर 4.3 प्रतिशत कर दिया गया है। केंद्रीय बैंक ने चालू वित्त वर्ष के लिए आर्थिक वृद्धि दर के अनुमान को बढ़ाकर 6.7 प्रतिशत कर दिया है। जून में इसके 6.6 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया गया था। आरबीआई ने कहा कि वैश्विक अनिश्चितताओं, पश्चिम एशिया संघर्ष और व्यापार तनाव के बावजूद घरेलू अर्थव्यवस्था मजबूत बनी हुई है।

इसे घरेलू मांग, विनिर्माण और सेवा क्षेत्र की गतिविधियों तथा मजबूत निर्यात से समर्थन मिल रहा है। हालांकि, आरबीआई आर्थिक परिदृश्य को लेकर सतर्क भी है। दक्षिण-पश्चिम मानसून, अल नीनो की स्थिति, भू-राजनीतिक घटनाक्रम और वैश्विक व्यापार नीतियों से जुड़े जोखिमों के कारण भविष्य का आर्थिक परिदृश्य अनिश्चित बना हुआ है। आरबीआई ने कहा है कि महत्वपूर्ण आंकड़ें (पीएमआई, बिजली खपत, ई-वे बिल आदि) मिश्रित तस्वीर पेश कर रहे हैं। जहां विनिर्माण गतिविधियों में सुस्ती देखी जा रही है, वहीं बैंक ऋण वृद्धि करीब 18 प्रतिशत के स्तर पर बनी हुई है।

इसके बावजूद घरेलू मांग मजबूत बनी हुई है। मल्होत्रा ने आगाह किया कि कमजोर मानसून, व्यापार को लेकर अनिश्चितता और वैश्विक स्तर पर जारी तनाव आर्थिक वृद्धि के परिदृश्य के लिए प्रमुख जोखिम बने हुए हैं। उन्होंने कहा, ‘‘पश्चिम एशिया संघर्ष के तेजी से बदलते घटनाक्रमों के कारण वैश्विक आर्थिक हालात और बाजार धारणा प्रभावित हो रही है। इन घटनाओं का असर भारत की आर्थिक वृद्धि और महंगाई के अनुमान पर पड़ा है, लेकिन भारतीय अर्थव्यवस्था की वृहद आर्थिक बुनियाद ऐसे वैश्विक झटकों से निपटने में मदद कर रही है।’’

मल्होत्रा ने कहा, ‘‘मौजूदा स्थिति भारत की अर्थव्यवस्था को भविष्य के झटकों से निपटने के लिए और अधिक सक्षम बनाने वाले कदमों को तेज करने का अवसर प्रदान करती है। आरबीआई आर्थिक मजबूती बढ़ाने वाली नीतियों को आगे भी लागू करता रहेगा। उन्होंने कहा, ‘‘चाहे सतत आर्थिक वृद्धि को बढ़ावा देना हो, उपभोक्ता संरक्षण को मजबूत करना हो, कीमतों की स्थिरता बनाए रखना हो या वित्तीय प्रणाली और मुद्रा की स्थिरता सुनिश्चित करनी हो, केंद्रीय बैंक अपने उद्देश्यों को पूरा करने के लिए हरसंभव कदम उठाएगा।’’ आरबीआई ने कहा है कि बैंकों में अधिशेष नकदी बनी हुई है और वह पर्याप्त तरलता सुनिश्चित करने के लिए कदम उठाना जारी रखेगा।

विदेशी क्षेत्र की स्थिति पर मल्होत्रा ने कहा कि वैश्विक अस्थिरता के बावजूद भारत का चालू खाता मजबूत बना हुआ है। इसे मजबूत सेवा निर्यात और विदेशों में काम करने वाले भारतीयों द्वारा भेजे जाने वाले पैसे से समर्थन मिल रहा है। उन्होंने कहा कि प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) का प्रवाह मजबूत बना हुआ है, जबकि भारतीय बाजारों में पूंजी आकर्षित करने के लिए उठाए गए कदमों के बाद जून और जुलाई में विदेशी पोर्टफोलियो निवेश (एफपीआई) प्रवाह सकारात्मक हो गया है। देश का विदेशी मुद्रा भंडार 31 जुलाई तक 692.9 अरब डॉलर रहा। आरबीआई ने सहकारी बैंकिंग क्षेत्र के लिए भी अतिरिक्त उपायों की घोषणा की है।

इनमें शहरी सहकारी बैंकों (यूसीबी) के लाइसेंस दोबारा शुरू करने के लिए मसौदा दिशानिर्देश और ग्रामीण सहकारी बैंकों के लिए ऋण निगरानी व्यवस्था (सीएमए) से जुड़े संशोधित मसौदा निर्देश शामिल हैं। इसके अलावा, ऋण पर ब्याज दरों में पारदर्शिता बढ़ाने और उपभोक्ता संरक्षण को मजबूत करने के लिए आरबीआई ने बैंकों और अन्य वित्तीय संस्थानों पर लागू ब्याज दर संबंधी नियामकीय रूपरेखा में एकरूपता लाने और उसे मानकीकृत करने का प्रस्ताव रखा है।

मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) के फैसले पर कोटक महिंद्रा बैंक की मुख्य अर्थशास्त्री उपासना भारद्वाज ने कहा, ‘‘आरबीआई का नीतिगत दर को स्थिर रखने का फैसला उम्मीदों के अनुरूप है। नीति का रुख संतुलित है, जिसमें जोखिमों को ध्यान में रखते हुए भविष्य के फैसलों को आंकड़ों पर आधारित रखने का संकेत दिया गया है।’’ भारद्वाज के अनुसार, वित्त वर्ष 2027-28 की पहली तिमाही में महंगाई के पांच प्रतिशत से ऊपर रहने की आशंका के बीच वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी छमाही में ब्याज दर में 0.5 प्रतिशत की बढ़ोतरी की गुंजाइश बनी हुई है। मौद्रिक नीति समिति की अगली बैठक पांच से सात अक्टूबर को होगी।

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