Ramadan 2026 Special । सहरी से इफ्तार तक, जानें रोजे की सही दुआ और बरकत पाने के रूल्स

रमजान का पवित्र महीना इबादत और बरकत का समय है। इस महीने में मुस्लिम समुदाय के लोग रोजा रखते हैं। रोजा रखने से पहले और बाद में दुआ रखी जाती है, जिसके अपने खास नियम होते हैं और इन नियमों का पालन करना हर मुसलमान के लिए जरूरी है। रमजान में दुआ करने का फल कई गुना बढ़ जाता है, जिससे अल्लाह और बंदे का रिश्ता और भी गहरा हो जाता है।रोजा रखने की दुआ (सहरी की दुआ)रोजा रखने के लिए 'नीयत' यानी मन में पक्का इरादा करना सबसे जरूरी है। सहरी खाने के बाद दिल से अल्लाह को याद करते हुए रोजा रखने का इरादा किया जाता है।दुआ: 'व बिसौमि गदिन नवैतु मिन शाह्रि रमजान'अर्थ: 'मैं अल्लाह के लिए रमजान के रोजे की नीयत करता/करती हूं।' इसे भी पढ़ें: Ramadan 2026 Shopping Tips । इफ्तार पार्टी में दिखना है सबसे खास? Delhi की इन Markets में करें Budget Shoppingरोजा खोलने की दुआ (इफ्तार की दुआ)दिन भर रोजा रखने के बाद शाम को इफ्तार के समय रोजा खोला जाता है। खजूर या पानी से रोजा खोलने से पहले दुआ पढ़ना सुन्नत है। माना जाता है कि इस दुआ को पढ़ने से खाने में बरकत आती है और सवाब मिलता है।दुआ: 'अल्लाहुम्मा इन्नी लका सुमतु, व-बिका आमन्तु, व-अलयका तवक्कालतू, व अला रिजकिका अफतरतू'अर्थ: 'हे अल्लाह! मैंने तेरे लिए रोजा रखा, तुझ पर ईमान लाया, तुझ पर भरोसा किया और तेरे दिए हुए रिज्क (खाने) से रोजा खोला।'नीयत/दुआ का सही तरीकारोजा खोलने की नीयत ठीक इफ्तार के समय ही करनी चाहिए। अगर कोई इफ्तार से बहुत पहले ही रोजा तोड़ने का मन बना ले, तो रोजा अमान्य हो सकता है। इसलिए सही समय पर दुआ पढ़कर ही रोजा खोलना चाहिए ताकि अल्लाह की रहमत बनी रहे। इसे भी पढ़ें: Iftar Party की शान बढ़ाएगी यह शाही खीर, मिनटों में बनाएं ये Delicious खजूर Dessertतरावीह की नमाजरमजान में पांच वक्त की फर्ज नमाज के साथ-साथ 'तरावीह' की नमाज का भी बहुत महत्व है। यह नमाज रात के समय पढ़ी जाती है जिसमें पूरा कुरान सुना या पढ़ा जाता है। यह रातें इबादत में बिताने का सबसे अच्छा जरिया हैं। रमजान का महीना नेक काम करने और अल्लाह की राह पर चलने का संदेश देता है। रोजा, नमाज और दुआओं के जरिए इंसान खुद को पाक-साफ बनाता है और ढेरों खुशियां और बरकतें हासिल करता है।

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Feb 24, 2026 - 10:27
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Ramadan 2026 Special । सहरी से इफ्तार तक, जानें रोजे की सही दुआ और बरकत पाने के रूल्स
रमजान का पवित्र महीना इबादत और बरकत का समय है। इस महीने में मुस्लिम समुदाय के लोग रोजा रखते हैं। रोजा रखने से पहले और बाद में दुआ रखी जाती है, जिसके अपने खास नियम होते हैं और इन नियमों का पालन करना हर मुसलमान के लिए जरूरी है। रमजान में दुआ करने का फल कई गुना बढ़ जाता है, जिससे अल्लाह और बंदे का रिश्ता और भी गहरा हो जाता है।

रोजा रखने की दुआ (सहरी की दुआ)

रोजा रखने के लिए 'नीयत' यानी मन में पक्का इरादा करना सबसे जरूरी है। सहरी खाने के बाद दिल से अल्लाह को याद करते हुए रोजा रखने का इरादा किया जाता है।
दुआ: 'व बिसौमि गदिन नवैतु मिन शाह्रि रमजान'
अर्थ: 'मैं अल्लाह के लिए रमजान के रोजे की नीयत करता/करती हूं।'
 

इसे भी पढ़ें: Ramadan 2026 Shopping Tips । इफ्तार पार्टी में दिखना है सबसे खास? Delhi की इन Markets में करें Budget Shopping


रोजा खोलने की दुआ (इफ्तार की दुआ)

दिन भर रोजा रखने के बाद शाम को इफ्तार के समय रोजा खोला जाता है। खजूर या पानी से रोजा खोलने से पहले दुआ पढ़ना सुन्नत है। माना जाता है कि इस दुआ को पढ़ने से खाने में बरकत आती है और सवाब मिलता है।
दुआ: 'अल्लाहुम्मा इन्नी लका सुमतु, व-बिका आमन्तु, व-अलयका तवक्कालतू, व अला रिजकिका अफतरतू'
अर्थ: 'हे अल्लाह! मैंने तेरे लिए रोजा रखा, तुझ पर ईमान लाया, तुझ पर भरोसा किया और तेरे दिए हुए रिज्क (खाने) से रोजा खोला।'

नीयत/दुआ का सही तरीका

रोजा खोलने की नीयत ठीक इफ्तार के समय ही करनी चाहिए। अगर कोई इफ्तार से बहुत पहले ही रोजा तोड़ने का मन बना ले, तो रोजा अमान्य हो सकता है। इसलिए सही समय पर दुआ पढ़कर ही रोजा खोलना चाहिए ताकि अल्लाह की रहमत बनी रहे।
 

इसे भी पढ़ें: Iftar Party की शान बढ़ाएगी यह शाही खीर, मिनटों में बनाएं ये Delicious खजूर Dessert


तरावीह की नमाज

रमजान में पांच वक्त की फर्ज नमाज के साथ-साथ 'तरावीह' की नमाज का भी बहुत महत्व है। यह नमाज रात के समय पढ़ी जाती है जिसमें पूरा कुरान सुना या पढ़ा जाता है। यह रातें इबादत में बिताने का सबसे अच्छा जरिया हैं। रमजान का महीना नेक काम करने और अल्लाह की राह पर चलने का संदेश देता है। रोजा, नमाज और दुआओं के जरिए इंसान खुद को पाक-साफ बनाता है और ढेरों खुशियां और बरकतें हासिल करता है।

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