Prime Minister Modi ने Mannathu Padmanabhan को उनकी जयंती पर श्रद्धांजलि दी

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शुक्रवार को ‘नायर सेवा समाज’ के संस्थापक मन्नथु पद्मनाभन की जयंती पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की और उन्हें एक दूरदर्शी व्यक्ति बताया जिनका विश्वास था कि सच्ची प्रगति गरिमा, समानता और सामाजिक सुधार में निहित है। प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ‘‘मन्नथु पद्मनाभन की जयंती पर हम श्रद्धा के साथ एक ऐसे महान व्यक्तित्व को याद करते हैं, जिन्होंने अपना जीवन समाज सेवा के लिए समर्पित कर दिया।’’ मोदी ने कहा, ‘‘ वह एक दूरदर्शी व्यक्ति थे, जिनका विश्वास था कि सच्ची प्रगति गरिमा, समानता और सामाजिक सुधार में निहित है। स्वास्थ्य, शिक्षा और महिला सशक्तीकरण जैसे क्षेत्रों में उनके प्रयास अत्यंत प्रेरणादायक हैं।’’ प्रधानमंत्री ने कहा, ‘‘ उनके आदर्श हमें एक न्यायपूर्ण, करुणामय और सामंजस्यपूर्ण समाज की दिशा में निरंतर मार्गदर्शन देते हैं।’’ मन्नथु पद्मनाभन का जन्म 1878 में हुआ था और उन्होंने अपने करियर की शुरुआत एक स्कूल शिक्षक के रूप में की और बाद में वकालत के पेशे से जुड़े। नायर समुदाय के उत्थान और सुधार की आवश्यकता को समझते हुए उन्होंने 1914 में ‘नायर सेवा समाज’ की स्थापना की।

PNSPNS
Jan 2, 2026 - 11:32
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Prime Minister Modi ने Mannathu Padmanabhan को उनकी जयंती पर श्रद्धांजलि दी

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शुक्रवार को ‘नायर सेवा समाज’ के संस्थापक मन्नथु पद्मनाभन की जयंती पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की और उन्हें एक दूरदर्शी व्यक्ति बताया जिनका विश्वास था कि सच्ची प्रगति गरिमा, समानता और सामाजिक सुधार में निहित है।

प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ‘‘मन्नथु पद्मनाभन की जयंती पर हम श्रद्धा के साथ एक ऐसे महान व्यक्तित्व को याद करते हैं, जिन्होंने अपना जीवन समाज सेवा के लिए समर्पित कर दिया।’’

मोदी ने कहा, ‘‘ वह एक दूरदर्शी व्यक्ति थे, जिनका विश्वास था कि सच्ची प्रगति गरिमा, समानता और सामाजिक सुधार में निहित है। स्वास्थ्य, शिक्षा और महिला सशक्तीकरण जैसे क्षेत्रों में उनके प्रयास अत्यंत प्रेरणादायक हैं।’’

प्रधानमंत्री ने कहा, ‘‘ उनके आदर्श हमें एक न्यायपूर्ण, करुणामय और सामंजस्यपूर्ण समाज की दिशा में निरंतर मार्गदर्शन देते हैं।’’ मन्नथु पद्मनाभन का जन्म 1878 में हुआ था और उन्होंने अपने करियर की शुरुआत एक स्कूल शिक्षक के रूप में की और बाद में वकालत के पेशे से जुड़े। नायर समुदाय के उत्थान और सुधार की आवश्यकता को समझते हुए उन्होंने 1914 में ‘नायर सेवा समाज’ की स्थापना की।

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