Pahalgam Terror Attack को तीन महीने हो गये, 26 पर्यटकों की निर्ममता से हत्या करने वाले आतंकवादी अब भी पकड़ में नहीं आ सके हैं

पहलगाम आतंकी हमले के तीन महीने बाद भी, इसे अंजाम देने वाले आतंकवादियों के फरार रहने के कारण क्षेत्र में सुरक्षा चूक को लेकर चिंता जताई जा रही है और जवाबदेही तय करने की मांग बढ़ रही है। हम आपको बता दें कि एनआईए ने 22 अप्रैल को हुई इस घटना के सिलसिले में अब तक दो गिरफ्तारियां की हैं। माना जा रहा है कि गिरफ्तार किये गए लोगों ने ही हमलावरों को साजोसामान उपलब्ध कराए थे, जबकि इस हमले के लिए जिम्मेदार आतंकवादी अब भी सुरक्षा एजेंसियों की जद में नहीं आए हैं। एजेंसी ने 22 जून को दो लोगों- पहलगाम के बटकोट निवासी परवेज अहमद जोथर और पहलगाम के हिल पार्क निवासी बशीर अहमद जोथर को गिरफ्तार किया था। एनआईए ने कहा था कि गिरफ्तार आरोपी वर्तमान में हिरासत में हैं। उन्होंने हमले में शामिल तीन हथियारबंद आतंकवादियों की पहचान का खुलासा किया है और यह भी पुष्टि की है कि वे पाकिस्तानी नागरिक थे, जो प्रतिबंधित ‘द रेजिस्टेंस फ्रंट’ (टीआरएफ) से जुड़े हुए हैं। हम आपको बता दें कि यह संगठन पाकिस्तान से संचालित आतंकवादी संगठन लश्कर-ए-तैयबा (एलईटी) से संबद्ध है। एनआईए की जांच के अनुसार, परवेज और बशीर ने हमले से पहले जानबूझकर तीन हथियारबंद आतंकवादियों को हिल पार्क स्थित एक ढोक (झोपड़ी) में पनाह दी थी। एजेंसी ने कहा कि दोनों लोगों ने आतंकवादियों को भोजन, आश्रय और साजो-सामान उपलब्ध कराया था, जिन्होंने घटना वाले दिन धार्मिक पहचान के आधार पर पर्यटकों की जान ली थी।उधर, अगले महीने अपना पांच साल का कार्यकाल पूरा करने जा रहे उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने इस घटना को ‘‘सुरक्षा विफलता’’ माना है। उनकी इस स्वीकारोक्ति की मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने सराहना की, लेकिन जवाबदेही की भी मांग की है। उधर, अधिकारियों का कहना है कि खुफिया एजेंसियों को आतंकी हमले होने की संभावना के बारे में सतर्क किया गया था, लेकिन इन सूचनाओं का उपयोग हमले वाले स्थान से लगभग 90 किलोमीटर दूर किसी अन्य स्थान पर किया गया, जिसके परिणामस्वरूप सुरक्षा में बड़ी चूक हुई। सुरक्षा अधिकारियों ने बताया कि आतंकवादी, जो ‘‘फाल्कन स्क्वाड’’ के नाम से जानी जाने वाली टीआरएफ इकाई के सदस्य हैं, सैन्य वर्दी में पहलगाम क्षेत्र में घुसे थे तथा उनके पास सेना जैसे हथियार और कैमरा-युक्त हेलमेट सहित अन्य संचार उपकरण थे। उन्होंने बताया कि हमले की साजिश कथित तौर पर सैफुल्लाह कसूरी उर्फ खालिद ने बनाई थी, जो लश्कर का शीर्ष कमांडर और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर घोषित आतंकवादी हाफिज सईद का निजी सहायक है।इसे भी पढ़ें: जम्मू-कश्मीर में पुलिसकर्मी के साथ हिरासत में हैवानियत पर सुप्रीम कोर्ट ने अपनाया सख्त रुख, CBI जांच और 50 लाख मुआवजे का आदेशसुरक्षा अधिकारियों ने संकेत दिया कि हमलावरों का ऑनलाइन पता कराची और मुजफ्फराबाद में सीमा के पास स्थित सुरक्षित ठिकानों से लगाया गया था, जिससे पता चलता है कि हमलावर पाकिस्तान में लश्कर-ए-तैयबा नेटवर्क से जुड़े हुए थे। उन्होंने कहा कि ‘‘फाल्कन स्क्वाड’’ के तहत प्रशिक्षित आतंकवादियों का इस्तेमाल करना विकेन्द्रीकृत और आसानी से पता न चल सकने वाले गुर्गों पर बढ़ती निर्भरता को दर्शाता है, जिससे भविष्य में जम्मू कश्मीर में क्षेत्रीय सुरक्षा और लोगों की जान को खतरा पैदा हो सकता है।दूसरी ओर, अमरनाथ यात्रा जारी रहने के बीच पहलगाम के लोग यहां 22 अप्रैल को आतंकी हमले के बाद से बुरी तरह प्रभावित हुए पर्यटन के फिर से शुरू होने का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। उन्हें पूरा विश्वास है कि ‘‘अब पहलगाम की आत्मा को आतंकवाद के हाथों बंधक नहीं बनने दिया जाएगा’’। हम आपको बता दें कि अमरनाथ गुफा मंदिर की 38 दिन की वार्षिक तीर्थयात्रा अनंतनाग जिले के पहलगाम और गांदेरबल जिले के बालटाल मार्गों से होती है। पहलगाम आतंकी हमले के बाद यहां लगभग खाली हो गए होटलों में अब कुछ पर्यटक आ रहे हैं जो अपनी छुट्टियां बिताने के लिए पहलगाम को चुन रहे हैं।हम आपको यह भी बता दें कि पुलिस ने आगामी सप्ताहों में उच्च ऊंचाई वाले स्थलों पर शुरू होने वाली कैलाश यात्रा, मणिमहेश और मचैल यात्रा जैसी वार्षिक तीर्थयात्राओं का शांतिपूर्ण समापन सुनिश्चित करने के लिए सभी मार्गों को लेकर योजना बना ली है। यात्रा मार्गों पर केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) और अन्य अर्द्धसैनिक बलों की तैनाती में पूरी सावधानी बरती जा रही है। हम आपको बता दें कि ये बल तालमेल के साथ काम करते हैं और संदिग्ध व्यक्तियों की आवाजाही के बारे में कोई भी सूचना मिलने पर तुरंत कार्रवाई करते हैं।

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Jul 24, 2025 - 04:30
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Pahalgam Terror Attack को तीन महीने हो गये, 26 पर्यटकों की निर्ममता से हत्या करने वाले आतंकवादी अब भी पकड़ में नहीं आ सके हैं
पहलगाम आतंकी हमले के तीन महीने बाद भी, इसे अंजाम देने वाले आतंकवादियों के फरार रहने के कारण क्षेत्र में सुरक्षा चूक को लेकर चिंता जताई जा रही है और जवाबदेही तय करने की मांग बढ़ रही है। हम आपको बता दें कि एनआईए ने 22 अप्रैल को हुई इस घटना के सिलसिले में अब तक दो गिरफ्तारियां की हैं। माना जा रहा है कि गिरफ्तार किये गए लोगों ने ही हमलावरों को साजोसामान उपलब्ध कराए थे, जबकि इस हमले के लिए जिम्मेदार आतंकवादी अब भी सुरक्षा एजेंसियों की जद में नहीं आए हैं। एजेंसी ने 22 जून को दो लोगों- पहलगाम के बटकोट निवासी परवेज अहमद जोथर और पहलगाम के हिल पार्क निवासी बशीर अहमद जोथर को गिरफ्तार किया था। एनआईए ने कहा था कि गिरफ्तार आरोपी वर्तमान में हिरासत में हैं। उन्होंने हमले में शामिल तीन हथियारबंद आतंकवादियों की पहचान का खुलासा किया है और यह भी पुष्टि की है कि वे पाकिस्तानी नागरिक थे, जो प्रतिबंधित ‘द रेजिस्टेंस फ्रंट’ (टीआरएफ) से जुड़े हुए हैं। हम आपको बता दें कि यह संगठन पाकिस्तान से संचालित आतंकवादी संगठन लश्कर-ए-तैयबा (एलईटी) से संबद्ध है। एनआईए की जांच के अनुसार, परवेज और बशीर ने हमले से पहले जानबूझकर तीन हथियारबंद आतंकवादियों को हिल पार्क स्थित एक ढोक (झोपड़ी) में पनाह दी थी। एजेंसी ने कहा कि दोनों लोगों ने आतंकवादियों को भोजन, आश्रय और साजो-सामान उपलब्ध कराया था, जिन्होंने घटना वाले दिन धार्मिक पहचान के आधार पर पर्यटकों की जान ली थी।

उधर, अगले महीने अपना पांच साल का कार्यकाल पूरा करने जा रहे उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने इस घटना को ‘‘सुरक्षा विफलता’’ माना है। उनकी इस स्वीकारोक्ति की मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने सराहना की, लेकिन जवाबदेही की भी मांग की है। उधर, अधिकारियों का कहना है कि खुफिया एजेंसियों को आतंकी हमले होने की संभावना के बारे में सतर्क किया गया था, लेकिन इन सूचनाओं का उपयोग हमले वाले स्थान से लगभग 90 किलोमीटर दूर किसी अन्य स्थान पर किया गया, जिसके परिणामस्वरूप सुरक्षा में बड़ी चूक हुई। सुरक्षा अधिकारियों ने बताया कि आतंकवादी, जो ‘‘फाल्कन स्क्वाड’’ के नाम से जानी जाने वाली टीआरएफ इकाई के सदस्य हैं, सैन्य वर्दी में पहलगाम क्षेत्र में घुसे थे तथा उनके पास सेना जैसे हथियार और कैमरा-युक्त हेलमेट सहित अन्य संचार उपकरण थे। उन्होंने बताया कि हमले की साजिश कथित तौर पर सैफुल्लाह कसूरी उर्फ खालिद ने बनाई थी, जो लश्कर का शीर्ष कमांडर और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर घोषित आतंकवादी हाफिज सईद का निजी सहायक है।

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सुरक्षा अधिकारियों ने संकेत दिया कि हमलावरों का ऑनलाइन पता कराची और मुजफ्फराबाद में सीमा के पास स्थित सुरक्षित ठिकानों से लगाया गया था, जिससे पता चलता है कि हमलावर पाकिस्तान में लश्कर-ए-तैयबा नेटवर्क से जुड़े हुए थे। उन्होंने कहा कि ‘‘फाल्कन स्क्वाड’’ के तहत प्रशिक्षित आतंकवादियों का इस्तेमाल करना विकेन्द्रीकृत और आसानी से पता न चल सकने वाले गुर्गों पर बढ़ती निर्भरता को दर्शाता है, जिससे भविष्य में जम्मू कश्मीर में क्षेत्रीय सुरक्षा और लोगों की जान को खतरा पैदा हो सकता है।

दूसरी ओर, अमरनाथ यात्रा जारी रहने के बीच पहलगाम के लोग यहां 22 अप्रैल को आतंकी हमले के बाद से बुरी तरह प्रभावित हुए पर्यटन के फिर से शुरू होने का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। उन्हें पूरा विश्वास है कि ‘‘अब पहलगाम की आत्मा को आतंकवाद के हाथों बंधक नहीं बनने दिया जाएगा’’। हम आपको बता दें कि अमरनाथ गुफा मंदिर की 38 दिन की वार्षिक तीर्थयात्रा अनंतनाग जिले के पहलगाम और गांदेरबल जिले के बालटाल मार्गों से होती है। पहलगाम आतंकी हमले के बाद यहां लगभग खाली हो गए होटलों में अब कुछ पर्यटक आ रहे हैं जो अपनी छुट्टियां बिताने के लिए पहलगाम को चुन रहे हैं।

हम आपको यह भी बता दें कि पुलिस ने आगामी सप्ताहों में उच्च ऊंचाई वाले स्थलों पर शुरू होने वाली कैलाश यात्रा, मणिमहेश और मचैल यात्रा जैसी वार्षिक तीर्थयात्राओं का शांतिपूर्ण समापन सुनिश्चित करने के लिए सभी मार्गों को लेकर योजना बना ली है। यात्रा मार्गों पर केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) और अन्य अर्द्धसैनिक बलों की तैनाती में पूरी सावधानी बरती जा रही है। हम आपको बता दें कि ये बल तालमेल के साथ काम करते हैं और संदिग्ध व्यक्तियों की आवाजाही के बारे में कोई भी सूचना मिलने पर तुरंत कार्रवाई करते हैं।

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