Neck Pain Warning: गर्दन दर्द को न करें नजरअंदाज, Spinal Infection और Tumor का हो सकता है संकेत

अधिकतर लोग कभी न कभी गर्दन के दर्द से काफी परेशान रहते हैं। लंबे समय तक ही एक ही जगह पर बैठे रहने से दर्द और भी बढ़ जाता है। कई बार गलत पॉश्चर में बैठें रहने से गर्दन का दर्द भी शुरु हो जाता है। कई बार तो तनाव भी गर्दन में दर्द का कारण बन सकता है, लेकिन दर्द कुछ देर में या आराम करके ठीक हो जाए, तो किसी बात की कोई चिंता नहीं करनी चाहिए।बार-बार होने वाला तीव्र दर्द अक्सर किसी अंदरुनी समस्या का संकेत हो सकता है।  Mayo Clinic के अनुसार, एक अध्ययन में पता चला है कि जो लोग दिन में 6 घंटे से ज्यादा समय तक एक ही जगह पर बैठें रहते हैं, उन्हें गर्दन का दर्द होने की संभावना अधिक होती है। इतना ही नहीं, यदि आप लैपटॉप या स्मार्टफोन का इस्तेमाल करते हुए पूरे दिन बैठे रहेंगे,तो इससे और भी खतरा बढ़ सकता है। आइए जानते हैं गर्दन दर्द कब गंभीर बन जाता है।गर्दन दर्द के पीछे हो सकती हैं ये गंभीर बीमा‍र‍ियां Neurologic Clinics में प्रकाशित एक स्टडी के मुताबिक, सर्वाइकल रेडिकुलोपैछी, सर्वाइकल मायलोपैथी, इंफेक्शन, ट्यूमर व अन्य गंभीर बीमारियों में भी गर्दन में दर्द होता है। आइए आपको इसके अन्य कारण बताते हैं-इंफेक्‍शन, इंफ्लेमेटरी ड‍िजीज, न्‍यूरोलॉज‍िकल समस्‍याओं का संकेत- यदि गर्दन के दर्द के साथ बुखार आना। - बिना किसी कारण के वजन कम होना। - लगातार सिरदर्द। - निगलने परेशानी होना।- ब्लैडर या बॉवेल कंट्रोल में बदलाव।इन लक्षणों के नजर आने से डॉक्टर को जरुर दिखाएं क्योंकि इसके पीछे इंफेक्शन, इंफ्लेमेटरी डिजीज, यूरोलॉज‍िकल समस्‍याएं देखने को मिल सकती है। दुर्घटना या गिरने के बाद रीढ़ की हड्डी में फ्रैक्चर या गंभीर चोट लगने से भी इस तरह के लक्षण नजर आते हैं।स्‍पाइनल इंफेक्‍शनयदि आपको बार-बार बुखार और दर्द हो, तो इसका मतलब यह है कि स्पाइनल इंफेक्शन हो सकता है। इसका उपचार एंटीबायोटिक या एंटीफंगल दवाओं के साथ किया जा सकता है। स्‍पाइनल ट्यूमर या कैंसरअसल में स्पाइनल ट्यूमर होने पर कमर या गर्दन में दर्द, रात में दर्द बढ़ना, हाथ-पैर में कमजोरी या सुन्नपन महसूस हो सकता है। वहीं, दुर्लभ मामलों में कैंसर हो सकता है। इसमें सर्जरी, रेडिएशन थेरेपी, कीमोथेरपी की सहायता ली जाती है।मेनिन्जाइटिसबता दें कि, मेनिन्जाइटिस दिमाग और स्पाइनल कॉर्ड को ढकने वाली झिल्लियों में होने वाली सूजन। इसमें गर्दन में अकड़न, उल्टी, तेज बुखार जैसे तमाम लक्षण नजर आते हैं। इसको रोकने के लिए एंटीबायोटिक, एंटीवायरल या एंटीफंगल दवाओं की सहायता ली जा सकती है।गर्दन के दर्द से बचने के ल‍िए ये सावधान‍ियां बरतें- ज्यादा समय तक गर्दन को न झुकाएं। - काफी लंबे समय तक ड्राइविंग न करें। - स्ट्रेस और वजन घटाने की कोशिश करें। -जब आप बैठें तो रीढ़ और गर्दन को सीधा रखें। - काम के समय स्क्रीन को आंखों के लेवल पर रखें। - बहुत ऊंचा या सख्त ताकिया का इस्तेमाल न करें। - नियमित तौर पर डेली एक्सरसाइज जरुर करें। - भारी सामान को उठाते समय दोनों कंधों को बराबर वजन रखेँ।  - गर्दन को एक दिशा में मोड़कर न रखें। - पर्याप्त नींद लें और जिससे गर्दन की मांसपेशियां को रिकवरी मिले।किन लोगों के लिए गर्दन का दर्द खतरनाक है?-लंबे समय से स्‍टेरॉइड का इस्‍तेमाल कर रहे हों।-ज‍िन लोगों को ऑस्‍ट‍ियोपोरोस‍िस हो।-ज‍िन्‍हें पहले कैंसर हो चुका हो।स्पाइनल सर्जरी कब करानी चाहिए?- जब मरीज के हाथों या पैरों में सुन्नपन या कमजोरी तेजी से बढ़ रही हो। - लगातार दर्द के कारण मरीज की काम करने क्षमता कम हो गई हो। - मरीज का संतुलन बनाने में मुश्किल हो रही है। - मरीज को चलने-फिरने में समस्या हो। 

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Jul 27, 2026 - 10:18
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Neck Pain Warning: गर्दन दर्द को न करें नजरअंदाज, Spinal Infection और Tumor का हो सकता है संकेत
अधिकतर लोग कभी न कभी गर्दन के दर्द से काफी परेशान रहते हैं। लंबे समय तक ही एक ही जगह पर बैठे रहने से दर्द और भी बढ़ जाता है। कई बार गलत पॉश्चर में बैठें रहने से गर्दन का दर्द भी शुरु हो जाता है। कई बार तो तनाव भी गर्दन में दर्द का कारण बन सकता है, लेकिन दर्द कुछ देर में या आराम करके ठीक हो जाए, तो किसी बात की कोई चिंता नहीं करनी चाहिए।
बार-बार होने वाला तीव्र दर्द अक्सर किसी अंदरुनी समस्या का संकेत हो सकता है।  Mayo Clinic के अनुसार, एक अध्ययन में पता चला है कि जो लोग दिन में 6 घंटे से ज्यादा समय तक एक ही जगह पर बैठें रहते हैं, उन्हें गर्दन का दर्द होने की संभावना अधिक होती है। इतना ही नहीं, यदि आप लैपटॉप या स्मार्टफोन का इस्तेमाल करते हुए पूरे दिन बैठे रहेंगे,तो इससे और भी खतरा बढ़ सकता है। आइए जानते हैं गर्दन दर्द कब गंभीर बन जाता है।

गर्दन दर्द के पीछे हो सकती हैं ये गंभीर बीमा‍र‍ियां
 Neurologic Clinics में प्रकाशित एक स्टडी के मुताबिक, सर्वाइकल रेडिकुलोपैछी, सर्वाइकल मायलोपैथी, इंफेक्शन, ट्यूमर व अन्य गंभीर बीमारियों में भी गर्दन में दर्द होता है। आइए आपको इसके अन्य कारण बताते हैं-

इंफेक्‍शन, इंफ्लेमेटरी ड‍िजीज, न्‍यूरोलॉज‍िकल समस्‍याओं का संकेत
- यदि गर्दन के दर्द के साथ बुखार आना।

 - बिना किसी कारण के वजन कम होना।

 - लगातार सिरदर्द।

 - निगलने परेशानी होना।

- ब्लैडर या बॉवेल कंट्रोल में बदलाव।

इन लक्षणों के नजर आने से डॉक्टर को जरुर दिखाएं क्योंकि इसके पीछे इंफेक्शन, इंफ्लेमेटरी डिजीज, यूरोलॉज‍िकल समस्‍याएं देखने को मिल सकती है। दुर्घटना या गिरने के बाद रीढ़ की हड्डी में फ्रैक्चर या गंभीर चोट लगने से भी इस तरह के लक्षण नजर आते हैं।

स्‍पाइनल इंफेक्‍शन
यदि आपको बार-बार बुखार और दर्द हो, तो इसका मतलब यह है कि स्पाइनल इंफेक्शन हो सकता है। इसका उपचार एंटीबायोटिक या एंटीफंगल दवाओं के साथ किया जा सकता है। 

स्‍पाइनल ट्यूमर या कैंसर
असल में स्पाइनल ट्यूमर होने पर कमर या गर्दन में दर्द, रात में दर्द बढ़ना, हाथ-पैर में कमजोरी या सुन्नपन महसूस हो सकता है। वहीं, दुर्लभ मामलों में कैंसर हो सकता है। इसमें सर्जरी, रेडिएशन थेरेपी, कीमोथेरपी की सहायता ली जाती है।

मेनिन्जाइटिस
बता दें कि, मेनिन्जाइटिस दिमाग और स्पाइनल कॉर्ड को ढकने वाली झिल्लियों में होने वाली सूजन। इसमें गर्दन में अकड़न, उल्टी, तेज बुखार जैसे तमाम लक्षण नजर आते हैं। इसको रोकने के लिए एंटीबायोटिक, एंटीवायरल या एंटीफंगल दवाओं की सहायता ली जा सकती है।

गर्दन के दर्द से बचने के ल‍िए ये सावधान‍ियां बरतें
- ज्यादा समय तक गर्दन को न झुकाएं।

 - काफी लंबे समय तक ड्राइविंग न करें।

 - स्ट्रेस और वजन घटाने की कोशिश करें।

 -जब आप बैठें तो रीढ़ और गर्दन को सीधा रखें।

 - काम के समय स्क्रीन को आंखों के लेवल पर रखें।

 - बहुत ऊंचा या सख्त ताकिया का इस्तेमाल न करें।

 - नियमित तौर पर डेली एक्सरसाइज जरुर करें।

 - भारी सामान को उठाते समय दोनों कंधों को बराबर वजन रखेँ। 

 - गर्दन को एक दिशा में मोड़कर न रखें।

 - पर्याप्त नींद लें और जिससे गर्दन की मांसपेशियां को रिकवरी मिले।

किन लोगों के लिए गर्दन का दर्द खतरनाक है?
-लंबे समय से स्‍टेरॉइड का इस्‍तेमाल कर रहे हों।
-ज‍िन लोगों को ऑस्‍ट‍ियोपोरोस‍िस हो।
-ज‍िन्‍हें पहले कैंसर हो चुका हो।

स्पाइनल सर्जरी कब करानी चाहिए?
- जब मरीज के हाथों या पैरों में सुन्नपन या कमजोरी तेजी से बढ़ रही हो।

 - लगातार दर्द के कारण मरीज की काम करने क्षमता कम हो गई हो।

 - मरीज का संतुलन बनाने में मुश्किल हो रही है।

 - मरीज को चलने-फिरने में समस्या हो। 

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