देवभूमि उत्तराखंड में देवी-देवताओं के कई मंदिर हैं। जिनमें से हरिद्वार के बिल्व पर्वत पर मां मनसा देवी का मंदिर स्थित है। मनसा देवी मंदिर भक्तों की आस्था का केंद्र है। इस मंदिर से जुड़ी कई गहरी धार्मिक मान्यताएं सुनने को मिलती है। धार्मिक मान्यता है कि जो भी भक्त सच्चे मन से मां मनसा देवी के दर्शन करता है, मां उसकी सभी मनोकामनाओं को पूरी करती हैं। खास मौके पर मंदिर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ देखने को मिलती है। ऐसे में आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको मनसा देवी मंदिर के इतिहास और यहां से जुड़ी धार्मिक मान्यता के बारे में बताने जा रहे हैं।
मंदिर का इतिहास
साल 1811 से 1815 के बीच राजा गोपाल सिंह द्वारा मनसा देवी मंदिर का निर्माण कराया गया था। बता दें कि मनसा देवी मंदिर उन जगहों में शामिल है, जहां पर समुद्र मंथन के दौरान अमृत की कुछ बूंदे गिरी थीं। इस मंदिर में मनसा देवी की दो मूर्तियां स्थापित हैं। एक मूर्ति के तीन मुख और पांच भुजाएं हैं, तो वहीं दूसरी मूर्ति की आठ भुजाएं और स्वयं देवी सर्प पर विराजमान हैं।
मंदिर की मान्यता
धार्मिक मान्यता है कि मां मनसा देवी अपने दरबार में आने वाले हर भक्त की मनोकामना को पूरी करती हैं। माना जाता है कि जो भी भक्त मां के दरबार में सच्चे मन और पूरी श्रद्धा भाव के साथ आता है, वह कभी खाली हाथ नहीं जाता है। वहीं मनसा देवी मंदिर आने से दंपति को संतान सुख की प्राप्ति होती है। वहीं सुहागिन महिलाएं अपने सुहाग की रक्षा और पति की लंबी उम्र के लिए मां मनसा देवी से प्रार्थना करती हैं।