LIC Stake Sale: मोदी सरकार बेचेगी 6.5% हिस्सेदारी, Disinvestment से ₹31,000 करोड़ जुटाने का मेगा प्लान

केंद्र सरकार ने भारतीय जीवन बीमा निगम यानी एलआईसी में अपनी हिस्सेदारी बेचने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। सरकार दो दिन की बिक्री पेशकश के माध्यम से एलआईसी में 6.5 प्रतिशत तक हिस्सेदारी बेचने जा रही है। इस कदम से सरकार को करीब 31 हजार करोड़ रुपये जुटाने की उम्मीद है। साथ ही एलआईसी भी सार्वजनिक हिस्सेदारी से जुड़े बाजार नियामक के नियमों का समय से पहले पालन कर सकेगी।मौजूद जानकारी के अनुसार, यह बिक्री पेशकश दो चरणों में होगी। पहले दिन गैर-खुदरा निवेशकों के लिए आवेदन की सुविधा उपलब्ध रहेगी, जबकि दूसरे दिन खुदरा निवेशक भी इसमें भाग ले सकेंगे। सरकार ने प्रति शेयर न्यूनतम कीमत 382 रुपये तय की है।बता दें कि सरकार पहले चरण में 2.5 प्रतिशत हिस्सेदारी बेच रही है। इसके साथ ही 4 प्रतिशत अतिरिक्त हिस्सेदारी बेचने का विकल्प भी रखा गया है, जिसे आमतौर पर ग्रीन शू विकल्प कहा जाता है। यदि निवेशकों की ओर से अच्छी मांग मिलती है तो सरकार कुल 6.5 प्रतिशत हिस्सेदारी बेच सकती है।न्यूनतम कीमत बाजार भाव से लगभग 10 प्रतिशत कम रखी गई है। सोमवार को बंबई शेयर बाजार में एलआईसी का शेयर 424.35 रुपये पर बंद हुआ था। ऐसे में छूट वाली कीमत निवेशकों को आकर्षित करने की रणनीति का हिस्सा मानी जा रही है।गौरतलब है कि इस बिक्री के बाद एलआईसी सार्वजनिक हिस्सेदारी से जुड़ी न्यूनतम सीमा के काफी करीब पहुंच जाएगी। भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड यानी सेबी ने एलआईसी को 16 मई 2027 तक कम से कम 10 प्रतिशत सार्वजनिक हिस्सेदारी सुनिश्चित करने की समय सीमा दी थी। फिलहाल एलआईसी में केंद्र सरकार की हिस्सेदारी 96.5 प्रतिशत है।सरकार ने वर्ष 2022 में एलआईसी का प्रारंभिक सार्वजनिक निर्गम भी जारी किया था। उस समय 902 रुपये से 949 रुपये प्रति शेयर के मूल्य दायरे पर 3.5 प्रतिशत हिस्सेदारी बेची गई थी। उस निर्गम से सरकार ने करीब 21 हजार करोड़ रुपये जुटाए थे। हालांकि उसके बाद बाजार में एलआईसी के शेयरों में उतार-चढ़ाव देखने को मिला है।वर्तमान समय में एलआईसी का कुल बाजार मूल्य 5.36 लाख करोड़ रुपये से अधिक है। देश की सबसे बड़ी जीवन बीमा कंपनी होने के कारण एलआईसी का भारतीय वित्तीय क्षेत्र में महत्वपूर्ण स्थान है। लाखों निवेशकों और पॉलिसीधारकों का भरोसा इस संस्था से जुड़ा हुआ है।बता दें कि सरकार विनिवेश के माध्यम से राजस्व बढ़ाने की अपनी रणनीति पर लगातार काम कर रही है। चालू वित्त वर्ष में अब तक सार्वजनिक क्षेत्र की सात कंपनियों में हिस्सेदारी बिक्री और यूनिट ट्रस्ट ऑफ इंडिया की निर्दिष्ट इकाई से प्राप्त राशि के जरिए सरकार 21,082 करोड़ रुपये जुटा चुकी है। ऐसे में एलआईसी की यह हिस्सेदारी बिक्री सरकार के विनिवेश कार्यक्रम का अब तक का सबसे बड़ा कदम मानी जा रही है और इससे सरकारी खजाने को भी बड़ी मजबूती मिलने की उम्मीद हैं।

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Aug 5, 2026 - 15:42
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केंद्र सरकार ने भारतीय जीवन बीमा निगम यानी एलआईसी में अपनी हिस्सेदारी बेचने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। सरकार दो दिन की बिक्री पेशकश के माध्यम से एलआईसी में 6.5 प्रतिशत तक हिस्सेदारी बेचने जा रही है। इस कदम से सरकार को करीब 31 हजार करोड़ रुपये जुटाने की उम्मीद है। साथ ही एलआईसी भी सार्वजनिक हिस्सेदारी से जुड़े बाजार नियामक के नियमों का समय से पहले पालन कर सकेगी।

मौजूद जानकारी के अनुसार, यह बिक्री पेशकश दो चरणों में होगी। पहले दिन गैर-खुदरा निवेशकों के लिए आवेदन की सुविधा उपलब्ध रहेगी, जबकि दूसरे दिन खुदरा निवेशक भी इसमें भाग ले सकेंगे। सरकार ने प्रति शेयर न्यूनतम कीमत 382 रुपये तय की है।

बता दें कि सरकार पहले चरण में 2.5 प्रतिशत हिस्सेदारी बेच रही है। इसके साथ ही 4 प्रतिशत अतिरिक्त हिस्सेदारी बेचने का विकल्प भी रखा गया है, जिसे आमतौर पर ग्रीन शू विकल्प कहा जाता है। यदि निवेशकों की ओर से अच्छी मांग मिलती है तो सरकार कुल 6.5 प्रतिशत हिस्सेदारी बेच सकती है।

न्यूनतम कीमत बाजार भाव से लगभग 10 प्रतिशत कम रखी गई है। सोमवार को बंबई शेयर बाजार में एलआईसी का शेयर 424.35 रुपये पर बंद हुआ था। ऐसे में छूट वाली कीमत निवेशकों को आकर्षित करने की रणनीति का हिस्सा मानी जा रही है।

गौरतलब है कि इस बिक्री के बाद एलआईसी सार्वजनिक हिस्सेदारी से जुड़ी न्यूनतम सीमा के काफी करीब पहुंच जाएगी। भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड यानी सेबी ने एलआईसी को 16 मई 2027 तक कम से कम 10 प्रतिशत सार्वजनिक हिस्सेदारी सुनिश्चित करने की समय सीमा दी थी। फिलहाल एलआईसी में केंद्र सरकार की हिस्सेदारी 96.5 प्रतिशत है।

सरकार ने वर्ष 2022 में एलआईसी का प्रारंभिक सार्वजनिक निर्गम भी जारी किया था। उस समय 902 रुपये से 949 रुपये प्रति शेयर के मूल्य दायरे पर 3.5 प्रतिशत हिस्सेदारी बेची गई थी। उस निर्गम से सरकार ने करीब 21 हजार करोड़ रुपये जुटाए थे। हालांकि उसके बाद बाजार में एलआईसी के शेयरों में उतार-चढ़ाव देखने को मिला है।

वर्तमान समय में एलआईसी का कुल बाजार मूल्य 5.36 लाख करोड़ रुपये से अधिक है। देश की सबसे बड़ी जीवन बीमा कंपनी होने के कारण एलआईसी का भारतीय वित्तीय क्षेत्र में महत्वपूर्ण स्थान है। लाखों निवेशकों और पॉलिसीधारकों का भरोसा इस संस्था से जुड़ा हुआ है।

बता दें कि सरकार विनिवेश के माध्यम से राजस्व बढ़ाने की अपनी रणनीति पर लगातार काम कर रही है। चालू वित्त वर्ष में अब तक सार्वजनिक क्षेत्र की सात कंपनियों में हिस्सेदारी बिक्री और यूनिट ट्रस्ट ऑफ इंडिया की निर्दिष्ट इकाई से प्राप्त राशि के जरिए सरकार 21,082 करोड़ रुपये जुटा चुकी है। ऐसे में एलआईसी की यह हिस्सेदारी बिक्री सरकार के विनिवेश कार्यक्रम का अब तक का सबसे बड़ा कदम मानी जा रही है और इससे सरकारी खजाने को भी बड़ी मजबूती मिलने की उम्मीद हैं।

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