Iran War खत्म होते ही Trump चलेंगे बड़ी चाल! इजरायल से लेकर सऊदी अरब तक बदलेंगे समीकरण
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की सरकार ईरान के साथ चल रहे युद्ध के बाद मध्य पूर्व के लिए एक बड़ी रणनीति तैयार कर रही है। Axios की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका का यह प्लान युद्ध खत्म होने के बाद पूरे क्षेत्र में उसकी भूमिका को बदल सकता है।अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक, इस रणनीति का मकसद ईरान को क्षेत्र में घेरने के लिए अमेरिकी सहयोगियों को एक साथ लाना और इजरायल के अपने पड़ोसी देशों के साथ रिश्ते मजबूत करना है। ट्रंप ने निजी बातचीत में कुछ लोगों से कहा है कि ईरान युद्ध खत्म होने के बाद वह मध्य पूर्व के लिए 'कुछ बहुत बड़ा' करने की तैयारी में हैं।ईरान को रोकने के लिए बनेगा क्षेत्रीय मोर्चारिपोर्ट के अनुसार, ट्रंप प्रशासन की योजना का पहला बड़ा हिस्सा मध्य पूर्व में अमेरिका के सहयोगी देशों को ईरान के खिलाफ ज्यादा मजबूती से एकजुट करना है। इसमें अमेरिका की भूमिका सुरक्षा गारंटर के तौर पर हो सकती है। यानी क्षेत्र में किसी बड़े सुरक्षा संकट की स्थिति में अमेरिका अपने सहयोगी देशों को सुरक्षा देने में अहम भूमिका निभा सकता है।इसे भी पढ़ें: ईरान की Pickaxe Mountain न्यूक्लियर साइट पर Trump का बड़ा हमला संभव, तेहरान को परमाणु हथियारों से रोकने की तैयारीगाजा और इजरायल-सीरिया पर भी फोकसट्रंप प्रशासन युद्ध के बाद क्षेत्र में चल रहे दूसरे विवादों को कम करने की दिशा में भी काम करना चाहता है। इसके तहत ट्रंप की गाजा योजना के अगले चरण को आगे बढ़ाने की कोशिश हो सकती है। इसके अलावा इजरायल और सीरिया के बीच सुरक्षा व्यवस्था को लेकर समझौता कराने और इजरायल-लेबनान के मौजूदा समझौते को लागू करने पर भी काम किया जा सकता है।इजरायल-सऊदी अरब डील पर ट्रंप की नजरइस रणनीति का तीसरा और बेहद अहम हिस्सा अब्राहम अकॉर्ड्स (Abraham Accords) का विस्तार करना है। ट्रंप प्रशासन इजरायल और सऊदी अरब के बीच रिश्तों को सामान्य करने के लिए समझौता कराने की कोशिश कर सकता है। अगर इजरायल और सऊदी अरब के बीच सामान्य संबंध स्थापित होते हैं तो इसे ट्रंप के लिए बड़ी कूटनीतिक उपलब्धि माना जाएगा। ईरान युद्ध के बाद यह समझौता उनके मध्य पूर्व प्लान का सबसे बड़ा हिस्सा बन सकता है।इसे भी पढ़ें: US Mid-Term Election 2026: Trump समर्थित USPS मेल वोटिंग नियमों पर Federal Judge की रोक, बताया असंवैधानिकइजरायल के चुनाव से बदल सकता है समीकरणइजरायल में 27 अक्टूबर को चुनाव होने हैं, जबकि अमेरिका में नवंबर में मिडटर्म चुनाव होने वाले हैं। ट्रंप प्रशासन चाहता है कि इजरायल में चुनाव के बाद बनने वाली सरकार अमेरिका के साथ मिलकर इस नई रणनीति पर काम करने के लिए तैयार हो। हालांकि, अमेरिकी अधिकारी इजरायल की राजनीति का इंतजार करते हुए अपनी योजना को रोकने के मूड में नहीं हैं। सूत्रों के मुताबिक, अगर चुनाव के बाद भी इजरायल में राजनीतिक गतिरोध बना रहता है तो ट्रंप फिर भी अपनी रणनीति को आगे बढ़ा सकते हैं।अभी तैयार नहीं हुआ है पूरा प्लानट्रंप हाल के हफ्तों में अपने वरिष्ठ सलाहकारों के साथ दो बैठकों में इस रणनीति पर चर्चा कर चुके हैं। इन बैठकों में कई अलग-अलग विचारों पर बातचीत हुई है। हालांकि, रिपोर्ट के मुताबिक इस प्लान को अंतिम रूप देने में अभी कई और हफ्ते लग सकते हैं। एक सूत्र ने इस प्रक्रिया को बताते हुए कहा कि योजना पर काम चल रहा है, लेकिन अभी यह पूरी तरह तैयार नहीं हुई है।सूत्र के मुताबिक, इस पूरी रणनीति का मकसद मध्य पूर्व की अलग-अलग समस्याओं और देशों को एक बड़ी क्षेत्रीय व्यवस्था से जोड़ना है। हालांकि, अभी यह साफ नहीं है कि अमेरिका के सभी सहयोगी देश इस योजना पर एक साथ आने के लिए तैयार होंगे या नहीं।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की सरकार ईरान के साथ चल रहे युद्ध के बाद मध्य पूर्व के लिए एक बड़ी रणनीति तैयार कर रही है। Axios की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका का यह प्लान युद्ध खत्म होने के बाद पूरे क्षेत्र में उसकी भूमिका को बदल सकता है।
अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक, इस रणनीति का मकसद ईरान को क्षेत्र में घेरने के लिए अमेरिकी सहयोगियों को एक साथ लाना और इजरायल के अपने पड़ोसी देशों के साथ रिश्ते मजबूत करना है। ट्रंप ने निजी बातचीत में कुछ लोगों से कहा है कि ईरान युद्ध खत्म होने के बाद वह मध्य पूर्व के लिए 'कुछ बहुत बड़ा' करने की तैयारी में हैं।
ईरान को रोकने के लिए बनेगा क्षेत्रीय मोर्चा
रिपोर्ट के अनुसार, ट्रंप प्रशासन की योजना का पहला बड़ा हिस्सा मध्य पूर्व में अमेरिका के सहयोगी देशों को ईरान के खिलाफ ज्यादा मजबूती से एकजुट करना है। इसमें अमेरिका की भूमिका सुरक्षा गारंटर के तौर पर हो सकती है। यानी क्षेत्र में किसी बड़े सुरक्षा संकट की स्थिति में अमेरिका अपने सहयोगी देशों को सुरक्षा देने में अहम भूमिका निभा सकता है।
इसे भी पढ़ें: ईरान की Pickaxe Mountain न्यूक्लियर साइट पर Trump का बड़ा हमला संभव, तेहरान को परमाणु हथियारों से रोकने की तैयारी
गाजा और इजरायल-सीरिया पर भी फोकस
ट्रंप प्रशासन युद्ध के बाद क्षेत्र में चल रहे दूसरे विवादों को कम करने की दिशा में भी काम करना चाहता है। इसके तहत ट्रंप की गाजा योजना के अगले चरण को आगे बढ़ाने की कोशिश हो सकती है। इसके अलावा इजरायल और सीरिया के बीच सुरक्षा व्यवस्था को लेकर समझौता कराने और इजरायल-लेबनान के मौजूदा समझौते को लागू करने पर भी काम किया जा सकता है।
इजरायल-सऊदी अरब डील पर ट्रंप की नजर
इस रणनीति का तीसरा और बेहद अहम हिस्सा अब्राहम अकॉर्ड्स (Abraham Accords) का विस्तार करना है। ट्रंप प्रशासन इजरायल और सऊदी अरब के बीच रिश्तों को सामान्य करने के लिए समझौता कराने की कोशिश कर सकता है। अगर इजरायल और सऊदी अरब के बीच सामान्य संबंध स्थापित होते हैं तो इसे ट्रंप के लिए बड़ी कूटनीतिक उपलब्धि माना जाएगा। ईरान युद्ध के बाद यह समझौता उनके मध्य पूर्व प्लान का सबसे बड़ा हिस्सा बन सकता है।
इसे भी पढ़ें: US Mid-Term Election 2026: Trump समर्थित USPS मेल वोटिंग नियमों पर Federal Judge की रोक, बताया असंवैधानिक
इजरायल के चुनाव से बदल सकता है समीकरण
इजरायल में 27 अक्टूबर को चुनाव होने हैं, जबकि अमेरिका में नवंबर में मिडटर्म चुनाव होने वाले हैं। ट्रंप प्रशासन चाहता है कि इजरायल में चुनाव के बाद बनने वाली सरकार अमेरिका के साथ मिलकर इस नई रणनीति पर काम करने के लिए तैयार हो। हालांकि, अमेरिकी अधिकारी इजरायल की राजनीति का इंतजार करते हुए अपनी योजना को रोकने के मूड में नहीं हैं। सूत्रों के मुताबिक, अगर चुनाव के बाद भी इजरायल में राजनीतिक गतिरोध बना रहता है तो ट्रंप फिर भी अपनी रणनीति को आगे बढ़ा सकते हैं।
अभी तैयार नहीं हुआ है पूरा प्लान
ट्रंप हाल के हफ्तों में अपने वरिष्ठ सलाहकारों के साथ दो बैठकों में इस रणनीति पर चर्चा कर चुके हैं। इन बैठकों में कई अलग-अलग विचारों पर बातचीत हुई है। हालांकि, रिपोर्ट के मुताबिक इस प्लान को अंतिम रूप देने में अभी कई और हफ्ते लग सकते हैं। एक सूत्र ने इस प्रक्रिया को बताते हुए कहा कि योजना पर काम चल रहा है, लेकिन अभी यह पूरी तरह तैयार नहीं हुई है।
सूत्र के मुताबिक, इस पूरी रणनीति का मकसद मध्य पूर्व की अलग-अलग समस्याओं और देशों को एक बड़ी क्षेत्रीय व्यवस्था से जोड़ना है। हालांकि, अभी यह साफ नहीं है कि अमेरिका के सभी सहयोगी देश इस योजना पर एक साथ आने के लिए तैयार होंगे या नहीं।
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