India Ballistic Missile Programme | 2 दिनों में 3 सफल टेस्ट! भारत की रक्षा प्रणाली में ऐतिहासिक मील का पत्थर, DRDO ने मजबूत की मल्टी-लेयर्ड बैलिस्टिक मिसाइल सुरक्षा

भारत ने रक्षा क्षेत्र में एक और ऐतिहासिक और अभूतपूर्व उपलब्धि हासिल की है। रक्षा मंत्रालय ने शनिवार को घोषणा की कि भारत दुनिया के उन चुनिंदा महाशक्तियों के विशिष्ट समूह में शामिल हो गया है, जिनके पास लंबी दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलों और एंटी-शिप खतरों को हवा में ही नेस्तनाबूद करने की अचूक मल्टी-लेयर्ड (कई स्तरों वाली) सुरक्षा प्रणाली है। भारत ने महज दो दिनों के भीतर लगातार तीन सफल उड़ान परीक्षण (Flight Tests) कर अपनी इस आसमानी दीवार की ताकत को दुनिया के सामने प्रदर्शित किया है।वरिष्ठ रक्षा अधिकारियों और रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) के अधिकारियों की मौजूदगी में 10 और 11 जून को किए गए इन परीक्षणों की सफलता भारत की रक्षा क्षमताओं को और मज़बूत करेगी, क्योंकि अब देश के पास मल्टी-लेयर्ड बैलिस्टिक मिसाइल डिफेंस (BMD) क्षमता है। भारत ने अपनी नौसेना की एंटी-शिप मिसाइल-मीडियम रेंज (NASM-MR) का भी सफलतापूर्वक परीक्षण किया है। इसे भी पढ़ें: TMC नेता Abhishek Banerjee की बढ़ीं मुश्किलें! PA सुमित रॉय के लिए घर पर पुलिस की छापेमारी, CID का समन, मदन मित्रा के ठिकानों पर ED की रेडरिपोर्ट्स के अनुसार, परीक्षण की गई दो इंटरसेप्टर मिसाइलों को इंटरमीडिएट-रेंज बैलिस्टिक मिसाइल (IRBM) की श्रेणी में रखा गया है, जिनकी रेंज 2,000 से 5,000 किलोमीटर के बीच है। हालांकि सरकार ने इनके बारे में ज़्यादा जानकारी नहीं दी है, लेकिन रिपोर्ट्स बताती हैं कि ये दोनों 'एक्सो-एटमॉस्फेरिक' और 'एंडो-एटमॉस्फेरिक' हैं, जिसका मतलब है कि ये पृथ्वी के वायुमंडल के अंदर और बाहर दोनों जगह काम कर सकती हैं। इसे भी पढ़ें: NEET मामले के खिलाफ राहुल गांधी का राष्ट्रव्यापी शंखनाद: 17 जून को कोटा से शुरू होगा 'छात्र सम्मेलन' आंदोलनभारत की बैलिस्टिक मिसाइल डिफेंस और क्षमताओं को मज़बूत करने की कोशिशहाल ही में भारत ने अपनी बैलिस्टिक मिसाइल डिफेंस और क्षमताओं को मज़बूत करने पर काफी ध्यान दिया है। खबरों के मुताबिक, भारत 'अग्नि-6' पर काम कर रहा है, जो उसकी अगली पीढ़ी की इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइलों का हिस्सा होगी और दुनिया के सबसे एडवांस्ड डिफेंस सिस्टम को भी चकमा देने में सक्षम होगी। रिपोर्ट्स बताती हैं कि अग्नि-6 की रेंज 5,000 किलोमीटर से ज़्यादा होने की संभावना है।भारत का ध्यान अपनी बैलिस्टिक मिसाइल डिफेंस और क्षमताओं को मज़बूत करने पर है, वहीं पाकिस्तान भी परीक्षण कर रहा है; रिपोर्ट्स के अनुसार, पाकिस्तान ने अपने बैलिस्टिक मिसाइल प्रोग्राम पर काम तेज़ कर दिया है। फिलहाल, पाकिस्तान के पास ज़्यादातर कम और मध्यम दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलें हैं, जैसे अब्दाली, गजनवी, शाहीन आदि।लेकिन हालिया परीक्षण भारत को उभरते और भविष्य के खतरों से निपटने में मदद करेंगे। समाचार एजेंसी ANI ने बताया कि ये सिस्टम स्वदेशी रूप से विकसित किए गए हैं। इस बीच, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इन परीक्षणों के लिए DRDO को बधाई दी है। रक्षा मंत्री ने X (जिसे पहले ट्विटर कहा जाता था) पर कहा, "इन परीक्षणों ने भारत को उन चुनिंदा देशों की श्रेणी में ला खड़ा किया है, जिनके पास ICBM (इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल) तक की बैलिस्टिक मिसाइलों का मुकाबला करने की क्षमता है। इन अहम तकनीकों का सफलतापूर्वक प्रदर्शन करने के लिए DRDO को बधाई।" Read Latest National News in Hindi only on Prabhasakshi  The @DRDO_India has successfully demonstrated multiple crucial technologies bolstering nations defence capabilities against different types of enemy threats. Three consecutive flight-tests were successfully conducted to demonstrate multi-layered defence against long range… pic.twitter.com/0DKQF0LB30— Rajnath Singh (@rajnathsingh) June 13, 2026

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Jun 13, 2026 - 13:17
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India Ballistic Missile Programme | 2 दिनों में 3 सफल टेस्ट! भारत की रक्षा प्रणाली में ऐतिहासिक मील का पत्थर, DRDO ने मजबूत की मल्टी-लेयर्ड बैलिस्टिक मिसाइल सुरक्षा
भारत ने रक्षा क्षेत्र में एक और ऐतिहासिक और अभूतपूर्व उपलब्धि हासिल की है। रक्षा मंत्रालय ने शनिवार को घोषणा की कि भारत दुनिया के उन चुनिंदा महाशक्तियों के विशिष्ट समूह में शामिल हो गया है, जिनके पास लंबी दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलों और एंटी-शिप खतरों को हवा में ही नेस्तनाबूद करने की अचूक मल्टी-लेयर्ड (कई स्तरों वाली) सुरक्षा प्रणाली है। भारत ने महज दो दिनों के भीतर लगातार तीन सफल उड़ान परीक्षण (Flight Tests) कर अपनी इस आसमानी दीवार की ताकत को दुनिया के सामने प्रदर्शित किया है।

वरिष्ठ रक्षा अधिकारियों और रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) के अधिकारियों की मौजूदगी में 10 और 11 जून को किए गए इन परीक्षणों की सफलता भारत की रक्षा क्षमताओं को और मज़बूत करेगी, क्योंकि अब देश के पास मल्टी-लेयर्ड बैलिस्टिक मिसाइल डिफेंस (BMD) क्षमता है। भारत ने अपनी नौसेना की एंटी-शिप मिसाइल-मीडियम रेंज (NASM-MR) का भी सफलतापूर्वक परीक्षण किया है।
 

इसे भी पढ़ें: TMC नेता Abhishek Banerjee की बढ़ीं मुश्किलें! PA सुमित रॉय के लिए घर पर पुलिस की छापेमारी, CID का समन, मदन मित्रा के ठिकानों पर ED की रेड


रिपोर्ट्स के अनुसार, परीक्षण की गई दो इंटरसेप्टर मिसाइलों को इंटरमीडिएट-रेंज बैलिस्टिक मिसाइल (IRBM) की श्रेणी में रखा गया है, जिनकी रेंज 2,000 से 5,000 किलोमीटर के बीच है। हालांकि सरकार ने इनके बारे में ज़्यादा जानकारी नहीं दी है, लेकिन रिपोर्ट्स बताती हैं कि ये दोनों 'एक्सो-एटमॉस्फेरिक' और 'एंडो-एटमॉस्फेरिक' हैं, जिसका मतलब है कि ये पृथ्वी के वायुमंडल के अंदर और बाहर दोनों जगह काम कर सकती हैं।
 

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भारत की बैलिस्टिक मिसाइल डिफेंस और क्षमताओं को मज़बूत करने की कोशिश
हाल ही में भारत ने अपनी बैलिस्टिक मिसाइल डिफेंस और क्षमताओं को मज़बूत करने पर काफी ध्यान दिया है। खबरों के मुताबिक, भारत 'अग्नि-6' पर काम कर रहा है, जो उसकी अगली पीढ़ी की इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइलों का हिस्सा होगी और दुनिया के सबसे एडवांस्ड डिफेंस सिस्टम को भी चकमा देने में सक्षम होगी। रिपोर्ट्स बताती हैं कि अग्नि-6 की रेंज 5,000 किलोमीटर से ज़्यादा होने की संभावना है।

भारत का ध्यान अपनी बैलिस्टिक मिसाइल डिफेंस और क्षमताओं को मज़बूत करने पर है, वहीं पाकिस्तान भी परीक्षण कर रहा है; रिपोर्ट्स के अनुसार, पाकिस्तान ने अपने बैलिस्टिक मिसाइल प्रोग्राम पर काम तेज़ कर दिया है। फिलहाल, पाकिस्तान के पास ज़्यादातर कम और मध्यम दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलें हैं, जैसे अब्दाली, गजनवी, शाहीन आदि।

लेकिन हालिया परीक्षण भारत को उभरते और भविष्य के खतरों से निपटने में मदद करेंगे। समाचार एजेंसी ANI ने बताया कि ये सिस्टम स्वदेशी रूप से विकसित किए गए हैं। इस बीच, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इन परीक्षणों के लिए DRDO को बधाई दी है। रक्षा मंत्री ने X (जिसे पहले ट्विटर कहा जाता था) पर कहा, "इन परीक्षणों ने भारत को उन चुनिंदा देशों की श्रेणी में ला खड़ा किया है, जिनके पास ICBM (इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल) तक की बैलिस्टिक मिसाइलों का मुकाबला करने की क्षमता है। इन अहम तकनीकों का सफलतापूर्वक प्रदर्शन करने के लिए DRDO को बधाई।"
 
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