IMEI छेड़ा तो खैर नहीं! 3 साल जेल और भारी जुर्माना, गैर-जमानती अपराध घोषित

हाल ही में दूरसंचार विभाग ने सोमवार को कहा है कि मोबाइल फोन के 15 अंकों वाले आईएमईआई नंबर में छेड़छाड़ करना एक गैर-जमानती अपराध है। इसके लिए अधिकतम तीन साल की कैद, 50 लाख रुपये तक का जुर्माना या दोनों दंड दिए जा सकते हैं। दूरसंचार विभाग ने सभी निर्माताओं, ब्रांड मालिकों, आयातकों और विक्रेताओं को जारी परामर्श में निर्धारित कानूनी प्रावधानों का पूर्ण पालन करने के निर्देश दिए हैं। यह कड़ी कार्रवाई दूरसंचार अधिनियम 2023 और टेलीकॉम साइबर सुरक्षा नियम 2024 के तहत लागू की जाएगी। 3 साल की कैद-जुर्मानाविभाग ने यह तक कह दिया है कि दूरसंचार अधिनियम, 2023, आईएमईआई नंबर सहित दूरसंचार पहचान से जुड़ी चीजों को छेड़छाड़ करने पर कठोर दंड मिलेगा। बताया गया है कि उल्लंघन करने पर 3 साल की जेल, 50 लाख रुपये तक का जुर्माना, या दोनों ही हो सकते हैं। दूरसंचार के अधिनियम, 2003 के तहत, मोबाइल हैंडसेट, मॉडेम, मॉड्यूल, सिम बॉक्स आदि जैसे किसी भी रेडियो उपकरण को जानबूझकर अपने पास रखना, यह जानते हुए भी कि उसमें अनधिकृत या छेड़छाड़ किए गए दूरसंचार पहचान से जुड़ी चीजों का उपयोग हुआ है, तो यह एक अपराध है। बता दें किं, ये अपराधन अधिनियम की धारा 42(7) के तहत संज्ञेय और गैर-जमानती हैं। धारा 42(6) ऐसे अपराधों को बढ़ावा देने या बढ़ावा देने वालों के लिए समान दंड का प्रावधान करती है।विभाग ने बताया है कि ऐसे उपकरणों का उपयोग करना जिनमें प्रोग्राम करने योग्य आईएमईआई की क्षमता हो, आईएमईआई से छेड़छाड़ के समान है और अधिनियम तथा दूरसंचार साइबर सुरक्षा नियम, 2024 के अनुसार यह प्रावधान कानूनी ढांचे के अधीन लागू होगा। विनिर्माताओं, ब्रांड मालिकों, आयातकों, विक्रेताओं, पुनर्विक्रेताओं और खुदरा विक्रेताओं को यह अवगत होना चाहिए कि छेड़छाड़ किए गए या ‘कॉन्फ़िगर’ किए जा सकने वाले आईएमईआई नंबर वाले उपकरणों का निर्माण, खरीद, संयोजन या उपयोग गंभीर कानूनी परिणामों को जन्म दे सकता है।दूरसंचार विभाग ने स्पष्ट किया है कि दूरसंचार साइबर सुरक्षा बनाए रखने, फर्जीवाड़े को रोकने, कानूनी प्रवर्तन को सरल बनाने और उचित कर संग्रह सुनिश्चित करने के लिए इन नियमों का अनुपालन अत्यंत आवश्यक है। इन प्रावधानों का कठोर पालन भारत के दूरसंचार ढांचे को नकली तथा छेड़छाड़ किए गए उपकरणों से सुरक्षित रखता है, साथ ही प्रवर्तन एजेंसियों को सहयोग प्रदान करता है और कर एवं नियामक अनुपालन को मजबूत बनाता है। नियमों का उल्लंघन करने पर कड़े कानूनी दंड का प्रावधान भी किया गया है।आईएमईआई डेटाबेस की मदद से जांच होगीसरकार ने छेड़छाड़ किए गए या काली सूची में डाले गए आईएमआई का एक केंद्रीय डेटाबेस रखती है। सरकार ने कहा  है कि पुराने मोबाइल उपकरणों की खरीद या ब्रिकी करने वाली संस्थाओं को पैसे के लेन-देन पहले राष्ट्रीय आईएमईआई डेटाबेस की मदद से इनकी जांच होगी और वहीं हर एक आईएमआई सत्यापन के लिए एक निश्चित शुल्क का भुगतान करना होगा। इसके अलावा, तर्राष्ट्रीय मोबाइल उपकरण पहचान (आईएमईआई) नंबर वाले स्मार्टफोन, सेलुलर स्मार्टवॉच, मोबाइल वाई-फाई हॉटस्पॉट, टैबलेट, यूएसबी मॉडम, मॉड्यूल, डोंगल, लैपटॉप, सिम बॉक्स जैसे सभी असेंबल किए गए सभी उपकरणों को डिवाइस हेतु- आईसीडीआर पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन करना होगा। 

PNSPNS
Nov 19, 2025 - 13:33
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IMEI छेड़ा तो खैर नहीं! 3 साल जेल और भारी जुर्माना, गैर-जमानती अपराध घोषित
हाल ही में दूरसंचार विभाग ने सोमवार को कहा है कि मोबाइल फोन के 15 अंकों वाले आईएमईआई नंबर में छेड़छाड़ करना एक गैर-जमानती अपराध है। इसके लिए अधिकतम तीन साल की कैद, 50 लाख रुपये तक का जुर्माना या दोनों दंड दिए जा सकते हैं। दूरसंचार विभाग ने सभी निर्माताओं, ब्रांड मालिकों, आयातकों और विक्रेताओं को जारी परामर्श में निर्धारित कानूनी प्रावधानों का पूर्ण पालन करने के निर्देश दिए हैं। यह कड़ी कार्रवाई दूरसंचार अधिनियम 2023 और टेलीकॉम साइबर सुरक्षा नियम 2024 के तहत लागू की जाएगी। 

3 साल की कैद-जुर्माना

विभाग ने यह तक कह दिया है कि दूरसंचार अधिनियम, 2023, आईएमईआई नंबर सहित दूरसंचार पहचान से जुड़ी चीजों को छेड़छाड़ करने पर कठोर दंड मिलेगा। बताया गया है कि उल्लंघन करने पर 3 साल की जेल, 50 लाख रुपये तक का जुर्माना, या दोनों ही हो सकते हैं। 

दूरसंचार के अधिनियम, 2003 के तहत, मोबाइल हैंडसेट, मॉडेम, मॉड्यूल, सिम बॉक्स आदि जैसे किसी भी रेडियो उपकरण को जानबूझकर अपने पास रखना, यह जानते हुए भी कि उसमें अनधिकृत या छेड़छाड़ किए गए दूरसंचार पहचान से जुड़ी चीजों का उपयोग हुआ है, तो यह एक अपराध है। बता दें किं, ये अपराधन अधिनियम की धारा 42(7) के तहत संज्ञेय और गैर-जमानती हैं। धारा 42(6) ऐसे अपराधों को बढ़ावा देने या बढ़ावा देने वालों के लिए समान दंड का प्रावधान करती है।

विभाग ने बताया है कि ऐसे उपकरणों का उपयोग करना जिनमें प्रोग्राम करने योग्य आईएमईआई की क्षमता हो, आईएमईआई से छेड़छाड़ के समान है और अधिनियम तथा दूरसंचार साइबर सुरक्षा नियम, 2024 के अनुसार यह प्रावधान कानूनी ढांचे के अधीन लागू होगा। विनिर्माताओं, ब्रांड मालिकों, आयातकों, विक्रेताओं, पुनर्विक्रेताओं और खुदरा विक्रेताओं को यह अवगत होना चाहिए कि छेड़छाड़ किए गए या ‘कॉन्फ़िगर’ किए जा सकने वाले आईएमईआई नंबर वाले उपकरणों का निर्माण, खरीद, संयोजन या उपयोग गंभीर कानूनी परिणामों को जन्म दे सकता है।

दूरसंचार विभाग ने स्पष्ट किया है कि दूरसंचार साइबर सुरक्षा बनाए रखने, फर्जीवाड़े को रोकने, कानूनी प्रवर्तन को सरल बनाने और उचित कर संग्रह सुनिश्चित करने के लिए इन नियमों का अनुपालन अत्यंत आवश्यक है। इन प्रावधानों का कठोर पालन भारत के दूरसंचार ढांचे को नकली तथा छेड़छाड़ किए गए उपकरणों से सुरक्षित रखता है, साथ ही प्रवर्तन एजेंसियों को सहयोग प्रदान करता है और कर एवं नियामक अनुपालन को मजबूत बनाता है। नियमों का उल्लंघन करने पर कड़े कानूनी दंड का प्रावधान भी किया गया है।

आईएमईआई डेटाबेस की मदद से जांच होगी

सरकार ने छेड़छाड़ किए गए या काली सूची में डाले गए आईएमआई का एक केंद्रीय डेटाबेस रखती है। सरकार ने कहा  है कि पुराने मोबाइल उपकरणों की खरीद या ब्रिकी करने वाली संस्थाओं को पैसे के लेन-देन पहले राष्ट्रीय आईएमईआई डेटाबेस की मदद से इनकी जांच होगी और वहीं हर एक आईएमआई सत्यापन के लिए एक निश्चित शुल्क का भुगतान करना होगा। इसके अलावा, तर्राष्ट्रीय मोबाइल उपकरण पहचान (आईएमईआई) नंबर वाले स्मार्टफोन, सेलुलर स्मार्टवॉच, मोबाइल वाई-फाई हॉटस्पॉट, टैबलेट, यूएसबी मॉडम, मॉड्यूल, डोंगल, लैपटॉप, सिम बॉक्स जैसे सभी असेंबल किए गए सभी उपकरणों को डिवाइस हेतु- आईसीडीआर पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन करना होगा। 

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