Health Tips: स्मोकिंग ने छीन ली है फेफड़ों की जान, ये आसान योग देंगे उन्हें नई जिंदगी, करें ट्राई

सिगरेट-बीड़ी पीने से फेफड़ों में जहरीला धुआं भर जाता है, जिस कारण सांस लेने की क्षमता कम हो जाती है। ऐसे में बहुत से लोग हैं, जिनको घुट-घुटकर सांस आती है। वहीं कम सांस आने का मतलब है कि आपके फेफड़े बीमार हैं। सांस कम आने से कई नुकसान होते हैं, जैसे - दिल पर दबाव बढ़ना, जल्दी थकान महसूस होना, दिल का जल्दी थक जाना, फेफड़ों पर बोझ, मानसिक तनाव, दिमाग पर असर और गंभीर बीमारी आदि के संकेत शामिल हैं।आपको बता दें कि फेफड़े करीब 6 लीटर हवा को पकड़ सकते हैं, जिसको टोटल लंग कैपेसिटी कहा जाता है। वहीं इसका मतलब यह है कि जब हम पूरी सांस अंदर लेते हैं, तो फेफड़ों में कुल इतनी हवा समा सकती है, जितनी की एक सामान्य वयस्क एक मिनट में 12 से 15 सांसे लेता है। लेकिन स्मोकिंग करने और एक्सरसाइज न करने और अन्य कई कारणों से फेफड़ों की सांस लेने की क्षमता धीरे-धीरे कम होने लगती है। जिस कारण डायाफ्राम कमजोर हो जाती है और फेफड़ों की लोच घट जाती है। ऐसे में आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको ऐसे आसन के बारे में बताने जा रहे हैं, जिनको करने से आप फेफड़ों के सांस लेने की क्षमता को बढ़ा सकते हैं।इसे भी पढ़ें: दिवाली पर क्यों है जिमीकंद खाने की प्रथा? सिर्फ शुभ ही नहीं, सेहत का खजाना भी है ये सब्जीकुंभक प्राणायामइसको करने से फेफड़े मजबूत होते हैं। इस आसन को करने के लिए सांस को थोड़ी देर तक रोककर रखा जाता है। सबसे पहले ध्यान मुद्रा में बैठें और रीढ़ को सीधा रखें। फिर 4 सेकेंड तक सांस अंदर लें और फिर 8 सेकेंड तक सांस रोककर रखें। इसके बाद 4 सेकेंड में धीरे-धीरे छोड़ दें। इस आसन को रोजाना करने से फेफड़ों की क्षमता और सांस लेने की शक्ति बढ़ती है।इंटरकोस्टल ब्रीदिंगइंटरकोस्टल ब्रीदिंग का अभ्यास करने से पसलियां और उनसे जुड़ी मांसपेशियां मजबूत होती हैं। इसको करने के लिए आराम से बैठ जाएं और हाथों से पसलियों को पकड़ें। फिर गहरी सांस अंदर लें और पसलियों को फैसने दें। वहीं सांस छोड़ते समय वापस सामान्य स्थिति में आएं। इससे फेफड़ों में ज्यादा हवा भरती है और शरीर को बेहतर तरीके से ऑक्सीजन मिलती है।भस्त्रिका प्राणायामइस आसन को बेलोज ब्रीदिंग भी कहा जाता है। इस आसन में तेजी से सांस लेना और छोड़ना शामिल है। इस आसन को करने के लिए पहले ध्यान मुद्रा में बैठें और फिर 1-2 बार लंबी सांस लें और छोड़ें। फिर सांस रोककर पेट को तेजी से अंदर-बाहर करें और इसको कम से कम 5 से 15 बार करना चाहिए। इस आसन को करने से फेफड़े साफ होते हैं, शरीर ऊर्जावान होता है और सांस लेने की क्षमता बढ़ती है।ताड़ासनतड़ासन पूरे शरीर को खींचता है और फेफड़ों को खोलता है। इस आसन को करने के लिए सीधे खड़े हो जाएं और पैरों में 1 फुट की दूरी रखें। अब सांस अंदर लेते हुए हाथों को ऊपर की ओर उठाएं और पंजों के बल खड़े हो जाएं। कुछ देर इस स्थिति में रहते हुए सांस छोड़ते हुए हाथ नीचे आएं। इससे पसलियां और डायाफ्राम मजबूत होती हैं।कोणासन-2इस आसन को करने से फेफड़ों के छोटे-छोटे हिस्से सक्रिय होते हैं। इस आसन को करने के लिए पैरों को 2.5 से 3 फीट की दूरी पर रखकर खड़े हो। फिर सांस अंदर लेते हुए हाथ को सिर के पास ले जाएं और धीरे-धीरे एक तरफ झुकें। थोड़ी देर सांस रोकें और फिर सांस छोड़ते हुए सामान्य स्थिति में वापस आएं। फिर दूसरे ओर से भी यह प्रक्रिया दोहराएं। इससे शरीर में ज्यादा ऑक्सीजन पहुंचता है और फेफड़े मजबूत होते हैं।

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Nov 4, 2025 - 10:13
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Health Tips: स्मोकिंग ने छीन ली है फेफड़ों की जान, ये आसान योग देंगे उन्हें नई जिंदगी, करें ट्राई
सिगरेट-बीड़ी पीने से फेफड़ों में जहरीला धुआं भर जाता है, जिस कारण सांस लेने की क्षमता कम हो जाती है। ऐसे में बहुत से लोग हैं, जिनको घुट-घुटकर सांस आती है। वहीं कम सांस आने का मतलब है कि आपके फेफड़े बीमार हैं। सांस कम आने से कई नुकसान होते हैं, जैसे - दिल पर दबाव बढ़ना, जल्दी थकान महसूस होना, दिल का जल्दी थक जाना, फेफड़ों पर बोझ, मानसिक तनाव, दिमाग पर असर और गंभीर बीमारी आदि के संकेत शामिल हैं।

आपको बता दें कि फेफड़े करीब 6 लीटर हवा को पकड़ सकते हैं, जिसको टोटल लंग कैपेसिटी कहा जाता है। वहीं इसका मतलब यह है कि जब हम पूरी सांस अंदर लेते हैं, तो फेफड़ों में कुल इतनी हवा समा सकती है, जितनी की एक सामान्य वयस्क एक मिनट में 12 से 15 सांसे लेता है। लेकिन स्मोकिंग करने और एक्सरसाइज न करने और अन्य कई कारणों से फेफड़ों की सांस लेने की क्षमता धीरे-धीरे कम होने लगती है। जिस कारण डायाफ्राम कमजोर हो जाती है और फेफड़ों की लोच घट जाती है। ऐसे में आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको ऐसे आसन के बारे में बताने जा रहे हैं, जिनको करने से आप फेफड़ों के सांस लेने की क्षमता को बढ़ा सकते हैं।

इसे भी पढ़ें: दिवाली पर क्यों है जिमीकंद खाने की प्रथा? सिर्फ शुभ ही नहीं, सेहत का खजाना भी है ये सब्जी


कुंभक प्राणायाम

इसको करने से फेफड़े मजबूत होते हैं। इस आसन को करने के लिए सांस को थोड़ी देर तक रोककर रखा जाता है। सबसे पहले ध्यान मुद्रा में बैठें और रीढ़ को सीधा रखें। फिर 4 सेकेंड तक सांस अंदर लें और फिर 8 सेकेंड तक सांस रोककर रखें। इसके बाद 4 सेकेंड में धीरे-धीरे छोड़ दें। इस आसन को रोजाना करने से फेफड़ों की क्षमता और सांस लेने की शक्ति बढ़ती है।

इंटरकोस्टल ब्रीदिंग

इंटरकोस्टल ब्रीदिंग का अभ्यास करने से पसलियां और उनसे जुड़ी मांसपेशियां मजबूत होती हैं। इसको करने के लिए आराम से बैठ जाएं और हाथों से पसलियों को पकड़ें। फिर गहरी सांस अंदर लें और पसलियों को फैसने दें। वहीं सांस छोड़ते समय वापस सामान्य स्थिति में आएं। इससे फेफड़ों में ज्यादा हवा भरती है और शरीर को बेहतर तरीके से ऑक्सीजन मिलती है।

भस्त्रिका प्राणायाम

इस आसन को बेलोज ब्रीदिंग भी कहा जाता है। इस आसन में तेजी से सांस लेना और छोड़ना शामिल है। इस आसन को करने के लिए पहले ध्यान मुद्रा में बैठें और फिर 1-2 बार लंबी सांस लें और छोड़ें। फिर सांस रोककर पेट को तेजी से अंदर-बाहर करें और इसको कम से कम 5 से 15 बार करना चाहिए। इस आसन को करने से फेफड़े साफ होते हैं, शरीर ऊर्जावान होता है और सांस लेने की क्षमता बढ़ती है।

ताड़ासन

तड़ासन पूरे शरीर को खींचता है और फेफड़ों को खोलता है। इस आसन को करने के लिए सीधे खड़े हो जाएं और पैरों में 1 फुट की दूरी रखें। अब सांस अंदर लेते हुए हाथों को ऊपर की ओर उठाएं और पंजों के बल खड़े हो जाएं। कुछ देर इस स्थिति में रहते हुए सांस छोड़ते हुए हाथ नीचे आएं। इससे पसलियां और डायाफ्राम मजबूत होती हैं।

कोणासन-2

इस आसन को करने से फेफड़ों के छोटे-छोटे हिस्से सक्रिय होते हैं। इस आसन को करने के लिए पैरों को 2.5 से 3 फीट की दूरी पर रखकर खड़े हो। फिर सांस अंदर लेते हुए हाथ को सिर के पास ले जाएं और धीरे-धीरे एक तरफ झुकें। थोड़ी देर सांस रोकें और फिर सांस छोड़ते हुए सामान्य स्थिति में वापस आएं। फिर दूसरे ओर से भी यह प्रक्रिया दोहराएं। इससे शरीर में ज्यादा ऑक्सीजन पहुंचता है और फेफड़े मजबूत होते हैं।

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