Hanuman Jayanti पर इस विधि से करें सुंदरकांड पाठ, बजरंगबली देंगे Powerful Blessings, जानें Rules

आज यानी की 02 अप्रैल को हनुमान जन्मोत्सव मनाया जा रहा है। हिंदू धर्म में हनुमान जी की आराधना का विशेष महत्व माना जाता है। बता दें कि बजरंगबली को 8 चिरंजीवियों में से एक माना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि चैत्र माह की पूर्णिमा तिथि को हनुमान जी का जन्म हुआ था। इसलिए हर साल इस दिन को हनुमान जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है। इस दिन विधिविधान से हनुमान जी की पूजा करने से और सुंदरकांड का पाठ करने से जातक की सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। वहीं हनुमान जी की कृपा से जीवन में ऐश्वर्य, धन, बल और बुद्धि की प्राप्ति होती है। ऐसे में आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको बताने जा रहे हैं कि हनुमान जन्मोत्सव पर किस तरह से सुंदरकांड का पाठ करना चाहिए।जानिए क्या है सुंदरकांडरामचरितमानस का पांचवां अध्याय सुंदरकांड है। सुंदरकांड की रचना गोस्वामी तुलसीदास ने 16वीं शताब्दी में की थी। यह एकमात्र ऐसा खंड है, जो पूरी तरह से हनुमान जी को समर्पित है। सुंदरकांड में बजरंगबली द्वारा मां सीता की खोज, सुरसा राक्षसी को पराजित करना, लंका प्रवेश, अशोक वाटिका नष्ट करना और लंका दहन जैसे उद्धरण मिलते हैं। सुंदरकांड की हर घटना आध्यात्मिक रूप से प्रासंगिक और बेहद शक्तिशाली है। इसलिए सुंदरकांड को एक प्रमुख योग शास्त्र भी माना जाता है।इसे भी पढ़ें: Hanuman Chalisa Niyam: चालीसा पाठ के ये Golden Rules जरूर जानें, हर मनोकामना होगी पूरीक्यों करना चाहिए सुंदरकांड का पाठहनुमान जयंती पर सुंदरकांड का पाठ करने से आपको बजरंगबली की कृपा प्राप्त होती है। इस दिन सुंदरकांड का पाठ करना विशेष फलदायी माना जाता है। यह हनुमान जी की दिव्य शक्ति का आह्वान करता है। वहीं हनुमान जन्मोत्सव पर पढ़े गए सुंदरकांड से हर श्लोक का फल कई गुना ज्यादा मिलता है। इससे न सिर्फ पापों का नाश होता है, बल्कि यह शरीर और मन के उच्च चक्रों विशेष रूप से कंठ और हृदय को जाग्रत करने में सहायक होता है। सुंदरकांड का पाठ करने से मानसिक और आध्यात्मिक उत्थान संभव हो पाता है।ऐसे करें सुंदरकांड का पाठसुंदरकांड का पाठ सुबह या फिर शाम को 4 बजे के बाद करना चाहिए। माना जाता है कि दोपहर के 12 बजे के बाद सुंदरकांड का पाठ करना शुभ नहीं होता है। साधक को पूजा का फल नहीं मिलता है। पाठ शुरू करने से पहले एक चौकी पर हनुमान जी की प्रतिमा स्थापित करें। फिर घी का दीपक जलाएं। अब भगवान श्रीराम और हनुमान जी का स्मरण करें और सुंदरकांड का पाठ शुरू करें। इस पाठ को बीच में न छोड़ें और न बीच में किसी भी विषय पर बात करें। पाठ करते समय मन में कोई नकारात्मक विचार न आएं। श्रद्धा और भक्ति से पाठ करने से बाद हनुमान जी को फल-फूल, बूंदी या बेसन के लड्डू का भोग लगाएं। पाठ समाप्त होने के बाद हनुमान जी की आरती करना न भूलें। आरती करने के बाद बजरंगबली को चढ़ाए गए प्रसाद को वितरित करें।

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Apr 3, 2026 - 12:22
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Hanuman Jayanti पर इस विधि से करें सुंदरकांड पाठ, बजरंगबली देंगे Powerful Blessings, जानें Rules
आज यानी की 02 अप्रैल को हनुमान जन्मोत्सव मनाया जा रहा है। हिंदू धर्म में हनुमान जी की आराधना का विशेष महत्व माना जाता है। बता दें कि बजरंगबली को 8 चिरंजीवियों में से एक माना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि चैत्र माह की पूर्णिमा तिथि को हनुमान जी का जन्म हुआ था। इसलिए हर साल इस दिन को हनुमान जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है। इस दिन विधिविधान से हनुमान जी की पूजा करने से और सुंदरकांड का पाठ करने से जातक की सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। वहीं हनुमान जी की कृपा से जीवन में ऐश्वर्य, धन, बल और बुद्धि की प्राप्ति होती है। ऐसे में आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको बताने जा रहे हैं कि हनुमान जन्मोत्सव पर किस तरह से सुंदरकांड का पाठ करना चाहिए।

जानिए क्या है सुंदरकांड

रामचरितमानस का पांचवां अध्याय सुंदरकांड है। सुंदरकांड की रचना गोस्वामी तुलसीदास ने 16वीं शताब्दी में की थी। यह एकमात्र ऐसा खंड है, जो पूरी तरह से हनुमान जी को समर्पित है। सुंदरकांड में बजरंगबली द्वारा मां सीता की खोज, सुरसा राक्षसी को पराजित करना, लंका प्रवेश, अशोक वाटिका नष्ट करना और लंका दहन जैसे उद्धरण मिलते हैं। सुंदरकांड की हर घटना आध्यात्मिक रूप से प्रासंगिक और बेहद शक्तिशाली है। इसलिए सुंदरकांड को एक प्रमुख योग शास्त्र भी माना जाता है।

इसे भी पढ़ें: Hanuman Chalisa Niyam: चालीसा पाठ के ये Golden Rules जरूर जानें, हर मनोकामना होगी पूरी


क्यों करना चाहिए सुंदरकांड का पाठ

हनुमान जयंती पर सुंदरकांड का पाठ करने से आपको बजरंगबली की कृपा प्राप्त होती है। इस दिन सुंदरकांड का पाठ करना विशेष फलदायी माना जाता है। यह हनुमान जी की दिव्य शक्ति का आह्वान करता है। वहीं हनुमान जन्मोत्सव पर पढ़े गए सुंदरकांड से हर श्लोक का फल कई गुना ज्यादा मिलता है। इससे न सिर्फ पापों का नाश होता है, बल्कि यह शरीर और मन के उच्च चक्रों विशेष रूप से कंठ और हृदय को जाग्रत करने में सहायक होता है। सुंदरकांड का पाठ करने से मानसिक और आध्यात्मिक उत्थान संभव हो पाता है।

ऐसे करें सुंदरकांड का पाठ

सुंदरकांड का पाठ सुबह या फिर शाम को 4 बजे के बाद करना चाहिए।
 
माना जाता है कि दोपहर के 12 बजे के बाद सुंदरकांड का पाठ करना शुभ नहीं होता है। साधक को पूजा का फल नहीं मिलता है।
 
पाठ शुरू करने से पहले एक चौकी पर हनुमान जी की प्रतिमा स्थापित करें। फिर घी का दीपक जलाएं।
 
अब भगवान श्रीराम और हनुमान जी का स्मरण करें और सुंदरकांड का पाठ शुरू करें।
 
इस पाठ को बीच में न छोड़ें और न बीच में किसी भी विषय पर बात करें।
 
पाठ करते समय मन में कोई नकारात्मक विचार न आएं।
 
श्रद्धा और भक्ति से पाठ करने से बाद हनुमान जी को फल-फूल, बूंदी या बेसन के लड्डू का भोग लगाएं।
 
पाठ समाप्त होने के बाद हनुमान जी की आरती करना न भूलें।
 
आरती करने के बाद बजरंगबली को चढ़ाए गए प्रसाद को वितरित करें।

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