Giani Zail Singh Birth Anniversary: एक चिट्ठी से कैसे इम्प्रेस हुए थे PM Nehru, पढ़ें देश के 7वें राष्ट्रपति का सियासी सफर

आज ही के दिन यानी की 05 मई को देश के 7वें राष्ट्रपति ज्ञानी जैल सिंह का जन्म हुआ था। पंजाब से सिर्फ ज्ञानी जैल सिंह सर्वोच्च पद पर सुशोभित हुए हैं। ज्ञानी जैल सिंह का जीवन और राजनीतिक सफर बेहद दिलचस्प और विवादों से भरा रहा था। ज्ञानी जैल सिंह के राष्ट्रपति कार्यकाल में ऑपरेशन ब्लू स्टार हुआ था। तो आइए जानते हैं उनकी बर्थ एनिवर्सरी के मौके पर ज्ञानी जैल सिंह के जीवन से जुड़ी कुछ रोचक बातों के बारे में...जन्म और परिवारफरीदकोट-कोटकपूरा हाइवे के किनारे स्थित गांव संधवा में 05 मई 1916 को ज्ञानी जैल सिंह का जन्म हुआ था। इनके पिता का नाम भाई किशन सिंह और मां का नाम इंदकौर था। इनके पिता कारपेंटरी का काम करते थे। वहीं छोटी उम्र में जैल सिंह की मां का निधन हो गया था। जिसके बाद जैल सिंह का पालन-पोषण उनकी मौसी ने किया था। वहीं महज 15 साल की उम्र में वह ब्रिटिश हुकूमत के खिलाफ अकाली दल से जुड़ गए थे। वह बचपन से अपने पिता के साथ खेतों में जाते थे। पढ़ाई में खास दिलचस्पी न होने के कारण बीच में पढ़ाई छूट गई।इसे भी पढ़ें: Tyagaraja Birth Anniversary: कर्नाटक संगीत के पितामह, जानें उनकी Ram Bhakti के अनसुने किस्सेसियासी सफरबचपन से ही ज्ञानी जैल सिंह का स्वभाव क्रांतिकारियों की तरह था। वह देश को स्वराज दिलाने और अंग्रेजों को भगाने के लिए आंदोलनों में शामिल होने लगे। वहीं साल 1938 में 'प्रजा मंडल' पार्टी का गठन किया था। इस दौरान अंग्रेजों ने जैल सिंह को जेल भेज दिया और उनको 5 साल की सजा सुनाई। जैल सिंह ने पंजाब में गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी में नौकरी की, लेकिन उनका मन वहां पर भी नहीं लगा।जब ज्ञानी जैल सिंह जवान थे, तो उन्होंने फरीदकोट में तिरंगा फहराने की सोचा। लेकिन वहां के स्थानीय अफसरों ने ऐसा करने से मना कर दिया। जिसके बाद जैल सिंह ने पंडित जवाहर लाल नेहरू को पत्र लिया। उनकी इस बात से पंडित नेहरू इंप्रेस हो गए। वहीं ज्ञानी जैल सिंह ने पार्टी प्रजा मंडल को छोड़ दिया। वह पंडित नेहरू के साथ जुड़कर पंजाब में राजनीति करने लगे।देश की आजादी के बाद ज्ञानी जैल सिंह को पटियाला और पूर्वी पंजाब राज्यों के संघ का राजस्व मंत्री बनाया गया था। वहीं साल 1951 में जैल सिंह को कृषि मंत्री बनाया गया था। वह साल 1956 से 1962 तक राज्यसभा के भी सदस्य रहे थे। साल 1962 में वह पंजाब के सीएम बनें। इसके बाद साल 1982 में ज्ञानी जैल सिंह ने भारत के 7वें राष्ट्रपति के रूप में शपथ ली थी।पहले सिख राष्ट्रपतिबता दें कि ज्ञानी जैल सिंह देश के पहले सिख राष्ट्रपति थे। इनके राष्ट्रपति कार्यकाल में देश को हिलाकर रख देने का ऑपरेशन ब्लू स्टार, तत्कालीन पीएम इंदिरा गांधी की हत्या और साल 1984 में सिख विरोधी दंगे हुए थे।मृत्युवहीं 25 दिसंबर 1994 को ज्ञानी जैल सिंह ने इस दुनिया को अलविदा कह दिया।

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May 6, 2026 - 10:01
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Giani Zail Singh Birth Anniversary: एक चिट्ठी से कैसे इम्प्रेस हुए थे PM Nehru, पढ़ें देश के 7वें राष्ट्रपति का सियासी सफर
आज ही के दिन यानी की 05 मई को देश के 7वें राष्ट्रपति ज्ञानी जैल सिंह का जन्म हुआ था। पंजाब से सिर्फ ज्ञानी जैल सिंह सर्वोच्च पद पर सुशोभित हुए हैं। ज्ञानी जैल सिंह का जीवन और राजनीतिक सफर बेहद दिलचस्प और विवादों से भरा रहा था। ज्ञानी जैल सिंह के राष्ट्रपति कार्यकाल में ऑपरेशन ब्लू स्टार हुआ था। तो आइए जानते हैं उनकी बर्थ एनिवर्सरी के मौके पर ज्ञानी जैल सिंह के जीवन से जुड़ी कुछ रोचक बातों के बारे में...


जन्म और परिवार

फरीदकोट-कोटकपूरा हाइवे के किनारे स्थित गांव संधवा में 05 मई 1916 को ज्ञानी जैल सिंह का जन्म हुआ था। इनके पिता का नाम भाई किशन सिंह और मां का नाम इंदकौर था। इनके पिता कारपेंटरी का काम करते थे। वहीं छोटी उम्र में जैल सिंह की मां का निधन हो गया था। जिसके बाद जैल सिंह का पालन-पोषण उनकी मौसी ने किया था। वहीं महज 15 साल की उम्र में वह ब्रिटिश हुकूमत के खिलाफ अकाली दल से जुड़ गए थे। वह बचपन से अपने पिता के साथ खेतों में जाते थे। पढ़ाई में खास दिलचस्पी न होने के कारण बीच में पढ़ाई छूट गई।

इसे भी पढ़ें: Tyagaraja Birth Anniversary: कर्नाटक संगीत के पितामह, जानें उनकी Ram Bhakti के अनसुने किस्से

सियासी सफर

बचपन से ही ज्ञानी जैल सिंह का स्वभाव क्रांतिकारियों की तरह था। वह देश को स्वराज दिलाने और अंग्रेजों को भगाने के लिए आंदोलनों में शामिल होने लगे। वहीं साल 1938 में 'प्रजा मंडल' पार्टी का गठन किया था। इस दौरान अंग्रेजों ने जैल सिंह को जेल भेज दिया और उनको 5 साल की सजा सुनाई। जैल सिंह ने पंजाब में गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी में नौकरी की, लेकिन उनका मन वहां पर भी नहीं लगा।

जब ज्ञानी जैल सिंह जवान थे, तो उन्होंने फरीदकोट में तिरंगा फहराने की सोचा। लेकिन वहां के स्थानीय अफसरों ने ऐसा करने से मना कर दिया। जिसके बाद जैल सिंह ने पंडित जवाहर लाल नेहरू को पत्र लिया। उनकी इस बात से पंडित नेहरू इंप्रेस हो गए। वहीं ज्ञानी जैल सिंह ने पार्टी प्रजा मंडल को छोड़ दिया। वह पंडित नेहरू के साथ जुड़कर पंजाब में राजनीति करने लगे।

देश की आजादी के बाद ज्ञानी जैल सिंह को पटियाला और पूर्वी पंजाब राज्यों के संघ का राजस्व मंत्री बनाया गया था। वहीं साल 1951 में जैल सिंह को कृषि मंत्री बनाया गया था। वह साल 1956 से 1962 तक राज्यसभा के भी सदस्य रहे थे। साल 1962 में वह पंजाब के सीएम बनें। इसके बाद साल 1982 में ज्ञानी जैल सिंह ने भारत के 7वें राष्ट्रपति के रूप में शपथ ली थी।

पहले सिख राष्ट्रपति

बता दें कि ज्ञानी जैल सिंह देश के पहले सिख राष्ट्रपति थे। इनके राष्ट्रपति कार्यकाल में देश को हिलाकर रख देने का ऑपरेशन ब्लू स्टार, तत्कालीन पीएम इंदिरा गांधी की हत्या और साल 1984 में सिख विरोधी दंगे हुए थे।

मृत्यु

वहीं 25 दिसंबर 1994 को ज्ञानी जैल सिंह ने इस दुनिया को अलविदा कह दिया।

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