आजकल डेटिंग वर्ल्ड में एक नया ट्रेंड काफी वायरल हो रहा है, जिसे वाइल्ड फ्लावरिंग (Wild Flowering) कहा जा रहा है। यह रोमांस और रिलेशनशिप का एक बिल्कुल नया और कूल तरीका बनकर उभरा है। आइए समझते हैं कि आखिर यह वाइल्ड फ्लावरिंग क्या बला है।
क्या है वाइल्ड फ्लावरिंग?
यह ट्रेंड वाइल्ड फ्लॉवर यानी जंगली फूल से इंस्पायर्ड है, जो बिना किसी खास केयर, प्लानिंग या बंदिशों के अपने आप खिलता है। ठीक वैसे ही, वाइल्ड फ्लावरिंग एक ऐसी रिलेशनशिप है जिसमें दो लोग बिना किसी फ्यूचर प्लानिंग या कमिटमेंट के प्रेशर के एक साथ रहते हैं। यह रिश्ते को बिना किसी हड़बड़ी के, बिल्कुल नैचुरली ग्रो होने का पूरा स्पेस देता है।
वाइल्ड फ्लावरिंग के फायदे
नो फ्यूचर टेंशन: यह कपल को बिना किसी कल की चिंता के, आज में जीने और अपने कनेक्शन को खुलकर एन्जॉय करने की पूरी आजादी देता है।
नो लेबल्स: इसमें रिश्ते को तुरंत लॉन्ग-टर्म या सीरियस जैसा कोई हैवी टैग या लेबल देने की जल्दी नहीं होती।
लो एक्सपेक्टेशन्स: इस तरह के रिलेशनशिप में लोग उम्मीदें कम रखते हैं और सिर्फ प्रेजेंस का मजा लेने पर फोकस करते हैं।
यह ट्रेंड क्यों बढ़ रहा है?
इस ट्रेंड के पॉप्युलर होने की सबसे बड़ी वजह डेटिंग बर्नआउट है। हाल ही की एक स्टडी के मुताबिक, आज के युवा डेटिंग के प्रेशर और उससे होने वाले मेंटल स्ट्रेस से बचना चाहते हैं। वाइल्ड फ्लावरिंग उन्हें इस प्रेशर से सेफ रखती है और एक ऐसा बॉन्ड देती है जो दोस्ती से कुछ ज्यादा होता है। यह मेंटल पीस देने के साथ-साथ रिश्ते की शुरुआत एक स्ट्रॉन्ग फ्रेंडशिप से करने का मौका देता है।
वाइल्ड फ्लावरिंग के नुकसान
इमोशनल रिस्क: यह उन लोगों के लिए बिल्कुल सही नहीं है जो बहुत ज्यादा इमोशनल हैं और चीजों को काफी सीरियसली लेते हैं।
नो कमिटमेंट: इसमें कमिटमेंट से ज्यादा पर्सनल फ्रीडम पर फोकस होता है, इसलिए कोई भी इंसान एक साथ कई कनेक्शन रख सकता है।
मिसकम्युनिकेशन: अगर एक पार्टनर सीरियस हो और दूसरा सिर्फ वाइल्ड फ्लावरिंग मोड में हो, तो रिश्ते का बैलेंस बिगड़ सकता है और दिल टूट सकता है।