FIFA World Cup 2026: Refugee Camp से World Cup तक, Australian Team के इन खिलाड़ियों का सफर आपको हैरान कर देगा

दुनिया के कई देशों में प्रवासी विरोधी माहौल के बीच आस्ट्रेलिया ने अपनी विश्व कप फुटबॉल टीम में कई प्रवासियों को शामिल करके संदेश दिया है कि यह खेल सभी के लिये है। आस्ट्रेलिया समेत दुनिया के कई देशों में इस समय प्रवासी विरोधी माहौल देखा जा रहा है जिनमें सह मेजबान अमेरिका भी शामिल है। प्रोफेशनल फुटबॉलर्स आस्ट्रेलिया द्वारा जारी वीडियो में आस्ट्रेलियाई विश्व कप खिलाड़ी अवेर माबिल भी है जो कीनिया में एक शरणार्थी शिविर में पैदा हुआ था और जिसके माता पिता दक्षिणी सूडान से हैं। माबिल ने कहा ,‘‘ इस जर्सी के पीछे बहुत बड़ी ‘जर्नी’ (सफर) है। आस्ट्रेलियाई फुटबॉल टीम में होने के कई मायने हैं लेकिन लक्ष्य एक ही है , देश का नाम रोशन करना।’’ माबिल आस्ट्रेलियाई टीम में शामिल तीन खिलाड़ियों में से हैं जिनका जन्म शरणार्थी शिविर में हुआ। फॉरवर्ड मोहम्मद ताउरे का जन्म गिनिया के ऐसे ही शिविर में हुआ और उसके माता पिता लाइबेरिया से हैं। स्ट्राइकर नेस्टोरी इरांकुंडा तंजानिया के शरणार्थी शिविर में पैदा हुआ जब उनके माता पिता बुरूंडी से भाग निकले थे। अब परिवार एडीलेड में रहता है। ताउरे और इरांकुंडा पहली बार विश्व कप खेलेंगे जबकि माबिल दूसरी बार फुटबॉल के इस महासमर में उतरेंगे। आस्ट्रेलियाई फुटबॉल टीम (सॉकरूज) का यह संदेश दुनिया भर के प्रवासियों के लिए एक मुश्किल समय में आया है। इस महीने की शुरुआत में उत्तरी आयरलैंड में चाकू से हुए एक हमले के बाद दो रातों तक काफी दंगे हुए, जिन्हें प्रवासियों के खिलाफ भड़काऊ बयानों ने और हवा दी। अमेरिका में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने प्रवास के खिलाफ कड़े कदम उठाए हैं। वीजा पाबंदियों का असर विश्व कप पर भी पड़ा है और सोमालिया के रेफरी ओमर आर्टन को देश में घुसने की इजाजत नहीं दी गई।

PNSPNS
Jun 13, 2026 - 13:17
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FIFA World Cup 2026: Refugee Camp से World Cup तक, Australian Team के इन खिलाड़ियों का सफर आपको हैरान कर देगा

दुनिया के कई देशों में प्रवासी विरोधी माहौल के बीच आस्ट्रेलिया ने अपनी विश्व कप फुटबॉल टीम में कई प्रवासियों को शामिल करके संदेश दिया है कि यह खेल सभी के लिये है। आस्ट्रेलिया समेत दुनिया के कई देशों में इस समय प्रवासी विरोधी माहौल देखा जा रहा है जिनमें सह मेजबान अमेरिका भी शामिल है। प्रोफेशनल फुटबॉलर्स आस्ट्रेलिया द्वारा जारी वीडियो में आस्ट्रेलियाई विश्व कप खिलाड़ी अवेर माबिल भी है जो कीनिया में एक शरणार्थी शिविर में पैदा हुआ था और जिसके माता पिता दक्षिणी सूडान से हैं।

माबिल ने कहा ,‘‘ इस जर्सी के पीछे बहुत बड़ी ‘जर्नी’ (सफर) है। आस्ट्रेलियाई फुटबॉल टीम में होने के कई मायने हैं लेकिन लक्ष्य एक ही है , देश का नाम रोशन करना।’’ माबिल आस्ट्रेलियाई टीम में शामिल तीन खिलाड़ियों में से हैं जिनका जन्म शरणार्थी शिविर में हुआ। फॉरवर्ड मोहम्मद ताउरे का जन्म गिनिया के ऐसे ही शिविर में हुआ और उसके माता पिता लाइबेरिया से हैं। स्ट्राइकर नेस्टोरी इरांकुंडा तंजानिया के शरणार्थी शिविर में पैदा हुआ जब उनके माता पिता बुरूंडी से भाग निकले थे।

अब परिवार एडीलेड में रहता है। ताउरे और इरांकुंडा पहली बार विश्व कप खेलेंगे जबकि माबिल दूसरी बार फुटबॉल के इस महासमर में उतरेंगे। आस्ट्रेलियाई फुटबॉल टीम (सॉकरूज) का यह संदेश दुनिया भर के प्रवासियों के लिए एक मुश्किल समय में आया है। इस महीने की शुरुआत में उत्तरी आयरलैंड में चाकू से हुए एक हमले के बाद दो रातों तक काफी दंगे हुए, जिन्हें प्रवासियों के खिलाफ भड़काऊ बयानों ने और हवा दी। अमेरिका में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने प्रवास के खिलाफ कड़े कदम उठाए हैं। वीजा पाबंदियों का असर विश्व कप पर भी पड़ा है और सोमालिया के रेफरी ओमर आर्टन को देश में घुसने की इजाजत नहीं दी गई।

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