FDI proposals: भारत ने 2025-26 में चीन के एक और हांगकांग के 13 प्रस्तावों को दी मंजूरी

नयी दिल्ली, दो अगस्त भारत ने पिछले वित्त वर्ष 2025-26 में चीन के केवल एक एफडीआई प्रस्ताव को मंजूरी दी, जिसका मूल्य एक करोड़ रुपये था। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार हांगकांग से आए 610.42 करोड़ रुपये के 13 आवेदनों को मंजूरी दी गई। ये मंजूरियां इसलिए महत्वपूर्ण हैं क्योंकि भारत के साथ भूमि सीमा साझा करने वाले देशों से निवेश के लिए अप्रैल 2020 से पूर्व सरकारी मंजूरी अनिवार्य कर दी गई है।ऐसा उद्योग और आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (डीपीआईआईटी) के प्रेस नोट 3 के तहत किया गया। यह उपाय कोविड-19 महामारी के दौरान भारतीय कंपनियों के अधिग्रहणों को रोकने के लिए किया गया था। डीपीआईआईटी के आंकड़ों के अनुसार कुल मिलाकर सरकार ने अप्रैल 2025 से मार्च 2026 के दौरान 10,292.67 करोड़ रुपये (1.18 अरब अमेरिकी डॉलर) मूल्य के 63 एफडीआई (प्रत्यक्ष विदेशी निवेश) प्रस्तावों को मंजूरी दी है।मूल्य के लिहाज से सिंगापुर एफडीआई प्रस्तावों के सबसे बड़े स्रोत के रूप में उभरा, जिसके 3,259.88 करोड़ रुपये के पांच प्रस्तावों को मंजूरी मिली। इसके बाद ब्रिटेन का स्थान रहा, जिसके 2,477.67 करोड़ रुपये के पांच प्रस्तावों को मंजूरी दी गई, तथा थाईलैंड के 1,600 करोड़ रुपये के दो प्रस्तावों को स्वीकृति मिली। भारत को सीधे चीन से कभी भी महत्वपूर्ण निवेश प्राप्त नहीं हुआ है।अप्रैल 2000 और मार्च 2026 के बीच भारत में कुल एफडीआई इक्विटी प्रवाह में चीन का स्थान 23वां है, जिसकी हिस्सेदारी केवल 0.32 प्रतिशत है।

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Aug 3, 2026 - 10:02
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FDI proposals: भारत ने 2025-26 में चीन के एक और हांगकांग के 13 प्रस्तावों को दी मंजूरी

नयी दिल्ली, दो अगस्त भारत ने पिछले वित्त वर्ष 2025-26 में चीन के केवल एक एफडीआई प्रस्ताव को मंजूरी दी, जिसका मूल्य एक करोड़ रुपये था। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार हांगकांग से आए 610.42 करोड़ रुपये के 13 आवेदनों को मंजूरी दी गई। ये मंजूरियां इसलिए महत्वपूर्ण हैं क्योंकि भारत के साथ भूमि सीमा साझा करने वाले देशों से निवेश के लिए अप्रैल 2020 से पूर्व सरकारी मंजूरी अनिवार्य कर दी गई है।

ऐसा उद्योग और आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (डीपीआईआईटी) के प्रेस नोट 3 के तहत किया गया। यह उपाय कोविड-19 महामारी के दौरान भारतीय कंपनियों के अधिग्रहणों को रोकने के लिए किया गया था। डीपीआईआईटी के आंकड़ों के अनुसार कुल मिलाकर सरकार ने अप्रैल 2025 से मार्च 2026 के दौरान 10,292.67 करोड़ रुपये (1.18 अरब अमेरिकी डॉलर) मूल्य के 63 एफडीआई (प्रत्यक्ष विदेशी निवेश) प्रस्तावों को मंजूरी दी है।

मूल्य के लिहाज से सिंगापुर एफडीआई प्रस्तावों के सबसे बड़े स्रोत के रूप में उभरा, जिसके 3,259.88 करोड़ रुपये के पांच प्रस्तावों को मंजूरी मिली। इसके बाद ब्रिटेन का स्थान रहा, जिसके 2,477.67 करोड़ रुपये के पांच प्रस्तावों को मंजूरी दी गई, तथा थाईलैंड के 1,600 करोड़ रुपये के दो प्रस्तावों को स्वीकृति मिली। भारत को सीधे चीन से कभी भी महत्वपूर्ण निवेश प्राप्त नहीं हुआ है।

अप्रैल 2000 और मार्च 2026 के बीच भारत में कुल एफडीआई इक्विटी प्रवाह में चीन का स्थान 23वां है, जिसकी हिस्सेदारी केवल 0.32 प्रतिशत है।

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