ED की चार्जशीट के बाद नेशनल हेराल्ड केस में बड़ा एक्शन, कोर्ट ने सोनिया गांधी और राहुल गांधी को जारी किया नोटिस

दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी, राहुल गांधी और अन्य प्रस्तावित आरोपियों को नेशनल हेराल्ड मनी लॉन्ड्रिंग मामले में उनके खिलाफ दायर आरोपपत्र पर संज्ञान लेने के सवाल पर सुनवाई के लिए नोटिस जारी किया। कोर्ट ने कहा कि आरोपपत्र में कमियों को दूर कर दिया गया है और अब मुद्दा यह है कि क्या भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की धारा 223 के तहत नोटिस जारी किया जाना चाहिए। जज ने कहा कि प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा अपने आरोपपत्र में नामित राहुल गांधी, सोनिया गांधी और अन्य लोगों को संज्ञान के समय सुनवाई का अधिकार है।इसे भी पढ़ें: हम तो चैन की नींद सो लेंगे, पीएम के लिए सोना मुश्किल होने वाला है, मोदी के बयान पर कांग्रेस का पलटवार मामले की अगली सुनवाई 8 मई को होगी। अदालत ने कहा कि मामला विचाराधीन चरण में है। इस चरण में अभियुक्तों को यह विशेष अधिकार है कि अदालत द्वारा उनके खिलाफ औपचारिक रूप से मामला उठाने का निर्णय लेने से पहले उनकी बात सुनी जाए। यह अधिकार धारा 223 के एक विशिष्ट प्रावधान से आता है, जो प्रक्रिया के इस प्रारंभिक चरण में अभियुक्तों को एक अद्वितीय (या स्व-विशिष्ट) कानूनी सुरक्षा प्रदान करता है।

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May 3, 2025 - 03:30
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ED की चार्जशीट के बाद नेशनल हेराल्ड केस में बड़ा एक्शन, कोर्ट ने सोनिया गांधी और राहुल गांधी को जारी किया नोटिस

दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी, राहुल गांधी और अन्य प्रस्तावित आरोपियों को नेशनल हेराल्ड मनी लॉन्ड्रिंग मामले में उनके खिलाफ दायर आरोपपत्र पर संज्ञान लेने के सवाल पर सुनवाई के लिए नोटिस जारी किया। कोर्ट ने कहा कि आरोपपत्र में कमियों को दूर कर दिया गया है और अब मुद्दा यह है कि क्या भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की धारा 223 के तहत नोटिस जारी किया जाना चाहिए। जज ने कहा कि प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा अपने आरोपपत्र में नामित राहुल गांधी, सोनिया गांधी और अन्य लोगों को संज्ञान के समय सुनवाई का अधिकार है।

इसे भी पढ़ें: हम तो चैन की नींद सो लेंगे, पीएम के लिए सोना मुश्किल होने वाला है, मोदी के बयान पर कांग्रेस का पलटवार

मामले की अगली सुनवाई 8 मई को होगी। अदालत ने कहा कि मामला विचाराधीन चरण में है। इस चरण में अभियुक्तों को यह विशेष अधिकार है कि अदालत द्वारा उनके खिलाफ औपचारिक रूप से मामला उठाने का निर्णय लेने से पहले उनकी बात सुनी जाए। यह अधिकार धारा 223 के एक विशिष्ट प्रावधान से आता है, जो प्रक्रिया के इस प्रारंभिक चरण में अभियुक्तों को एक अद्वितीय (या स्व-विशिष्ट) कानूनी सुरक्षा प्रदान करता है।

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