Chai Par Sameeksha: Mamata Banerjee, Abhishek Banerjee, TMC से किसी को सहानुभूति क्यों नहीं हो रही?

प्रभासाक्षी के साप्ताहिक कार्यक्रम चाय पर समीक्षा में इस सप्ताह हमने तृणमूल कांग्रेस में जारी उठापटक पर चर्चा की। हमेशा की तरह इस कार्यक्रम में मौजूद रहे प्रभासाक्षी के संपादक नीरज कुमार दुबे। इसके अलावा हमने इंडिया गठबंधन और एनडीए गठबंधन की हुई बैठकों पर भी चर्चा की। नीरज दुबे ने साफ तौर पर कहा कि पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के नतीजे ने सिर्फ वहां की राजनीति को प्रभावित नहीं किया है बल्कि राष्ट्रीय राजनीति को भी परिवर्तन के दौर में पहुंचा दिया है। उन्होंने कहा है कि ममता बनर्जी का भी कांग्रेस के लिए हृदय परिवर्तन दिखाई दे रहा है। नीरज दुबे ने कहा कि तृणमूल कांग्रेस कभी भी कोई विचारधारा के नाम पर नहीं बनी थी। सिर्फ लेफ्ट की सरकार को हटाना तृणमूल कांग्रेस का मकसद था और आज जब तृणमूल कांग्रेस सत्ता में नहीं है तो वह पार्टी अब पूरी तरीके से टूटती हुई दिखाई दे रही है। इसका एक कारण यह भी है कि 15 सालों में तृणमूल सरकार के दौरान पश्चिम बंगाल की जनता को कई मुश्किलों का सामना करना पड़ा है और शायद अब वहां की जनता तृणमूल कांग्रेस से कोई बदला लेने के मूड में दिखाई दे रही है। नीरज दुबे ने साफ तौर पर कहा कि अगर पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस ने इतने सालों तक राज किया है तो इसका बड़ा कारण यह भी है कि कई लोगों को तृणमूल कांग्रेस ने द्वारा धमका कर वोट नहीं देने दिया जिसका फायदा हमेशा उसे पार्टी को हुआ और वह पार्टी सरकार में बनी रही। इसे भी पढ़ें: गुमनाम पार्टी में क्यों शामिल हुए TMC के नामी सांसद? दलबदल विरोधी नारे वाला दल क्यों बना तृणमूल के बागियों का नया ठिकाना?दुबे ने कहा कि आज तृणमूल कांग्रेस अस्तित्व के संकट से जूझ रही है। यही कारण है कि कांग्रेस के साथ उसके विलय की चर्चा शुरू हो जाती है। लेकिन कभी यही ममता बनर्जी थीं जो कांग्रेस को भाव नहीं देती थीं। यही ममता बनर्जी थी जो 2024 लोकसभा चुनाव से पहले कहा करती थीं कि कांग्रेस को तो 40 सीटे भी नहीं आएंगी। लेकिन आज बदली हुई परिस्थितियों में ममता बनर्जी मजबूर हुई हैं। ममता बनर्जी के साथ दिखाई देने वाले नेताओं को भी आज विरोध प्रदर्शन का सामना करना पड़ा है और यह साफ तौर पर तृणमूल कांग्रेस के नेताओं को यह लग रहा है कि अगर वह ममता बनर्जी के साथ या अभिषेक बनर्जी के साथ खड़े रहे तो उनके लिए जनता के बीच जाना मुश्किल हो जाएगा। नीरज दुबे ने कहा कि विपक्षी एकता को बहुत ज्यादा नुकसान न पहुंचे इसलिए यह बैठक बुलाई गई थी। इसमें इंडिया गठबंधन के तमाम नेता शामिल हुए थे। लेकिन आप देखिए कि इस बैठक में उमर अब्दुल्ला शामिल हुए थे। लेकिन बैठक से निकलने के बाद ही उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तारीफ की। इसके अलावा नीरज दुबे ने कहा कि उस बैठक में जितने भी दल शामिल हुए थे, उन सब ने कांग्रेस पर ठीकरा फोड़ा। कांग्रेस पर कई आप भी लगाए हैं। वहीं, एनडीए की बैठक को लेकर नीरज दुबे ने कहा कि जब भी दिल्ली में कोई बड़ा कार्यक्रम होता है और अलग-अलग राज्यों से नेता दिल्ली आते हैं। तब इस तरह की बैठकें होती रहती हैं। इसके अलावा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने सहयोगों को हमेशा साथ रखने की कोशिश करते हैं। फिलहाल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा का पूरा फोकस उत्तर प्रदेश पर है जो चुनावी दृष्टिकोण से बेहद महत्वपूर्ण है।

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Jun 17, 2026 - 09:08
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Chai Par Sameeksha: Mamata Banerjee, Abhishek Banerjee, TMC से किसी को सहानुभूति क्यों नहीं हो रही?
प्रभासाक्षी के साप्ताहिक कार्यक्रम चाय पर समीक्षा में इस सप्ताह हमने तृणमूल कांग्रेस में जारी उठापटक पर चर्चा की। हमेशा की तरह इस कार्यक्रम में मौजूद रहे प्रभासाक्षी के संपादक नीरज कुमार दुबे। इसके अलावा हमने इंडिया गठबंधन और एनडीए गठबंधन की हुई बैठकों पर भी चर्चा की। नीरज दुबे ने साफ तौर पर कहा कि पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के नतीजे ने सिर्फ वहां की राजनीति को प्रभावित नहीं किया है बल्कि राष्ट्रीय राजनीति को भी परिवर्तन के दौर में पहुंचा दिया है। उन्होंने कहा है कि ममता बनर्जी का भी कांग्रेस के लिए हृदय परिवर्तन दिखाई दे रहा है। 

नीरज दुबे ने कहा कि तृणमूल कांग्रेस कभी भी कोई विचारधारा के नाम पर नहीं बनी थी। सिर्फ लेफ्ट की सरकार को हटाना तृणमूल कांग्रेस का मकसद था और आज जब तृणमूल कांग्रेस सत्ता में नहीं है तो वह पार्टी अब पूरी तरीके से टूटती हुई दिखाई दे रही है। इसका एक कारण यह भी है कि 15 सालों में तृणमूल सरकार के दौरान पश्चिम बंगाल की जनता को कई मुश्किलों का सामना करना पड़ा है और शायद अब वहां की जनता तृणमूल कांग्रेस से कोई बदला लेने के मूड में दिखाई दे रही है। नीरज दुबे ने साफ तौर पर कहा कि अगर पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस ने इतने सालों तक राज किया है तो इसका बड़ा कारण यह भी है कि कई लोगों को तृणमूल कांग्रेस ने द्वारा धमका कर वोट नहीं देने दिया जिसका फायदा हमेशा उसे पार्टी को हुआ और वह पार्टी सरकार में बनी रही। 

इसे भी पढ़ें: गुमनाम पार्टी में क्यों शामिल हुए TMC के नामी सांसद? दलबदल विरोधी नारे वाला दल क्यों बना तृणमूल के बागियों का नया ठिकाना?

दुबे ने कहा कि आज तृणमूल कांग्रेस अस्तित्व के संकट से जूझ रही है। यही कारण है कि कांग्रेस के साथ उसके विलय की चर्चा शुरू हो जाती है। लेकिन कभी यही ममता बनर्जी थीं जो कांग्रेस को भाव नहीं देती थीं। यही ममता बनर्जी थी जो 2024 लोकसभा चुनाव से पहले कहा करती थीं कि कांग्रेस को तो 40 सीटे भी नहीं आएंगी। लेकिन आज बदली हुई परिस्थितियों में ममता बनर्जी मजबूर हुई हैं। ममता बनर्जी के साथ दिखाई देने वाले नेताओं को भी आज विरोध प्रदर्शन का सामना करना पड़ा है और यह साफ तौर पर तृणमूल कांग्रेस के नेताओं को यह लग रहा है कि अगर वह ममता बनर्जी के साथ या अभिषेक बनर्जी के साथ खड़े रहे तो उनके लिए जनता के बीच जाना मुश्किल हो जाएगा। 

नीरज दुबे ने कहा कि विपक्षी एकता को बहुत ज्यादा नुकसान न पहुंचे इसलिए यह बैठक बुलाई गई थी। इसमें इंडिया गठबंधन के तमाम नेता शामिल हुए थे। लेकिन आप देखिए कि इस बैठक में उमर अब्दुल्ला शामिल हुए थे। लेकिन बैठक से निकलने के बाद ही उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तारीफ की। इसके अलावा नीरज दुबे ने कहा कि उस बैठक में जितने भी दल शामिल हुए थे, उन सब ने कांग्रेस पर ठीकरा फोड़ा। कांग्रेस पर कई आप भी लगाए हैं। वहीं, एनडीए की बैठक को लेकर नीरज दुबे ने कहा कि जब भी दिल्ली में कोई बड़ा कार्यक्रम होता है और अलग-अलग राज्यों से नेता दिल्ली आते हैं। तब इस तरह की बैठकें होती रहती हैं। इसके अलावा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने सहयोगों को हमेशा साथ रखने की कोशिश करते हैं। फिलहाल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा का पूरा फोकस उत्तर प्रदेश पर है जो चुनावी दृष्टिकोण से बेहद महत्वपूर्ण है।

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