BRICS Pay: 90 बिलियन का झटका, अमेरिका से भयंकर भिड़ गया चीन

वाशिंगटन के गलियारों में इस समय जो सन्नाटा है, वह किसी बड़े तूफान के आने की आहट है। कल तक जो अमेरिका दुनिया को टैरिफ की धमकियां देता था, आज वह खुद अपने ही बुने हुए जाल में फंस गया है। चीन ने 90 अरब डॉलर का ऐसा आर्थिक बम फोड़ा है कि अमेरिका की कृषि से लेकर एनर्जी सेक्टर तक की नीव हिल गई है। लेकिन यह तो सिर्फ झांकी है। असली खबर उस 23 जुलाई 2026 के फैसले में छिपी है जिसने रातों-रात बीजिंग और वाशिंगटन के रिश्तों को उस नए मोड़ पर खड़ा कर दिया जहां से वापसी नामुमकिन है। दरअसल पीटरसन इंस्टट्यूट फॉर इंटरनेशनल इकॉनमी की रिपोर्ट कोई सामान्य चेतावनी नहीं है। यह अमेरिका के लिए एक डेथ वारंट की तरह है।  अगर 2017 में ट्रंप ने वो ट्रेड वॉर शुरू ना किया होता तो आज अमेरिकी कंपनियां हर साल $90 अरब डॉलर का एक्स्ट्रा प्रॉफिट कमा रही होती। यह पैसा कहां से आता? यह पैसा आता अमेरिका के सोयाबीन किसानों की जेब से, टेक्सास के तेल कुओं से और मिड वेस्ट की फैक्ट्रियों से। लेकिन आज हालत क्या है? इसे भी पढ़ें: BRICS शिखर सम्मेलन में शामिल होने के लिए बांग्लादेश को निमंत्रणचीन जो दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी आयात करने वाली अर्थव्यवस्था है उसने अमेरिका की तरफ पीट कर लिया है। निर्यात 2008 की वैश्विक मंदी के स्तर पर गिर चुका है। इसका सीधा मतलब है कि अमेरिका की ग्रोथ अब रिवर्स गियर में है। दोस्तों, अब बात करते हैं उस सेक्टर की जिसने अमेरिका की कमर तोड़ दी है और उस सेक्टर का नाम है ऊर्जा यानी कि एनर्जी। अमेरिका दुनिया का सबसे बड़ा एलएनजी एक्सपोर्टर बनने का सपना देखता रहता था। लेकिन चीन ने एक ही झटके में सपने को चगनाचूर कर दिया। 2026 की शुरुआत में चीन ने अमेरिकी गैस खरीदना लगभग शून्य कर दिया। क्यों? क्योंकि टेरिफ की वजह से अमेरिकी गैस इतनी महंगी हो गई कि चीन को क़तर और रूस से गैस मंगाना सस्ता पड़ने लगा। हैरानी की बात यह है कि चीन की चालाकी यहां खत्म नहीं हुई। चीन की कंपनियों ने अमेरिका से जो गैस पहले से बुक कर रखी थी, उसे अपने देश लाने के बजाय रास्ते में ही यूरोप को महंगे दाम पर बेच दिया। यानी अमेरिका की गैस, चीन का मुनाफा और अमेरिका का बाजार खत्म। इसे भी पढ़ें: Sheikh Hasina के प्रस्तावित संबोधन पर MEA का बड़ा बयान, भारत सरकार की इसमें कोई भूमिका नहींएक्सपर्टों का मानना है कि अब चीन कभी भी अमेरिका के साथ नए लॉन्ग टर्म एग्रीमेंट नहीं करेगा। आखिर 23 जुलाई 2026 को ऐसा क्या हुआ? दरअसल अमेरिका का पुराना टेरिफ सिस्टम कानूनी लड़ाई में हार गया था। अपनी ईगो बचाने के लिए अमेरिकी प्रशासन ने सेक्शन 301 [संगीत] का इस्तेमाल किया और चीनी सामानों पर 12.5% का नया टैक्स थोप दिया। बहाना बनाया गया कि जबरन शंका। लेकिन इसके पीछे की कड़वी सच्चाई कुछ और ही थी। अमेरिका को पता था कि अगर उसने यह टेरिफ नहीं लगाया तो चीन का सस्ता सामान अमेरिकी मार्केट को पूरी तरह निकल जाएगा। लेकिन चीन ने इसका ऐसा जवाब दिया जिसकी उम्मीद पेंटागन को भी नहीं थी। 27 जुलाई 2026 को ब्लूमबर्ग ने एक ऐसी रिपोर्ट छापी जिसने वाशिंगटन की साख को मिट्टी मिला दिया।इसे भी पढ़ें: सेंट्रल एशिया के खजाने तक पहुंचा भारत, Rare Earth Minerals पर मोदी के जय ने क्या बड़ा गेम कर दिया? चीन ने दावा किया कि अमेरिका ने बंद कमरों में उनसे भीख मांगी थी कि हम टेरिफ तो लगा रहे हैं लेकिन वादा करते हैं यह 20% से ऊपर नहीं जाएगा। चीन ने इस प्राइवेट बातचीत को पब्लिक कर दिया। यह अमेरिका के लिए सबसे बड़ी शर्मिंदगी थी। इससे दुनिया को क्या मैसेज गया? यह गया कि महाशक्ति कहलाने वाला अमेरिका अब चीन के साथ डील करने के लिए मजबूर है। साल 2022 में जब रूस के डॉलर फ्रीज किए गए तब हमने कहा था कि अमेरिका अपने ही पैर पर कुल्हाड़ी मारी है। 

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Aug 5, 2026 - 15:45
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BRICS Pay: 90 बिलियन का झटका, अमेरिका से भयंकर भिड़ गया चीन
वाशिंगटन के गलियारों में इस समय जो सन्नाटा है, वह किसी बड़े तूफान के आने की आहट है। कल तक जो अमेरिका दुनिया को टैरिफ की धमकियां देता था, आज वह खुद अपने ही बुने हुए जाल में फंस गया है। चीन ने 90 अरब डॉलर का ऐसा आर्थिक बम फोड़ा है कि अमेरिका की कृषि से लेकर एनर्जी सेक्टर तक की नीव हिल गई है। लेकिन यह तो सिर्फ झांकी है। असली खबर उस 23 जुलाई 2026 के फैसले में छिपी है जिसने रातों-रात बीजिंग और वाशिंगटन के रिश्तों को उस नए मोड़ पर खड़ा कर दिया जहां से वापसी नामुमकिन है। दरअसल पीटरसन इंस्टट्यूट फॉर इंटरनेशनल इकॉनमी की रिपोर्ट कोई सामान्य चेतावनी नहीं है। यह अमेरिका के लिए एक डेथ वारंट की तरह है।  अगर 2017 में ट्रंप ने वो ट्रेड वॉर शुरू ना किया होता तो आज अमेरिकी कंपनियां हर साल $90 अरब डॉलर का एक्स्ट्रा प्रॉफिट कमा रही होती। यह पैसा कहां से आता? यह पैसा आता अमेरिका के सोयाबीन किसानों की जेब से, टेक्सास के तेल कुओं से और मिड वेस्ट की फैक्ट्रियों से। लेकिन आज हालत क्या है? 

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चीन जो दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी आयात करने वाली अर्थव्यवस्था है उसने अमेरिका की तरफ पीट कर लिया है। निर्यात 2008 की वैश्विक मंदी के स्तर पर गिर चुका है। इसका सीधा मतलब है कि अमेरिका की ग्रोथ अब रिवर्स गियर में है। दोस्तों, अब बात करते हैं उस सेक्टर की जिसने अमेरिका की कमर तोड़ दी है और उस सेक्टर का नाम है ऊर्जा यानी कि एनर्जी। अमेरिका दुनिया का सबसे बड़ा एलएनजी एक्सपोर्टर बनने का सपना देखता रहता था। लेकिन चीन ने एक ही झटके में सपने को चगनाचूर कर दिया। 2026 की शुरुआत में चीन ने अमेरिकी गैस खरीदना लगभग शून्य कर दिया। क्यों? क्योंकि टेरिफ की वजह से अमेरिकी गैस इतनी महंगी हो गई कि चीन को क़तर और रूस से गैस मंगाना सस्ता पड़ने लगा। हैरानी की बात यह है कि चीन की चालाकी यहां खत्म नहीं हुई। चीन की कंपनियों ने अमेरिका से जो गैस पहले से बुक कर रखी थी, उसे अपने देश लाने के बजाय रास्ते में ही यूरोप को महंगे दाम पर बेच दिया। यानी अमेरिका की गैस, चीन का मुनाफा और अमेरिका का बाजार खत्म। 

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एक्सपर्टों का मानना है कि अब चीन कभी भी अमेरिका के साथ नए लॉन्ग टर्म एग्रीमेंट नहीं करेगा। आखिर 23 जुलाई 2026 को ऐसा क्या हुआ? दरअसल अमेरिका का पुराना टेरिफ सिस्टम कानूनी लड़ाई में हार गया था। अपनी ईगो बचाने के लिए अमेरिकी प्रशासन ने सेक्शन 301 [संगीत] का इस्तेमाल किया और चीनी सामानों पर 12.5% का नया टैक्स थोप दिया। बहाना बनाया गया कि जबरन शंका। लेकिन इसके पीछे की कड़वी सच्चाई कुछ और ही थी। अमेरिका को पता था कि अगर उसने यह टेरिफ नहीं लगाया तो चीन का सस्ता सामान अमेरिकी मार्केट को पूरी तरह निकल जाएगा। लेकिन चीन ने इसका ऐसा जवाब दिया जिसकी उम्मीद पेंटागन को भी नहीं थी। 27 जुलाई 2026 को ब्लूमबर्ग ने एक ऐसी रिपोर्ट छापी जिसने वाशिंगटन की साख को मिट्टी मिला दिया।

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चीन ने दावा किया कि अमेरिका ने बंद कमरों में उनसे भीख मांगी थी कि हम टेरिफ तो लगा रहे हैं लेकिन वादा करते हैं यह 20% से ऊपर नहीं जाएगा। चीन ने इस प्राइवेट बातचीत को पब्लिक कर दिया। यह अमेरिका के लिए सबसे बड़ी शर्मिंदगी थी। इससे दुनिया को क्या मैसेज गया? यह गया कि महाशक्ति कहलाने वाला अमेरिका अब चीन के साथ डील करने के लिए मजबूर है। साल 2022 में जब रूस के डॉलर फ्रीज किए गए तब हमने कहा था कि अमेरिका अपने ही पैर पर कुल्हाड़ी मारी है। 

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