आज़ाद मूवी रिव्यू: आज़ाद आखिरकार सिनेमाघरों में आ गई है। आज़ाद के साथ, दो स्टार किड्स बॉलीवुड में डेब्यू कर रहे हैं: एक हैं रवीना टंडन की बेटी, राशा थडानी, और दूसरे हैं अजय देवगन के भतीजे, अमन देवगन। अभिषेक कपूर द्वारा निर्देशित इस फिल्म में अजय देवगन, डायना पेंटी, पीयूष मिश्रा और टीवी अभिनेता मोहित मलिक भी हैं। आज़ाद फिल्म में इनमें से किसी भी अभिनेता का नाम नहीं है, बल्कि यह अजय देवगन के किरदार का घोड़ा है। फिल्म की पूरी कहानी इसी घोड़े के इर्द-गिर्द घूमती है। अभिनय, निर्देशन और अन्य बातों के संदर्भ में नीचे फिल्म की विस्तृत समीक्षा प्राप्त करें।
कहानी
फिल्म की कहानी स्वतंत्रता-पूर्व युग की है, जहाँ गोविंद नाम का एक लापरवाह गाँव का लड़का है। गाँवों पर जमींदारों का कब्ज़ा है, और इन जमींदारों में से एक की एक खूबसूरत बेटी है जिसका नाम जानकी है। वह अपनी बेटी की शादी अंग्रेज कमिंग के बेटे से करना चाहता है, जिसके चलते वह अंग्रेजों की हर मांग पूरी कर रहा है। वह अंग्रेजों के लिए गांवों को खाली कराकर उन पर कब्जा भी कर रहा है। इतना ही नहीं, जो ग्रामीण कर नहीं चुका पा रहे हैं, उन्हें अंग्रेजों के बंदी बनाकर दक्षिण अफ्रीका भेजा जा रहा है।
इसके अलावा फिल्म में एक मसीहा भी है, विक्रम ठाकुर। आज़ाद में दो प्रेम कहानियां हैं, एक विक्रम ठाकुर की और दूसरी गोविंद की, जो अलग-अलग समय पर सेट हैं। विक्रम ठाकुर की मौत के बाद फिल्म में चीजें बदल जाती हैं। यह घटना गोविंद को बदल देती है। कहानी एक दिलचस्प दौड़ के साथ खत्म होती है, जिसे जीतकर गोविंद न सिर्फ अपने गांव का हीरो बन जाता है, बल्कि गांव वालों को करों से भी मुक्त कर देता है।
अभिनय
अमन देवगन ने अपनी पहली फिल्म के लिए निश्चित रूप से कड़ी मेहनत की है, जैसे घुड़सवारी, डांसिंग और बहुत कुछ। राशा थडन भी अपने लुक से प्रभावित करती हैं, हालांकि, फिल्म में उनका स्क्रीन टाइम काफी सीमित है। एकमात्र कमजोर पहलू उनके और अमन देवगन के बीच की रोमांटिक केमिस्ट्री है। इस बीच, दोनों नवोदित कलाकारों ने अपने उच्चारण पर काफी मेहनत की है, जो फिल्म में साफ झलकता है। अजय देवगन का किरदार आपको 'दिलजले' में उनके किरदार की याद दिलाएगा। उनकी मौत फिल्म का सबसे अहम और भावनात्मक मोड़ है।
डायना पेंटी ने ईमानदारी से अभिनय किया है, लेकिन उनके किरदार में दम नहीं है। जहां मोहित मलिक ने निगेटिव रोल में कमाल दिखाया है, वहीं पीयूष मिश्रा का काम फिल्म में ठीक-ठाक रहा। निर्देशन अभिषेक कपूर ने फिल्म का निर्देशन और लेखन दोनों ही किया है। फिल्म को बड़े पर्दे पर अच्छे से पेश किया गया है, लेकिन कहानी घिसी-पिटी है। एक अमीर लड़की और एक गरीब लड़के की वही कहानी, अमीरों का अत्याचार और एक अन्यायी पिता जो अपनी बेटी की मर्जी के खिलाफ उसकी शादी कर रहा है।
दमदार अभिनय के बावजूद कहानी कई हिस्सों में बोझिल हो जाती है। फिल्म की लंबाई कम की जा सकती थी, जो फिलहाल 2 घंटे 27 मिनट है। निर्देशन कुछ जगहों पर तारीफ के काबिल है, इमोशनल सीन काफी शानदार हैं। फैसला
कुल मिलाकर 'आजाद' की शुरुआत कमजोर है और कहानी में नए लोगों को स्थापित करने में फिल्म को काफी समय लगता है। कमजोर स्क्रिप्ट और रोमांटिक एंगल की कमी के कारण यह दर्शकों को आकर्षित करने में ज्यादा सफल नहीं हो पाती। फिर भी फिल्म में दमदार अभिनय को मौका दिया जा सकता है।