Ajit Doval के बयान पर मचा सियासी घमासान, Mehbooba Mufti बोलीं– गरीब युवाओं को उकसाने की कोशिश कर रहे NSA

पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) की अध्यक्ष महबूबा मुफ़्ती ने राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) अजीत डोभाल पर तीखा हमला करते हुए कहा है कि सदियों पुरानी घटनाओं के बदले की बात करना बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है। जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा कि एनएसए का कर्तव्य राष्ट्र की रक्षा करना है, लेकिन यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि उन्होंने "नफरत की सांप्रदायिक विचारधारा" में शामिल होने का विकल्प चुना है।हम आपको याद दिला दें कि दिल्ली में विकसित भारत युवा नेता संवाद के उद्घाटन समारोह में शनिवार को डोभाल ने कहा था कि भारत को न केवल सीमाओं पर, बल्कि आर्थिक रूप से भी और हर तरह से खुद को मजबूत करना होगा, ताकि हमलों और दमन के दर्दनाक इतिहास का "बदला" लिया जा सके। इसके जवाब में अपनी पोस्ट में महबूबा ने कहा, "यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि श्री डोभाल जैसे उच्च पदस्थ अधिकारी, जिनका कर्तव्य देश को आंतरिक और बाहरी नापाक मंसूबों से बचाना है, उन्होंने नफरत की सांप्रदायिक विचारधारा में शामिल होने और मुसलमानों के खिलाफ हिंसा को सामान्य बनाने का विकल्प चुना है।" उन्होंने कहा, "सदियों पुरानी घटनाओं को लेकर 21वीं सदी में बदला लेने का आह्वान करना एक डॉग व्हिसल (सांकेतिक संदेश) है, जो गरीब और अशिक्षित युवाओं को एक अल्पसंख्यक समुदाय को निशाना बनाने के लिए उकसाता है, जो पहले से ही चारों ओर से हमलों का सामना कर रहा है।"इसे भी पढ़ें: Mamata Banerjee के समर्थन में महबूबा मुफ्ती, बोलीं- वो शेरनी हैं, झुकेंगी नहींजहां तक डोभाल के बयान की बात है तो आपको बता दें कि उन्होंने कहा था कि भारत को अपनी सुरक्षा सिर्फ सीमाओं पर मजबूत नहीं करनी है, बल्कि आर्थिक और तकनीकी तौर पर भी देश को इतना मजबूत बनाना है कि हमलों और पराधीनता के अपने इतिहास का प्रतिशोध ले सकें। अपने संबोधन में डोभाल ने स्वतंत्रता के लिये किये गए संघर्षों, भारत की सभ्यता पर हुए हमलों और मजबूत नेतृत्व के महत्व का जिक्र करते हुए कहा था कि मैं गुलाम भारत में पैदा हुआ था। आप भाग्यशाली हैं कि स्वतंत्र भारत में पैदा हुए। सदियों तक हमारे पूर्वजों ने इसके लिये बहुत कुर्बानियां और अपमान सहे हैं। भगत सिंह को फांसी हुई, सुभाष चंद्र बोस को जीवन भर संघर्ष करना पड़ा, महात्मा गांधी को सत्याग्रह करना पड़ा और अनगिनत लोगों को जानें देनी पड़ीं। भारत के खुफिया ब्यूरो के प्रमुख 81 वर्षीय डोभाल ने कहा था, ‘‘हमारे गांव जले, हमारी सभ्यता को समाप्त किया गया, हमारे मंदिरों को लूटा गया और हम एक मूक दर्शक की तरह असहाय होकर देखते रहे। यह इतिहास हमें एक चुनौती देता है कि भारत के हर युवक के अंदर आग होनी चाहिये।’’ उन्होंने कहा था कि प्रतिशोध शब्द अच्छा तो नहीं है, लेकिन यह अपने आप में बड़ी शक्ति होती है। हमें अपने इतिहास का प्रतिशोध लेना है और हमें इस देश को फिर वहां पहुंचाना है, जहां हम अपने हक, अपने विचार और अपनी आस्थाओं के आधार पर एक महान भारत का निर्माण कर सकें। हमें अपने आपको हर रूप में आर्थिक, रक्षात्मक, तकनीकी तौर मजबूत बनाना है।

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Jan 13, 2026 - 10:30
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Ajit Doval के बयान पर मचा सियासी घमासान, Mehbooba Mufti बोलीं– गरीब युवाओं को उकसाने की कोशिश कर रहे NSA
पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) की अध्यक्ष महबूबा मुफ़्ती ने राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) अजीत डोभाल पर तीखा हमला करते हुए कहा है कि सदियों पुरानी घटनाओं के बदले की बात करना बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है। जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा कि एनएसए का कर्तव्य राष्ट्र की रक्षा करना है, लेकिन यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि उन्होंने "नफरत की सांप्रदायिक विचारधारा" में शामिल होने का विकल्प चुना है।

हम आपको याद दिला दें कि दिल्ली में विकसित भारत युवा नेता संवाद के उद्घाटन समारोह में शनिवार को डोभाल ने कहा था कि भारत को न केवल सीमाओं पर, बल्कि आर्थिक रूप से भी और हर तरह से खुद को मजबूत करना होगा, ताकि हमलों और दमन के दर्दनाक इतिहास का "बदला" लिया जा सके। इसके जवाब में अपनी पोस्ट में महबूबा ने कहा, "यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि श्री डोभाल जैसे उच्च पदस्थ अधिकारी, जिनका कर्तव्य देश को आंतरिक और बाहरी नापाक मंसूबों से बचाना है, उन्होंने नफरत की सांप्रदायिक विचारधारा में शामिल होने और मुसलमानों के खिलाफ हिंसा को सामान्य बनाने का विकल्प चुना है।" उन्होंने कहा, "सदियों पुरानी घटनाओं को लेकर 21वीं सदी में बदला लेने का आह्वान करना एक डॉग व्हिसल (सांकेतिक संदेश) है, जो गरीब और अशिक्षित युवाओं को एक अल्पसंख्यक समुदाय को निशाना बनाने के लिए उकसाता है, जो पहले से ही चारों ओर से हमलों का सामना कर रहा है।"

इसे भी पढ़ें: Mamata Banerjee के समर्थन में महबूबा मुफ्ती, बोलीं- वो शेरनी हैं, झुकेंगी नहीं

जहां तक डोभाल के बयान की बात है तो आपको बता दें कि उन्होंने कहा था कि भारत को अपनी सुरक्षा सिर्फ सीमाओं पर मजबूत नहीं करनी है, बल्कि आर्थिक और तकनीकी तौर पर भी देश को इतना मजबूत बनाना है कि हमलों और पराधीनता के अपने इतिहास का प्रतिशोध ले सकें। अपने संबोधन में डोभाल ने स्वतंत्रता के लिये किये गए संघर्षों, भारत की सभ्यता पर हुए हमलों और मजबूत नेतृत्व के महत्व का जिक्र करते हुए कहा था कि मैं गुलाम भारत में पैदा हुआ था। आप भाग्यशाली हैं कि स्वतंत्र भारत में पैदा हुए। सदियों तक हमारे पूर्वजों ने इसके लिये बहुत कुर्बानियां और अपमान सहे हैं। भगत सिंह को फांसी हुई, सुभाष चंद्र बोस को जीवन भर संघर्ष करना पड़ा, महात्मा गांधी को सत्याग्रह करना पड़ा और अनगिनत लोगों को जानें देनी पड़ीं। 

भारत के खुफिया ब्यूरो के प्रमुख 81 वर्षीय डोभाल ने कहा था, ‘‘हमारे गांव जले, हमारी सभ्यता को समाप्त किया गया, हमारे मंदिरों को लूटा गया और हम एक मूक दर्शक की तरह असहाय होकर देखते रहे। यह इतिहास हमें एक चुनौती देता है कि भारत के हर युवक के अंदर आग होनी चाहिये।’’ उन्होंने कहा था कि प्रतिशोध शब्द अच्छा तो नहीं है, लेकिन यह अपने आप में बड़ी शक्ति होती है। हमें अपने इतिहास का प्रतिशोध लेना है और हमें इस देश को फिर वहां पहुंचाना है, जहां हम अपने हक, अपने विचार और अपनी आस्थाओं के आधार पर एक महान भारत का निर्माण कर सकें। हमें अपने आपको हर रूप में आर्थिक, रक्षात्मक, तकनीकी तौर मजबूत बनाना है।

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