114 राफेल के बाद Su-57 लेगा भारत? मैक्रों के भारत पहुंचते ही रूस ने भारतीय एयरफोर्स के लिए दे दिया तगड़ा ऑफर

भारतीय वायुसेना के आधुनिकीकरण को लेकर बड़ी हलचल मची हुई है। पूरी दुनिया यह सोचने पर मजबूर हो गई है कि आखिर मोदी सरकार अपनी वायु सेना को मजबूत करने के लिए क्या-क्या कदम उठा रही है और इसी बीच 114 राफेल लड़ाकू विमानों की डील फाइनल हो चुकी है। लेकिन अब उससे भी बड़ी खबर सामने आ रही है और यह ऑफर चर्चा में है। जी हां, 114 राफेल लड़ाकू विमानों की फाइल आगे बढ़ने की खबरों के बीच रूस का ऑफर आ गया है भारत के सामने और रूस ने दे डाला है एसयू 57 का ऑफर फिर से और वो भी टेक्नोलॉजी ट्रांसफर और विंगमैन स्टेल ड्रोन पैकेज के साथ। दरअसल भारत पहले ही 36 डिसॉल्ट राफेल शामिल कर चुका है। इसके अलावा अब 114 अतिरिक्त राफेल की प्रक्रिया तेज होने की खबर है।इसे भी पढ़ें: अमेरिकी हथियारों की लोकेशन चीन ने कर दी लीक, खुश हो गया ईरान अब राफेल की ताकत एडवांस एईएसए रडार स्पेक्ट्रा इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर मैट्योर जैसी बीवीआर मिसाइल है जो इसे मल्टी रोल प्लेटफार्म के रूप में बेहद सक्षम बनाती है। अब 114 की संख्या इसलिए अहम है क्योंकि इससे कई नए स्क्वाडन बन सकते हैं और पुराने प्लेटफार्म की जगह ली जा सकती है। लेकिन अब रूस का पांचवी पीढ़ी का फाइटर जेट सुखोई एसयू57 भारत को पैकेज ऑफर के साथ प्रस्तावित बताया जा रहा है। इनमें प्रमुख बिंदु भी बताए जा रहे हैं। जैसे कि स्टील डिजाइन 100% टीओटी यानी कि टेक्नोलॉजी ट्रांसफर का दावा है। भारत में मैन्युफैक्चरिंग लाइसेंस प्रोडक्शन की संभावना है। विंगमैन स्टील ड्रोन के साथ यह पैकेज ऑफर किया गया है। यहां सबसे बड़ी बात यह है कि ऐसे बड़े दावे आमतौर पर विस्तृत मूल्यांकन, लागत, समय सीमा और वास्तविक टेक्नोलॉजी शेयरिंग की शर्तों पर निर्भर करते हैं और अंतिम निर्णय इन सभी कारकों पर आधारित होते हैं। चलिए अब जानते हैं कि रूस ने जो ऑफर किया है उसका सबसे बड़ा यूएसपी यानी कि विंगमैन ड्रोन होता क्या है?इसे भी पढ़ें: ये कैसी जिंदगी है? Delhi के Bad AQI पर CM Yogi का सवाल, UP के स्वच्छ वातावरण का किया जिक्र दरअसल रिपोर्ट में जिस स्ट्रेंथ विंगमैन की बात की गई है उसे रूस में Sukhoi S70 के नाम से जाना जाता है। यह लॉयड विंगमैन कॉन्सर्ट पर आधारित ड्रोन है जो फाइटर जेट के साथ उड़कर खतरनाक इलाकों में प्रवेश करता है। इलेक्ट्रॉनिक वॉारफेयर लक्ष्य साधना हथियार डिलीवरी और दुश्मन के एयर डिफेंस सिस्टम को ध्वस्त करना है। अब अगर यह पैकेज भारत को टेक्नोलॉजी और मैन्युफैक्चरिंग विकल्पों के साथ मिल जाता है तो यह फोर्स मल्टीप्लायर साबित हो जाएगा। अब रूस की टीम ने महाराष्ट्र के नासिक स्थित एचएल अब अगर 140 एसयू 57 का आर्डर होता है और 114 राफेल भी शामिल होते हैं तो कुल मिलाकर 250 प्लस नए जेट जुड़ सकते हैं। यानी कि हिंदुस्तान एयररोनॉटिक्स लिमिटेड सुविधा का आकलन किया। जहां Sukhoi एसयू 30 एमKI का निर्माण होता है। टारगेट था उद्देश्य था एसयू 57 के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर बदलाव कितने लागत कितनी कितनी संख्या पर मेड इन इंडिया आर्थिक रूप से व्यवहारिक होगा। तो रिपोर्ट्स के मुताबिक बड़ी संख्या जैसे कि 120 से 140 पर लोकल मैन्युफैक्चरिंग ज्यादा व्यवहार मानी जाती है क्योंकि स्केल से लागत घटती है। इसे भी पढ़ें: Akasa Air के CEO Vinay Dube बोले- हम अवसरवादी नहीं, Fiscal Discipline हमारी पहचानइंडियन एयरफोर्स की स्वीकृति स्क्वाड्रन शक्ति 42 के आसपास मानी जाती है। जबकि वास्तविक संख्या इससे कम है। ऐसे में बड़े ऑर्डर से स्क्वाडन गैप कम हो जाएगा। 4.5 और पांचवी पीढ़ी का संतुलन बनेगा। दीर्घकालीन आत्मनिर्भरता टीओटी के जरिए बल मिलेगा। लेकिन यह सब लागत, समय सीमा और वास्तविक टेक्नोलॉजी ट्रांसफर की गहराई पर निर्भर करेगा। अब सबसे बड़ी बात भारत का स्वदेशी पांचवी पीढ़ी का कार्यक्रम एचएल एमका है।

PNSPNS
Feb 17, 2026 - 12:02
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114 राफेल के बाद Su-57 लेगा भारत? मैक्रों के भारत पहुंचते ही रूस ने भारतीय एयरफोर्स के लिए दे दिया तगड़ा ऑफर
भारतीय वायुसेना के आधुनिकीकरण को लेकर बड़ी हलचल मची हुई है। पूरी दुनिया यह सोचने पर मजबूर हो गई है कि आखिर मोदी सरकार अपनी वायु सेना को मजबूत करने के लिए क्या-क्या कदम उठा रही है और इसी बीच 114 राफेल लड़ाकू विमानों की डील फाइनल हो चुकी है। लेकिन अब उससे भी बड़ी खबर सामने आ रही है और यह ऑफर चर्चा में है। जी हां, 114 राफेल लड़ाकू विमानों की फाइल आगे बढ़ने की खबरों के बीच रूस का ऑफर आ गया है भारत के सामने और रूस ने दे डाला है एसयू 57 का ऑफर फिर से और वो भी टेक्नोलॉजी ट्रांसफर और विंगमैन स्टेल ड्रोन पैकेज के साथ। दरअसल भारत पहले ही 36 डिसॉल्ट राफेल शामिल कर चुका है। इसके अलावा अब 114 अतिरिक्त राफेल की प्रक्रिया तेज होने की खबर है।

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अब राफेल की ताकत एडवांस एईएसए रडार स्पेक्ट्रा इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर मैट्योर जैसी बीवीआर मिसाइल है जो इसे मल्टी रोल प्लेटफार्म के रूप में बेहद सक्षम बनाती है। अब 114 की संख्या इसलिए अहम है क्योंकि इससे कई नए स्क्वाडन बन सकते हैं और पुराने प्लेटफार्म की जगह ली जा सकती है। लेकिन अब रूस का पांचवी पीढ़ी का फाइटर जेट सुखोई एसयू57 भारत को पैकेज ऑफर के साथ प्रस्तावित बताया जा रहा है। इनमें प्रमुख बिंदु भी बताए जा रहे हैं। जैसे कि स्टील डिजाइन 100% टीओटी यानी कि टेक्नोलॉजी ट्रांसफर का दावा है। भारत में मैन्युफैक्चरिंग लाइसेंस प्रोडक्शन की संभावना है। विंगमैन स्टील ड्रोन के साथ यह पैकेज ऑफर किया गया है। यहां सबसे बड़ी बात यह है कि ऐसे बड़े दावे आमतौर पर विस्तृत मूल्यांकन, लागत, समय सीमा और वास्तविक टेक्नोलॉजी शेयरिंग की शर्तों पर निर्भर करते हैं और अंतिम निर्णय इन सभी कारकों पर आधारित होते हैं। चलिए अब जानते हैं कि रूस ने जो ऑफर किया है उसका सबसे बड़ा यूएसपी यानी कि विंगमैन ड्रोन होता क्या है?

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दरअसल रिपोर्ट में जिस स्ट्रेंथ विंगमैन की बात की गई है उसे रूस में Sukhoi S70 के नाम से जाना जाता है। यह लॉयड विंगमैन कॉन्सर्ट पर आधारित ड्रोन है जो फाइटर जेट के साथ उड़कर खतरनाक इलाकों में प्रवेश करता है। इलेक्ट्रॉनिक वॉारफेयर लक्ष्य साधना हथियार डिलीवरी और दुश्मन के एयर डिफेंस सिस्टम को ध्वस्त करना है। अब अगर यह पैकेज भारत को टेक्नोलॉजी और मैन्युफैक्चरिंग विकल्पों के साथ मिल जाता है तो यह फोर्स मल्टीप्लायर साबित हो जाएगा। अब रूस की टीम ने महाराष्ट्र के नासिक स्थित एचएल अब अगर 140 एसयू 57 का आर्डर होता है और 114 राफेल भी शामिल होते हैं तो कुल मिलाकर 250 प्लस नए जेट जुड़ सकते हैं। यानी कि हिंदुस्तान एयररोनॉटिक्स लिमिटेड सुविधा का आकलन किया। जहां Sukhoi एसयू 30 एमKI का निर्माण होता है। टारगेट था उद्देश्य था एसयू 57 के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर बदलाव कितने लागत कितनी कितनी संख्या पर मेड इन इंडिया आर्थिक रूप से व्यवहारिक होगा। तो रिपोर्ट्स के मुताबिक बड़ी संख्या जैसे कि 120 से 140 पर लोकल मैन्युफैक्चरिंग ज्यादा व्यवहार मानी जाती है क्योंकि स्केल से लागत घटती है। 

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इंडियन एयरफोर्स की स्वीकृति स्क्वाड्रन शक्ति 42 के आसपास मानी जाती है। जबकि वास्तविक संख्या इससे कम है। ऐसे में बड़े ऑर्डर से स्क्वाडन गैप कम हो जाएगा। 4.5 और पांचवी पीढ़ी का संतुलन बनेगा। दीर्घकालीन आत्मनिर्भरता टीओटी के जरिए बल मिलेगा। लेकिन यह सब लागत, समय सीमा और वास्तविक टेक्नोलॉजी ट्रांसफर की गहराई पर निर्भर करेगा। अब सबसे बड़ी बात भारत का स्वदेशी पांचवी पीढ़ी का कार्यक्रम एचएल एमका है।

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