ब्रिटेन में भारत के उच्चायुक्त ने स्काई न्यूज की पत्रकार याल्दा हकीम को एक तस्वीर दिखाई जिसमें पाकिस्तानी सेना अमेरिका की तरफ से प्रतिबंधित आतंकवादी हाफिज अब्दुल रऊफ के पीछे खड़ी नजर आ रही है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान आतंकवादियों को राजकीय अंतिम संस्कार दे रहा है। इससे पहले भारत के विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने भी प्रेस कान्फ्रेंस करते हुए आतंकियों के जनाते में पाक सेना के अधिकारियों के शामिल होने को लेकर पाकिस्तान को लताड़ लगाई थी। उन्होंने इस्लामाबाद की तीखी आलोचना करते हुए कहा कि आतंकवादियों को राजकीय अंतिम संस्कार देना पाकिस्तान में एक प्रथा बन गई है। पाकिस्तान की ओर से कोई भी आगे की कार्रवाई, जिनमें से कुछ हम आज देख रहे हैं, एक बार फिर पाकिस्तान द्वारा की गई बढ़ोतरी के अलावा और कुछ नहीं है, और इसका उचित तरीके से जवाब दिया जाएगा और दिया भी जा रहा है।
ऑनलाइन वायरल एक वीडियो में रऊफ को वर्दीधारी पाकिस्तानी सेना के जवानों की मौजूदगी में नमाज़ का नेतृत्व करते हुए दिखाया गया है। यह सभा कथित तौर पर प्रतिबंधित आतंकी संगठनों से जुड़े व्यक्तियों के लिए आयोजित की गई थी, जो पंजाब के मुरीदके में आतंकी ढांचे को निशाना बनाकर किए गए भारतीय हमलों में मारे गए थे। रऊफ को 2010 में संयुक्त राज्य अमेरिका द्वारा विशेष रूप से नामित वैश्विक आतंकवादी (एसडीजीटी) नामित किया गया था।
24 दिसंबर 1999 को कंधार में इंडियन एयरलाइंस के विमान आईसी-814 हाईजैक का मास्टरमाइंड अब्दुल रऊफ अजहर भी ऑपरेशन सिंदूर में मारा गया है। पाक मीडिया ने इसकी पुष्टि की है। बता दें, काठमांडू से दिल्ली आ रहे विमान को हरकत-उल-मुजाहिदीन के पांच आतंकी हाईजैक करके तालिबान-शासित अफगानिस्तान ले गए थे। इसके जरिए कुख्यात आतंकी मसूद अजहर को रिहा कराया गया था। रऊफ को अमेरिका ने 2 दिसंबर 2010 को वैश्विक आतंकी घोषित किया था। मसूद अजहर के भूमिगत होने के बाद 2007 में उसका भाई रऊफ जैश का प्रमुख बन गया। इसी आतंकी संगठन ने भारतीय संसद पर हमला किया था। 2002 में पत्रकार डैनियल पर्ल की हत्या, 26/11 मुंबई हमला, 2016 का पठानकोट हमला और 2019 का पुलवामा हमला इसी संगठन के आतंकियों ने किया था।