'मेरी मौत करीब है', कैंसर की चौथी स्टेज के दौरान अकेलेपन से भर गई थी मनीषा कोइराला की दुनिया, लगा सब खत्म हो रहा
कैंसर डायग्नोसिस की पहली खौफनाक रात और अकेलेपन पर मनीषा कोइराला का दर्द छलका। इस बीमारी को हराने के बाद जीवन के प्रति उनका नजरिया बदला और अब वह सेहत, परिवार और सीमित रिश्तों को ही प्राथमिकता देती हैं।
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