भारत की नीतियों ने विकास को नयी रफ्तार दी: Shaktikanta Das

व्यापार शुल्क के बढ़ते खतरों के बीच प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) के एक शीर्ष अधिकारी ने शुक्रवार को कहा कि सरकार की नीतियों और सुधारों के कारण भारत एक ऐतिहासिक यात्रा की दहलीज पर है और परिस्थितियां उसके पक्ष में हैं। प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव शक्तिकांत दास ने पहला विवेक देवराय स्मृति व्याख्यान देते हुए कहा कि ऐसे समय में जब पिछले दशकों में वैश्वीकरण को गति देने वाली आम सहमति कमजोर पड़ गई है और बहुपक्षीय सहयोग हासिल करना कठिन हो गया है, भारत ने आत्मनिर्भरता की परिकल्पना को अपनी नीतियों के सर्वोपरि सिद्धांत के रूप में अपनाया है। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के पूर्व गवर्नर दास ने स्पष्ट किया कि आत्मनिर्भर अर्थव्यवस्था का मतलब अलग-थलग पड़ना नहीं, बल्कि यह मूलभूत क्षमता और लचीलापन विकसित करने की एक रणनीति है। उन्होंने कहा कि आर्थिक आत्मनिर्भरता का अर्थ है घरेलू स्तर पर महत्वपूर्ण वस्तुओं और प्रौद्योगिकियों के उत्पादन की क्षमता विकसित करना और विदेशी स्रोतों पर अत्यधिक निर्भरता को कम करना। दास ने कहा कि भारत आज एक ऐतिहासिक यात्रा की दहलीज पर खड़ा है। उन्होंने कहा कि ज्ञात और अज्ञात स्रोतों से चुनौतियां और बाधाएं आती रहेंगी।

PNSPNS
Jan 11, 2026 - 20:33
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भारत की नीतियों ने विकास को नयी रफ्तार दी: Shaktikanta Das

व्यापार शुल्क के बढ़ते खतरों के बीच प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) के एक शीर्ष अधिकारी ने शुक्रवार को कहा कि सरकार की नीतियों और सुधारों के कारण भारत एक ऐतिहासिक यात्रा की दहलीज पर है और परिस्थितियां उसके पक्ष में हैं।

प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव शक्तिकांत दास ने पहला विवेक देवराय स्मृति व्याख्यान देते हुए कहा कि ऐसे समय में जब पिछले दशकों में वैश्वीकरण को गति देने वाली आम सहमति कमजोर पड़ गई है और बहुपक्षीय सहयोग हासिल करना कठिन हो गया है, भारत ने आत्मनिर्भरता की परिकल्पना को अपनी नीतियों के सर्वोपरि सिद्धांत के रूप में अपनाया है।

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के पूर्व गवर्नर दास ने स्पष्ट किया कि आत्मनिर्भर अर्थव्यवस्था का मतलब अलग-थलग पड़ना नहीं, बल्कि यह मूलभूत क्षमता और लचीलापन विकसित करने की एक रणनीति है।

उन्होंने कहा कि आर्थिक आत्मनिर्भरता का अर्थ है घरेलू स्तर पर महत्वपूर्ण वस्तुओं और प्रौद्योगिकियों के उत्पादन की क्षमता विकसित करना और विदेशी स्रोतों पर अत्यधिक निर्भरता को कम करना। दास ने कहा कि भारत आज एक ऐतिहासिक यात्रा की दहलीज पर खड़ा है। उन्होंने कहा कि ज्ञात और अज्ञात स्रोतों से चुनौतियां और बाधाएं आती रहेंगी।

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