ग़ाज़ा: भय और अनिश्चितता के के बीच, उम्मीद की किरण बनी ये शिक्षिका
ग़ाज़ा में हर सुबह, सालवा नामक एक शिक्षिका अस्थाई शिक्षण केन्द्र का दरवाज़ा खोलती हैं और अपने काम में जुट जाती हैं. सालवा अस्थिर हालात के बीच अपनी कक्षा में आने वाले बच्चों के लिए, एक सुरक्षित सहारे की तरह है. उनकी कक्षा सिर्फ़ पाठन-लेखन की जगह भर नहीं है, बल्कि एक ऐसा स्थान है, जहाँ बच्चे फिर से स्वयं को देखा और समझा हुआ महसूस कर पाते हैं.
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